जीरे में सुस्त घरेलू मांग के साथ चीन की लेवाली भी कमजोर

हमारे प्रतिनिधि
मुंबई। जीरे को इन दिनों न तो घरेलू मांग का सहारा है और न ही सबसे बड़े आयातक देश चीन का। इसके अलावा अब छोटे स्टाकिस्टों की बिकवाली आने की संभावना से जीरे के दामों पर आने वाले दिनों में दबाव देखने को मिल सकता है। विश्लेाषकों के अनुसार जीरा वायदा निकट भविष्यों में 16700-16500 रुपए प्रति क्विंटल तक जा सकता है।  
निर्यातकों के मुताबिक जीरे में चीन की लंबे समय से कोई बड़ी मांग नहीं है, केवल सामान्य तौर पर दो से तीन कंटेनर का कारोबार हो रहा है। चीन की मुद्रा यूआन 7.7% तक डिवैल्यूंएशन हुई है जबकि भारतीय रुपया भी फिर से 70.96 रुपए तक आया है। इससे मुद्रा का जो असर होना था, वह लगभग नहीं होगा। लेकिन, चीन की जीरे में मांग काफी सुस्त है। पहले चीन में जीरा तस्करी के माध्यम से पहुंचता था, वह अब पूरी तरह रुक गया है। विएतनाम रूट को बंद करने के बाद अब गैर कानूनी ढंग से जीरा वहां नहीं जा रहा है। पहले वहां के खरीददार एक साथ में 15-20 कंटेनर जीरा खरीद लेता था, वह अब देखने में नहीं आ रहा है। अब यह खरीद छिटपुट दिखाई देती है। केवल जरूरत जितनी भर चीन जीरा खरीद रहा है।  बता दें कि आमतौर पर चीन की जीरे में मांग मार्च मध्यम में आती है और अप्रैल तक यह पूरे शबाब पर रहती है लेकिन इस साल चीन की खरीद इतनी धीमी रही कि निर्यात कारोबार कमजोर रहा। भारत से होने वाले जीरे के कुल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 30-40% रहती है। 

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