चना में तेजी, दाल-दलहनों में भी महंगाई से राहत नहीं

चना में तेजी, दाल-दलहनों में भी महंगाई से राहत नहीं
थोक मे तुवॉरदाल रु. 90 प्रति किलो 
गत् हप्ते दाल दलहनों में जनता को राहत नहीं मिली । चना, तुवॉर, उड़द, मूंग, मसूर, सबकी कीमते लगातार बढ़ती रही है । मिली जानकारी के अनुसार सभी दलहन सरकारी एमएसपी भाव से नीचे बिक रहे थे जिनमें सुधार लगातार जारी था । हालांकि कृषकों को को ऊंचे भाव नहीं मिले है । ये तेजी तो कृषकों से स्टाकिस्टों से की हुई की हुई सस्ती खरीदी को ऊंचे भाव की मुनाफा वसूली है। इससे बाजार में तेजी होना बताई जा रही है । चना में सट्टा बढ़ सकता है । गत् हप्ते यह 4400 रु. से बढ़ते हुए 4550-4600 रु. तक बताया जा रहा था । थोक मंडी में दलहनों के साथ ही मूंगदाल, तुवॉर दाल, मसूर दाल, उड़द दाल में  तेजी होना बताई गई है । मोगर थोक में 8500 से 8800 रु. तक का भाव एक आकार्य है । तुवॉर दाल 90-95 रु.। दलहनों में भारी ऊंचे भाव होने से दालें में भारी ऊंचे भाव हो जाने से दाल मिलों का कामकाज प्रभावित होना बताया जा रहा है । हालांकि  मूंगदाल में लगभग 20 रु. तक की नरमी आना बताया गया है । भारी ऊंचे भाव पर सभी दाले 85 से 125 रु. तक खुले बाजार एवं  माल संस्कृति में बिकते देखी देखी गई है । एक वर्ष में  कीचन सामग्रियों दाल-मसाले पर 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ी महंगाई पर ली गई जानकारी में जनता के हवाले से महंगाई का स्त्रोत स्टाकिस्ट और ब्लैक मार्केटियर्स मंडी दलाल बताए गये है वही उन्होंने इलेक्ट्रानिक मीडिया को भी महंगाई का जिम्मेदार माना है । उनकी नजरों में देश की विभिन्न मंडियों में बिचौली दलाल प्रथा इलेक्ट्रानिक मीडिया अप्रत्यक्ष रूप से स्टाकिस्टो और कार्पोरेट सेक्टर के लिये जादुई भाषा का प्रयोग कर महंगाई बढ़ाने में सहयोग कर रहे माना  है । उनका मानना है कि मीडिया में जिस प्रकार विश्लेषकों की बहस महंगाई पर बताई जाती है  वह जनता को भरमाने की कोशिश  भर रहती है । निर्यात और आयात भी महंगाई बढ़ाने का कारण है । देश में किसी दृष्टि से प्राकृतिक संसाधनो के उत्पादन में कमी नहीं है । जनता  ने आकेशित होते हुए भी कहने में परहेज नहीं किया कि पूर्व सरकार द्वारा प्रेरित महंगाई तो निर्यात और व्यवसायिक कार्पोरेट ऊंचे घरानों की देन है । मूंग और दाल का स्टॉक कितना है यह तो जनता जानती नहीं है मगर कृषकों की नजर में मूंग का उत्पादन इतना कम नहीं हुआ है । इस वर्ष मूंग पर अप्रत्याशित भाव बढ़े । इंदौर खेरची मंडी में मूंग का भाव खेरची में 80 से 105 रु. तक और दाल का भाव 85 से 125 रु. तक होना बताया गया है । थोक मंडी में मूंग का भाव 6300 से लेकर 6400 रु. तक  जबकि दाल का भाव  7100 से 7700 रु. तक होना बताया गया है । तुवॉर दाल 8900 से 9600 रु. और फूल का भाव 8800 रु. तक बताया गया है । सवाल यह है कि कौनसी दाल पर खेरची व्यापारी जनता को लूट रहा है यह जांच नहीं होती है और दाल की किस्म पर जनता ठगा रही है । डालर चना की मंडी में आवकें कोई 2000 से 3000 बोरी तक होना बताई जा रही है । फिर भी थोक मंडी में डालर काबुली चना भाव 5900 से 6300 है जबकि बिटकी का भाव 4200 से 4300 रु. तक है। खेरची में जनता को 75 से 95 रु. तक ऊंचे भाव पर माल मिल रहा है । माल संस्कृति में ही मूंग मोगर का भाव का भाव 135 रु. किलो तक प्रींट में देखा गया है । अच्छे उत्पादन और भारी स्टॉक के बावजूद काबुली चना जनता को भारी ऊंचे भाव पर नसीब है तो अछत बताकर मूंग और अन्य सामग्रियों का भाव प्रशासन क्यों नहीं लेता है ।

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