हीरा पर आईजीएसटी से उद्यमियों में भारी नाराजगी

हीरा पर आईजीएसटी से उद्यमियों में भारी नाराजगी
विदेश में आयोजित प्रदर्शनी से पुन: आयात होते
हमारे प्रतिनिधि
सूरत। मुंबई कस्टम विभाग द्वारा जारी डायमंड के ग्रीडिंग के बारे में नए नोटिफिकेशन को लेकर हीरा उद्योग में भारी नाराजगी है। जीएसटी लागू होने के बाद हीरा उद्योग में उत्पन्न प्रश्नों को लेकर जीएसटी कमेटी द्वारा कोई समाधान न आने से हीरा की छोटी-बड़ी सभी इकाइयों के लिए कठिनाई बढ़ी है। विदेशों में आयोजित प्रदर्शनी से पुन: आयात होते कट तथा पालिश्ड डायमंड तथा जेवरात पर क्रमश: 0.25 और 3% जितनी आईजीएसटी लागू होने से हीरा उद्यमियों में सख्त विरोध देखने को मिल रहा है।
इसके अलावा हीरा उद्योग में अलग-अलग सर्विस पर 5% से लेकर 18% तक जीएसटी लागू होने से छोटी इकाइयों में अधिक कठिनाई देखने को मिल रही है।
हाल ही में सूरत आए जीएसटी एडवाइजरी कमेटी के ओमप्रकाश मित्तल को हीरा उद्योग के अग्रणी, जीजेईपीसी के प्रतिनिधि और सूरत डायमंड एसो. के अधिकारियों ने हीरा उद्योग को होने वाली तकलीफों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। जीजेईपीसी के डायरेक्टर शिल्पा शेठ के साथ बात करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशों में आयोजित प्रदर्शनी में कट तथा पालिश्ड डायमंड पुन: आयात करने से इस पर आईजीएसटी उचित नहीं। वैसे भी जब हीरा की बिक्री होती है तो उस पर डय़ूटी लागू होती है लेकिन जो कट-पालिश्ड हीरे की बिक्री हुई नहीं उसे पुन: वापस लाने पर 0.25 और ज्वेलरी पर 3% आईजीएसटी को लेकर हीरा उद्योग कठिनाई में है। इसके अलावा हीरा उद्योग में ग्रीडिंग से लेकर सर्टिफिकेशन तक सभी सर्विसीस पर 5% से लेकर 18% जीएसटी लागू है। इस कर बोझ को दूर करने की सिफारिश की गयी है। रिफंड के प्रोसेस को गति देने के लिए हमने जीएसटी एडवाइजरी कमेटी के ओमप्रकाश मित्तल को सिफारिश की है।
उल्लेखनीय है कि जाब वर्क पर 5% जीएसटी लागू है जिसका रिफंड न मिलने से सबसे अधिक तकलीफ छोटी इकाइयों को हो रही है। पिछले एक वर्ष में सूरत के हीरा उद्योग में 5 से 25 घंटी वाले कारखाने बंद होना उदाहरण है। जो जीएसटी का कर बोझ छोटी इकाइयों के न सहन करने का द्योतक है।

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