मंदी की पकड़ से निकलने के लिए संघर्षरत रुई बाजार

मुंबई। 2019 का वर्ष रुई बाजार एवं कपड़ा उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। व्यापार युद्ध के चलते, रुई-कपड़े और गार्म़ेंट्स की मांग में काफी कमी आई है जिससे उद्योग और देश की अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ रहा है। निर्यात में भारी गिरावट एक कमजोर अर्थव्यवस्था का स्पष्ट संकेत है। सरकार और कपड़ा उद्योग के लिए यह एक चेतावनी है। `काटन गुरु' को लगता है कि इसे अनदेखा करने से अपूर्णीय क्षति हो सकती है।
व्यापार युद्ध से ग्रस्त कपड़ा उद्योग को मौसम का भी प्रकोप झेलना पड़ रहा है। आधे से ज्यादा भारत में बाढ़ जैसे स्थिति है। तो कुछ इलाकों में बारिश की बहुत कमी रह गई है। बारिश की अनियमितता से फसल पर विपरीत असर पड़ा है। जिसका सीधा वास्ता ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है। ग्रामीण संकट से उपभोक्ता मांग में गिरावट आती है जो देश और उद्योग की अर्थव्यवस्था को बिगाड़ती है। सरकार कोशिश कर रही है पर विशेष ध्यान और ठोस कदम की कमी साफ नजर आ रही है। उद्योग तो जैसे उदासीन हो गया है। हमें कहीं भी इस संकट से निकलने हेतु रोडमैप बनते नहीं दिख रहा है। विविध उद्योग नेता-राजनेता और वित्तमंत्री से मिल रहे है पर उनको सिर्फ मौखिक सांत्वना ही प्राप्त हो रही है जिनसे वे संतुष्ट लग रहे हø। महत्वपूर्ण एवं विकट परिस्थितियां तत्काल कार्रवाई की मांग करती है।
घरेलू रुई बाजार में मार्केट टोन नरम है। मांग की कमी और पेमेन्ट में देरी की वजह से सेलर परेशान है। मिलों एवं निकासकारों की छिटपुट मांग है। मिलें अपना उत्पादन कम करने में लगी हुई है। उत्पादन कम तो नुकसान कम यह सिर्फ `शार्ट-टर्म' उपाय है। इससे उपर उठके कपास का उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के लिए कुछ ठोस करना आवश्यक है।
6-8-19 तक देश में कपास का आवक 300 लाख गांठ की हो गई है। जो इसी समय गत वर्ष को 357 लाख गांठ थी। जस्ट एसी नाम की निजी एजेंसी के इस रिपोर्ट से रुई की फसल की कमी दिख रही है। सीएआई ने 312 लाख गांठ की फसल का अंदाज 2018-19 सीजन के लिए दिया है।
जुलाई महीने में बारिश अच्छी होने के कारण कपास की बोआई में बढ़ोत्तरी हुई है। `काटन गुरु' ने कुछ समय पहले लिखा था कि इस वर्ष बोआई गत वर्ष से थोड़ी ज्यादा हो सकती है। क्योंकि किसानों के पास दूसरा पर्याय कम था। आशा करते है कि इस वर्ष उत्पादन बढ़े ताकि हमें अच्छी फसल मिले।
फिलहाल तो इस पर भी `काटन गुरु' को संदेह है। एक तरफ अनियमित बारिश है तो अंतरराष्ट्रीय रुई बाजार नरम होने के बाद 2-3 दिनों में स्थिर है। अमेरिकी आईसीई वायदे में दिसंबर 59.58 और मार्च 2020 वायदा 60.42 के भाव से 8-8-2019 को बंद हुए थे। चीन का वायदा बहुत नरम चल रहा है और उसकी अर्थव्यवस्था भी मंद पड़ गई है। अमेरिका की संस्था आईसीएसी का रिपोर्ट बताता है कि 2019-20 के अंत में चीन का स्टाक कम होगा पर विश्व रुई का स्टाक बढ़ेगा। चीन-अमेरिका के व्यापार युद्ध का यह सीधा असर है।

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