एएआर के फैसले पर राय देगी जीएसटी पीठ

एएआर के फैसले पर राय देगी जीएसटी पीठ
जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में होगा विचार
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (जीएसटी) में किसी विवाद की स्थिति में कारोबारियों को राहत देने को लेकर केद्र सरकार एक और अपीलीय पीठ के गठन पर पर विचार कर रही है।जिसको लेकर जीएसटी काउंसिल की अगले महीने अपीलेट अथॉरिटी फॉर एडवांस रुलिंग (एएआर) की एक राष्ट्रीय पीठ की स्थापना पर विचार करेगी।जिसका मुख्य काम एएआर द्वारा अलग अलग राज्यों में एक ही तरह के मामलों में दिए अलग अलग फैसलों पर पुनर्विचार करना होगा।
दरअसल एएआर की स्थापना जीएसटी व्यवस्था में करदाताओं यानि कारोबारियों में किसी मुद्दे को लेकर मतभेद की स्थिति में सही नतीजे पर पहुंचने को लेकर की गई थी।बहरहाल केद्रीय राजस्व विभाग को लगता है कि अपने वर्तद्रान स्वरुप में एएआर अपने मकसद में कामयाब नहीं हो रहा है।ऐसे में दूसरी पीठ की स्थापना से जीएसटी कानून के तहत किसी एक तरह के कारोबारी निर्णय पर एक राय बनाने में आसानी होगी।जिसको लेकर एक अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि राजस्व विभाग में इस तरह का विचार जोर पकड़ रहा है कि एएआर की राष्ट्रीय पीठ का गठन होना चाहिए।जिसका काम सिर्फ उन्हीं मामलों पर विचार करना रहेगा जिनमें एएआर ने मामले की समान प्रकृति के बावजूद फैसले अलग अलग दिए हों।जिसको लेकर इस अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि जून में जीएसटी काउंसिल की प्रस्तावित बैठक में इस पर विचार किए जाने की संभावना है।ऐसे में राज्यों में स्थित एस्रा ने इस वर्ष मार्च के अंत तक लगभग 470 फैसले सुनाए हø।वहीं एएआर के अपीलीय प्राधिकरण (एएआर) ने 69 मामले सुलझाए हø।हालांकि राज्यों में एएआर द्वारा दिए फैसलों में से लगभग 10 मामलों में विरोधाभासी थे।जिनमें से कुछ पर बाद में केद्रीय अप्रत्यक्ष कर एण्वं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) ने स्थिति स्पष्ट की।जिसको लेकर इस अधिकारी ने कहा कि दूसरे अपीलीय प्राधिकरण की स्थापना को लेकर जीएसटी कानून में बदलाव करना होगा क्योंकि इसका वर्तमान स्वरुप दूसरी पीठ की स्थापना की इजाजत नहीं देता है।यद्यपि इस अधिकारी की तरफ से यह भी कहा गया है कि इसको लेकर राज्यों की सहमति की जरुरत होगी। उल्लेखनीय है कि जीएसटी कानून के तहत प्रत्येक राज्य को एक अथॉरिटी फॉर एडवांस रुलिंग (एएआर) की स्थापना करनी होती है।जिसमें एक सदस्य केद्रीय कर विभाग का और एक संबंधित राज्य का होता है।ऐसे में यदि कोई कारोबारी टैक्स विभाग के किसी फैसले से सहमत नहीं होता है तो उसे 30 दिनों के भीतर एएआर में अपील करनी होती है।जिसे एक महीना और बढाए जाने का प्रावधान है।ऐसे मं यदि कारोबारी एएआर के फैसले से भी सहमत नहीं होता है तो वह अपीलेट अथॉरिटी में याचिका लगा सकता है।जिसमें एक सदस्य सीबीआइसी द्वारा नामित चीफ टैक्स कमिश्नर होता है ओर एक सदस्य राज्य का टैक्स कमिश्नर होता है।

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