मानसूनी बारिश की स्थिति पहले से बेहतर

खरीफ फसलों की बोआई रफ्तार में इजाफा
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । दक्षिण-पश्चिम मानसून में काफी हद तक बारिश की कमी की भरपाई हो गई है और देश भर में खरीफ फसलो ंकी बोआई की रफ्तार बढ गई है।वहीं भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कुल मिलाकर मानसून के सामान्य रहने का अनुमान व्यक्त किया है।हालांकि देश भर में आठ अगस्त तक बारिश सामान्य स्तर पर पांच प्रतिशत कम थी।बहरहाल आगे मानसून की बारिश अच्छी रहने की उम्मीद है।जिससे स्वभाविक है कि खरीफ फसलों की बोआई बेहतर होगी।
दरअसल केद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेद्र सिंह तोमर ने 8 अगस्त 2019 कद्रो कहा कि इस बार मानसून आने में थोड़ी देरी हुई और कुछ चिंता पैदा हुई।बहरहाल अब बारिश की स्थिति में सुधार हुआ है।ऐसे में बारिश की कमी की काफी भरपाई हो गई है।उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि कुल मिलाकर बरसात की स्थिति बेहतर हो जाएगी और खरीफ फसलों की बोआई रकबे में कमी को पूरा कर लिया जाएगा।जिसके तहत अब खरीफ फसलों की बोआई का कार्य अच्छी तरह से प्रगति की ओर अग्रसर है।उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे चुनेंदा राजयों में बाढ की स्थिति को लेकर कहा कि केद्र सरकार की स्थिति पर बारीकी से नजर टिकाई हुई है।जिसके तहत धान और दलहन जैसी खरीफ फसलों की बोआई जून में मानसून के आरंभ के साथ होती है और कटाई का कार्य अक्टूबर में होता है।वहीं केद्रीय कृषि मंत्रालय के ताजा खरीफ फसल बोआई के आंकड़ों के तहत खरीफ फसल मौसम में सभी खरीफ फसलों की बोआई का कुल रकबा साल भर पहले के 918.70 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम यानि 869.55 लाख हेक्टेयर ही है।हालांकि मौसम अनूकूल है जिससे खरीफ फसलों की उत्पादकता में इजाफा होगा।वहीं केद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने कहा कि समग्र बोआई रकबे में जो कमी थी वह पिछले सपाह की तुलना में काफी बेहतर हुई है।अब कमी की काफी हद तक भरपाई हो गई है।उन्होंने कहा कि धान की बोआई का रकबा अभी भी कम है और आने वाले सप्ताहों में स्थिति बेहतर होगी क्योंकि बोआई सितम्बर के पहले सप्ताह तक चलेगी।वहीं केद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के तहत चालू खरीफ फसल मौसम 2019-20 (जुलाई-जून) में अब तक धान की बोआई का रकबा 265.20 लाख हेक्टेयर है जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में 304.18 लाख हेक्टेयर था।

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