टेक्सटाइल उद्योग में टेक्नोलाजी का उपयोग बढ़ा

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मुंबई। स्टेरियोलिथोग्राफी 3डी प्रिन्टिंग की प्रक्रिया है जिसमें प्लास्टिक जैसे लिक्विड का उपयोग कर परत दर परत ढांचा तैयार किया जाता है। जिसे लेजर के उपयोग से ठोस बनाया जाता है।
भारतीय टेक्सटाइल उद्योग भी कार्यक्षमता में सुधार करने के लिए इंडस्ट्री के 4.0 कंसेप्ट का उपयोग करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
गुजरात की जीएचसीएल ने टेक्सटाइल्स की ऐसी रेंज बनायी है, जो धागे एवं टेक्नोलाजी के मिश्रण से बनी है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है, रेडिएशन के दुष्प्रभाव की रोकथाम करती है तथा लोगों को ठीक ढंग से सोने में मदद करती है। कंपनी ने टिकाऊ बेड लिनन के रेंज का भी निर्माण किया है, जिसका रिसाइकल्ड पेट बोतलों का उपयोग कर निर्माण किया जाता है। आईआईटी दिल्ली में टेक्सटाइल टेक्नोलाजी विभाग द्वारा नेनोटेक्नोलाजी का उपयोग कर आधुनिक टेक्सटाइल की रेंज विकसित की गई है।
2015 में भारत का टेक्सटाइल परिधान बाजार 108.5 बिलियन डालर था और 2023 तक उसके 226 बिलियन डालर पर पहुंचने की संभावना है। 

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