कॉटन यार्न मिलों ने उत्पादन घटाया

मुंबई । भारत का चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में कॉटन यार्न निर्यात 22% घटा है। कॉटन यार्न की वैश्विक मांग में कमी और घरेलू बाजार में कॉटन के दाम काफी ऊंचे होने से निर्यात पर सीधा असर पड़ा है। कॉटन यार्न की मांग सुस्त पड़ने से देश में कार्यरत स्पिनिंग मिलों में आंशिक बंदी देखी जा रही है। चीन एवं बांग्लादेश के पास कॉटन यार्न का पर्याप्त स्टॉक होने से इन दोनों देशों की मांग बेहद सुस्त है। कॉटन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के कार्यकारी निदेशक डॉ. सिद्धार्थ राजगोपाल चीन की जीडीपी ग्रोथ दबाव में होने से कॉटन यार्न की मांग घटी है और बांग्लादेश की मांग में भी सुस्ती देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में कॉटन के दाम ऊंचे होने से कॉटन यार्न में मार्जिन बेहद कम रह गया है जिससे निर्यात घटा है।  
चीन पाकिस्तान एवं विएतनाम में डय़ूटी फ्री कॉटन यार्न की सप्लाई कर रहा है जिससे भी भारतीय कॉटन यार्न निर्माता अपना बाजार हिस्सा खो रहे है। बता दें कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा कॉटन यार्न निर्यातक देश हैं एवं चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, विएतनाम और दक्षिण कोरिया इसके मुख्य बाजार हैं। भारत से वर्ष 2018-19 में कुल हुए निर्यात में चीन का हिस्सा एक तिहाई था जबकि विएतनाम को निर्यात में 72% का इजाफा हुआ था। 
इसके विपरीत, इस साल चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान एवं यूरोपीयन बाजारों को यार्न का निर्यात फिसला है। स्पिनिंग मिलें घरेलू बाजार की ओर लौटी है लेकिन यहां उन्हें बांग्लादेश से आ रहे डय़ूटी फ्री गार्म़ेंट से चुनौती मिल रही है। वर्ष 2018-19 में बांग्लोदश से गार्म़ेंट आयात 82% बढ़कर 36.5 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया। बांग्लादेश में अधिकतर गार्म़ेंट का उत्पादन चीन से आए डय़ूटी फ्री फैब्रिक्स से होता है।  
साउथ इंडियन मिल्स एसोसिएशन का कहना है कि लगभग 60% यार्न मिलों ने अपने उत्पादन में कमी की है और कार्यकारी दिवसों को घटाया है एवं कुछ मिलें तीन पारी की जगह दो पारी में ही कार्य कर रही है। उत्तर भारत में तकरीबन 50% मिलें प्रभावित हुई है । नए ऑर्डर न आने से कुछ मिलों ने उत्पादन रोक दिया है। कुल 440 लाख स्पिंडल्स में से तकरीबन 60 लाख स्पिंडल्स मांग कमजोर होने से थम गए है।

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