क्यों घट रहा है भारत का कॉटन आयात एवं निर्यात

क्यों घट रहा है भारत का कॉटन आयात एवं निर्यात
कॉटन के अंतरराष्ट्रीय भाव वर्तमान में घरेलू दाम की तुलना में नीचे चल रहे है जिसकी वजह से देश का कॉटन निर्यात 30 सितंबर 2019 को समाप्त होने वाले सीजन में घटकर 40-50 लाख गांठ रह सकता है। इसी तरह, आयात भी कम रहने की संभावना है। 
भारत आमतौर पर 60-70 लाख गांठ कॉटन का सालाना निर्यात करता है लेकिन वर्तमान में इसका आयात किया जा रहा है। भारत ने तकरीबन 25 लाख गांठ कॉटन आयात करने के सौदे किए हैं जिसमें से 20 लाख गांठ कॉटन भारत आ चुका है जबकि शेष कॉटन सितंबर तक आने की उम्मीद है। देश में इस साल कॉटन की पैदावार कमजोर रहने की खबर से भाव मजबूत रहे लेकिन दूसरी ओर कॉटन यार्न की कमजोर मांग से इसके वैश्विक दाम नीचे आए। इसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देगा एवं आने वाले महीनों में भारत में कॉटन के दाम नीचे आ सकते है।  
खानदेश कॉटन जिनर्स ऑनर्स एसोसिएशन के प्रेसीडेंट प्रदीप जैन का कहना है कि घरेलू बाजार में कॉटन के दाम 44 हजार रुपए प्रति कैंडी बोले जा रहे हैं जो दस दिन पहले 47 हजार रुपए थे। अंतरराष्ट्रीय भाव 42 हजार रुपए प्रति कैंडी चल रहे हैं। जैन के मुताबिक देश में तकरीबन 22 लाख गांठ कॉटन आ चुकी है एवं अन्य दस लाख गांठ कॉटन इस सीजन के अंत तक आने की संभावना है। जबकि, सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (सीमा) ने इससे पहले इस सीजन में कॉटन आयात का अनुमान 22 लाख गांठ लगाया था। एसोसिएशन का कहना है सीजन के अंत तक वास्तविक आयात 28 से 30 लाख गांठ के बीच रह सकता है। जबकि, कॉटन एडवाइजरी बोर्ड (सीएबी) ने 22 लाख गांठ कॉटन आयात होने का अनुमान जारी किया है। 
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने मार्केटिंग वर्ष 2018-19 में कॉटन की कुल सप्लाई 376 लाख गांठ आंकी है जिसमें अगले कॉटन सीजन में ओपनिंग बैलेंस 31 लाख गांठ एवं कॉटन का आयात 31 लाख गांठ आंका है जो पिछले साल के आयात 16 लाख गांठ से 15 लाख गांठ अधिक है। पूरे सीजन में कॉटन की घरेलू खपत 315 लाख गांठ रहने का अनुमान है जबकि कुल निर्यात 46 लाख गांठ आंका है जो पूर्व वर्ष के निर्यात 69 लाख गांठ से 23 लाख गांठ कम है। सीजन के अंत में कैरी ओवर स्टॉक 15 लाख गांठ रहने का अनुमान है। 
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कॉटन 83-85 सेंटस प्रति पाउंड ऑफर की जा रही है जबकि यह अप्रैल-मई में 88 सेंटस प्रति पाउंड थी। जबकि, अमेरिकी एवं पश्चिमी अफ्रीकन देशों की कॉटन 80-82 सेंटस प्रति पाउंड बोली जा रही है। कारोबारियों का कहना है कि यदि देश में इस साल मानसून कमजोर रहता है और आने वाले दिनों में इसकी प्रगति कमजोर पड़ती है तो कॉटन का आयात गति पकड़ सकता है। अब सब कुछ बारिश पर निर्भर है।

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