मसाला मार्केट में कमजोर मांग से कालीमिर्च के दाम स्थिर

मसाला मार्केट में कमजोर मांग से कालीमिर्च के दाम स्थिर
हमारे संवाददाता
मुंबई । कालीमिर्च उत्पादक इलाकों में बारिश की आंख मिचौली के बावजूद दिसावरी बाजारों की कमजोर मांग से घरेलू कालीमिर्च के दाम कमोबेश स्थिर हैं। अनगार्बल्ड कालीमिर्च के भाव 325-350 रुपए प्रति किलोग्राम की रेंज में अप्रैल-मई से चल रहे हैं जो पिछले साल की समान अवधि के भाव से 30 रुपए नीचे हैं। पिछले साल समान समय में कालीमिर्च के दाम 370 रुपए प्रति किलोग्राम थे। कालीमिर्च के मौजूदा भाव कुछ समय इसी तरह बने रहने की संभावना है।  
कारोबारियों का कहना है कि कमजोर मांग की वजह से कालीमिर्च का स्टॉक बढ़ गया है एवं उत्तर भारत में गर्मी की वजह से इसकी मांग सुस्त है। कालीमिर्च के अनेक उत्पादक इलाकों में फ्लावरिंग आ गई है लेकिन बारिश के अभाव में इसके विकास पर असर पड़ेगा। कालीमिर्च के पौधों को बारिश की जरुरत है। यदि फसल प्रभावित होती है तो किसान अपनी फसल बेचने से बचेंगे। इस साल यदि बारिश कमजोर रहती है तो कालीमिर्च का उत्पादन घटकर 47 हजार टन आ सकता है जो पूर्व वर्ष में 55 हजार टन था। किशोर स्पाइसेस के किशोर शामजी का कहना है कि यह उत्पादन अगले साल और गिर सकता है। हालांकि, उत्पादन के बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। काली मिर्च उत्पादक इलाकों में मानसून कैसा रहता है, इस पर सब कुछ निर्भर है।  
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कालीमिर्च के दाम काफी नीचे है जिसकी वजह से श्रीलंका ने भारतीय बाजार में कालीमिर्च जमकर भेजी है। विएतनाम की कालीमिर्च भी श्रीलंका के रास्ते भारत आ रही है। साथ ही नेपाल के रास्ते अवैध रूप से आ रही कालीमिर्च ने घरेलू बाजार को काफी नुकसान पहुंचाया है। आल इंडिया स्पाइसेस एक्सपोर्टर्स फोरम के चेयरमैन राजीव पालीचा का कहना है कि वियतनाम आफ्टा ग्रेड और भारतीय कालीमिर्च के बिक्री भाव में बड़ा अंतर है। भारतीय कालीमिर्च का दाम 6100 डॉलर प्रति टन हैं जबकि वियतनाम और इंडोनेशिया की कालीमिर्च 2500 डॉलर प्रति टन पर बिक रही है। ब्राजील की कालीमिर्च 2300 डॉलर प्रति टन पर ऑफर हो रही है। हालांकि, घरेलू बाजार की मांग को पूरा करने के लिए हमारे पास पर्याप्त उपलब्धता है। पालीचा का कहना है कि भारतीय कालीमिर्च को प्रतिस्पर्धी बनने के लिए हमें उत्पादकता बढ़ानी होगी एवं खेती की नई तकनीकों को अपनाना होगा। 
कारोबारियों का कहना है कि कालीमिर्च भारत को छोड़कर अन्य देशों में जबरदस्त उत्पादन होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव टूटे है। समूची दुनिया में कालीमिर्च का उत्पादन छह लाख टन होने की उम्मीद है जो पूर्व वर्ष से 8.25% ज्यादा होगा। अन्य देशों में कालीमिर्च के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति एवं मांग के आधार पर रहते हैं जबकि भारत में मजबूत घरेलू मांग के आधार पर भाव तय होते हैं।

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