तुवर दाल में भारी तेजी, ऊंचे भाव पर दालों में ग्राहकी नगण्य

तुवर दाल में भारी तेजी, ऊंचे भाव पर दालों में ग्राहकी नगण्य
इस वर्ष देश में रबि और खरीफ की फसल की पैदावार में अच्छी बढ़ोत्री हुई है। कृषि विशेषज्ञो और सरकारी ऐजेंसियो के अनुसार इस वर्ष पाकृतिक मौसमो का सहारा मिलने से दोनो सीजन की पैदावार मे बढ़ोत्री हुई है। उनके अनुसार निर्यात होने के बावजूद देश में मौजूदा स्टाक से भी अनुमान लगाया जा सकता है  की देश में प्राकृतिक सौगातो की कमी नहीं है। शाक सब्जियों में भी कृषि उत्पादन बढ़ रहा है हांलाकि महंगाई के दौर में अब 40 रु. से नीचे कोई ग्रीन सब्जी का भाव नहीं है। टमाटर ने राहत दी है मगर आलू- प्याज की बंपर पैदावार के बावजूद  भाव दोनों का 15 रु. हो गया है। व्यापारिक क्षेत्रों से मिली खबर के अनुसार स्थानीय संयोगितागंज थोक दलहन मंडी में गत् हप्ते चना, मसूर में तेजी रही। थोक दालों के व्यापार में मांग अभाव रहने से दालो में स्थिरता रही। हांलाकि तुवर और दाल ने इस वर्ष महांगाई में रेकार्ड तोड़ दिया है। दोनों का थोक मंडी भाव तुवर 80 रु. किलो  और दाल का भाव 98-100 रु. किलो। माल संस्कृति में तुवर दाल का भाव 130-140 रु. किलो है। उपभोक्ताओंं  की वाकपटुता के अनुसार थोक दालों का व्यापार 7000- 8500 रु. के बीच है। देशभर में दालों पर उपभोक्ता मांग में भारी गिरावट है। काबली चना डालर का भाव तो 90 रु. के उपर ही है। जबकि  थोक भाव 5500-6500 रु. का है। काबली चना डॉलर में विगत् हप्तो में  मंदी  का दौर रहा। डालर चने  की आंवके 5000 बोरिया के लगभग है और स्टॉक तथा निर्यात मांग नहीं निकलने से भाव इस वर्ष काबली चना ही  जनता को राहत दे रहा है। हांलाकि वर्तमान दौर में बाजार वाद  उत्पादन-आपूर्ति और स्टाक को नहीं देखता है उसे सिर्फ उपरी भाव पर स्थिर रखते हुए अंधी कमाई ही सुझाती हø। 

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