धान की खेती छोड़ने वाले किसानों को मिलेगा सब्सिडी का लाभ

धान की खेती छोड़ने वाले किसानों को मिलेगा सब्सिडी का लाभ
किसानों का मक्का व अरहर की खेती करने का फैसला
हमारे संवाददाता
हरियाणा में लगातार गंभीर हो रहे जल संकट से निपटने को लेकर हरियाणा सरकार की तरफ से किसानों को धान की खेती से हटाने का फैसला किया गया है।जिसके तहत अब उन किसानों को प्रोत्साहन के रुप में सब्सिडी देगी जो कि धान की खेती छोड़कर मकृका और अरहर की खेती करेंगे।
दरअसल हरियाणा सरकार की तरफ से धान की खेती छोड़ने वाले किसानों को चार से साढे चार हजार रुपए प्रति एकड़ तक प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।जिसमें नगद प्रोत्साहन,बीज और किसानों की फसल का बीमा प्रीमियम शामिल है।जिसको लेकर इस बार जो भी किसान धान की फसल नहीं  बोएंगे उन्हें दो हजार रुपए प्रति एकड़ का नगद प्रोत्साहन दिया जाएगा।जिसको लेकर 27 मई से आरंभ होने वाले वेब पोर्टल पर किसानों को पंजीकरण कराना होगा।चूंकि हरियाणा में प्रत्येक वर्ष धान का रकबा और उत्पादन बढ रहा है।जिसके तहत 2014 में 12 लाख 77 हेक्टयेर जमीन में 39 लाख 89 हजार टन धान का उत्पादन हुआ था।वहीं 2018 में 14 लाख 47 हजार हेक्टेयर जमीन में 45 लाख 16 हजार टन धान का उत्पादन हुआ था। जिसको लेकर एक किलो चावल उत्पादन में तीन से पांच हजार लीटर पानी की जरुरत होती है।जिसके तहत हरियाणा के करनाल ,कैथल, यमुनानगर, सोनीपत, जींद, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों में भूमिगत जल की समस्या लगातार बढती जा रही है।जिसके तहत दक्षिण हरियाणा के कई जिले पहले से डार्क जोन में है।इन सातों जिलों के एक एक ब्लॉक यानि सात ब्लॉक को पहले चरण में धान मुक्त करने का लक्ष्य हरियाणा सरकार ने रखा है।जिसके तहत करनाल के नीलीखेड़ी,कैथल के पूंडरी,अंबाला के अंबाला-1,जींद के नरवाना,कुरुक्षेत्र के थानेसर-1 व यमुनानगर के रादौर और सोनीपत जिले के गन्नौर  ब्लाक में 50 हजार हेक्टेयर यानि लगभग सवा एक लाख एकड़ भूमि पर मक्का और अरहर की खेती होगी।इस योजना पर काम तो पिछले डेढ माह से चल रहा था।

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