भारतीय जनता की विजय

`आज हमारी सरकार मात्र एक वोट से गिर गई है, हमारे कम सदस्य होने पर कांग्रेस हस रही है, मगर ये बात कांग्रेस कतई न भूले की एक दिन ऐसा आएगा की पूरे भारत में हमारी सरकार होगी और पूरा देश कांग्रेस पर हंस रहा होगा।'
वर्ष 1997 में भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयीजी के कहे ये शब्द आज नरेद्र मोदी ने यथार्थ ठहराकर अटलजी को श्रद्धांजलि दी है, स्वतंत्र भारत में जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद लगातार दूसरी बार संपूर्ण बहुमत प्राप्त करने वाले तीसरे प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी है। 1984 में इंदिराजी ने लोकसभा में 377 सीटें प्राप्त की थी और इंदिराजी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने 419 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत हासिल की थी, लेकिन।
2019 में 17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में आज तक के इतिहास में सबसे निम्न स्तर का प्रचार देखने-सुनने को मिला और भविष्य में उसका पुनरावर्तन न हो ऐसी आशा रखें। सभी विपक्ष का मात्र एक ही मुद्दा था- नरेद्र मोदी हटाओ- भगाओ। यह चुनाव मोदी के नाम पर ही लड़ा और जीता गया है। नरेद्र मोदी ने फिर एक बार मोदी सरकार-के-नाम पर जनादेश मांगा और जनता ने होशो-हवास में दिल खोलकर दिया है तब मोदी ने कहा की- यह विजय भारत की है, भारत की जनता की है और सबको साथ लेकर- सबके विकास के लिए शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण होगा। बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने `भारत की विजयी की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के नेतृत्व में जनता द्वारा व्यक्त किए गए विश्वास की विजय है।' इस जुगल जोड़ी का प्रताप है।
5 वर्ष पहले 2014 में देशभर में घूमकर लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी का बहुमत प्राप्त करने वाले नरेद्र मोदी ही थे यद्यपि विजय आसान नहीं थी, संयोग अनुकूल- समर्थक थे। यूपीए के दस वर्ष के `दु:शासन' की सहायता मिली थी। इस बार मोदी सरकार के कामकाज की कसौटी थी। सभी विपक्षी नेताओं का एकमात्र लक्ष्य और मुद्दा-नरेद्र मोदी थे। झूठ और आरोपों की बौछार ने हद पार कर दी, लेकिन जनता की नब्ज और शांत पानी की गहराई मोदी ने भांप ली थी और उनको जनता पर विश्वास था। जन कल्याण की योजनाओं में लाभार्थियों के कृतघनीय न होने का भरोसा था।
विपक्षी नेतओं के अहम् और स्वार्थ टकराते थे अंदर ही अंदर सत्ता की-सत्ता प्राप्त करने की खींचतान थी और पराजय निश्चित बनने पर बहानेबाजी शुरू हुई। ममता दीदी ने मार्क्सवादी हिंसा का मार्ग पकड़ा लेकिन दीदीगीरी का परिणाम मिला है। उत्तर प्रदेश में जातीयवाद को नकार दिया गया। देशभर में कांग्रेस का परिवार वाद अमान्य हुआ। राहुल गांधी ने बहन प्रियंका की सहायता ली, लेकिन वंशवाद का युग पूरा हुआ। विपक्षी छावनी में चंद्राबाबू नायडू मोदी विरोधी मोर्चे के लिए भागदौड़ कर रहे थे और आखिरकार पराजय हुई। आंध्र में नाक बचाना चाहते थे और मस्तक कट गई। राज्य विधानसभा की 175 में से सिर्फ 25 सीट मिली और लोकसभा की 23 में से सिर्फ 2 मिली! दिल्ली लेने जाने पर `अमरावती' खो बैठे हø।
इस चुनाव के परिणामों ने कांग्रेस को सबक सिखाया है। गुजरात में हिंदुत्व और कर्नाटक में कौटिल्य की भूमिका के बाद 3 हिंदी भविष्य राज्यों में येन-केन सत्ता प्राप्त करने के बाद सत्ता का नशा चढ़ा था। अब उतरना चाहिए।
भाजपा के नेतृत्व के तहत एनडीए की सहयोगी पार्टियों ने भागीदारी में और हिस्सा प्राप्त करने का विवाद शुरू किया था। इसके बावजूद भाजपा ने बड़ा मन रखा उसका लाभ मिलने और मोदी का विराट स्वरूप देखने के बाद अब परिवार में शांति रहने की आशा रखी जा सकती है। अब आगे के पांच वर्ष कामकाज का फल देने का है। अर्थव्यवस्था-उत्पादन-बेकारी निवारण मुख्य है। सबका साथ, सबका विकास का वचन यथावत् है और कांग्रेस के राहुल गांधी से लेकर कश्मीर के उमर अब्दुल्ला तक नेताओं ने जनादेश को स्वीकार किया है तब चुनाव की दुश्मनी कटुता भूलकर राष्ट्र-कल्याण में सहयोग देकर विपक्ष अपनी छवि और भविष्य सुधार सकता है। आशा रखें की अब राजनीतिक नहीं, राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेगा अर्थव्यवस्था के साथ आतंकवाद की चुनौती का सामना करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी सफल हुए ह और देश की तरह विश्व में भारत का आन-बान-शान हो। नमो के नाम का डंका बजता रहे...  

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