ग्वार के भाव का भाग्य तय करेगी निर्यात मांग

ग्वार के भाव का भाग्य तय करेगी निर्यात मांग
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई। ग्वार उत्पादक जिलों में हाल की अच्छी बारिश से राजस्थान में ग्वार की बोआई में बढ़ोत्तरी हुई है। अगस्त के पहले सप्ताह में ग्वार का रकबा 55.8% बढ़कर 22.6 लाख हैक्टेयर पहुंच गया है। जबकि जून के अंत में यह रकबा 14.5 लाख हैक्टेयर था।
ग्वार के इस अचानक बढ़े रकबे का इसकी कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। ग्वार सीड वायदा अगस्त में 2.5% टूटकर वर्तमान में 4200 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास कारोबार कर रहा है। दूसरी ओर अप्रैल-जून 2019 की तिमाही में ग्वार गम का निर्यात फिसला है। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ग्वार गम का निर्यात पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 5.6% फिसलकर 1.27 लाख टन रहा। पिछले पांच साल लगातार ग्वार का उत्पादन घटने से किसानों और स्टाकिस्टों के पास घटे स्टाक एवं ग्वार गम निर्यात में बढ़ोत्तरी की वजह से यह सीजन की शुरुआत में 4300 रुपए प्रति क्विंटल के ऊपर कंसोलिडेटेड हो रहा था। वर्ष 2019 में जनवरी-फरवरी में ग्वार सीड की आवक पर्याप्त रही जिससे वायदा में इसके दाम टूटे। हालांकि, यह भाव मार्च में फरवरी के निचले स्तर से 10% सुधरे एवं ग्वार गम की अच्छी निर्यात मांग ने भावों को सपोर्ट दिया। इसके अलावा अल नीनो आने की रिपोर्ट से भी ग्वार सीड की कीमतों को सहारा मिला। अक्टूबर 2018 में क्रूड 45 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल बिक रहा था जो अप्रैल में 72 डालर पहुंच गया, जबकि वर्तमान में यह 60 डालर के नीचे आ गया है। क्रूड की कीमतों में हुई उथल-पुथल का सीधा असर ग्वार पर पड़ता है। 
किसानों को ग्वार के दाम आकर्षक न मिलने से हाल के वर्ष़ों में राजस्थान में ग्वार का रकबा घटा है। जबकि, दलहन, तिलहन और काटन में किसानों को ग्वार की तुलना में अच्छे भाव मिले हø। वर्ष 2019-20 में राजस्थान में ग्वार का रकबा 30-32 लाख हैक्टेयर रहने का अनुमान है जो वर्ष 2013-14 में 50 लाख हैक्टेयर था। इस तरह पिछले छह साल में ग्वार का रकबा 40% घटा है। 
दलहन एवं तिलहन में अच्छा रिटर्न मिलने से राजस्थान में किसानों ने ग्वार के एरिया में कमी की है जिससे इसके उत्पादन में कमी आई है। राजस्थान सरकार के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक वर्ष 2018-19 में ग्वार का उत्पादन राज्य में 17% घटकर 10.3 लाख टन रहने का अनुमान है। यह उत्पादन वर्ष 2017-18 में 12.4 लाख टन था। हालांकि राज्य सरकार ने वर्ष 2019-20 (जुलाई-जून) में ग्वार का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 45.5% बढ़कर 15 लाख टन पहुंचने का अनुमान जताया है। ग्वार का उत्पादन बढ़ने की वजह यील्ड (उत्पादकता) में खासा इजाफा होने के आसार हø। पिछले साल जहां प्रति हैक्टेयर यील्ड 334 किलोग्राम थी, वह इस साल 500 किलोग्राम रहने की उम्मीद है।  
एजेंल ब्रोकिंग के फंडामेंटल विश्लेषक रितेश कुमार साहू का कहना है कि चालू कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही में ग्वार सीड के भाव पिछले साल की समान अवधि की तुलना में ऊंचे रहे जिसकी वजह कम उत्पादन और ग्वार गम का स्थिर निर्यात होना रहा। लेकिन अच्छी मानसून, क्रूड के दाम नीचे होने एवं ग्वार गम के निर्यात में गिरावट से आने वाले सप्ताहों में ग्वार सीड के दामों पर दबाव रहेगा। ऊंचे भावों की वजह से हाल के महीनों में ग्वार गम का निर्यात सुस्त पड़ा है। वर्तमान में ग्वार को 4100 रुपए पर मजबूत सपोर्ट है एवं निर्यात मांग में सुधार से ही इसकी कीमतों में इजाफा हो सकता है। जबकि, लंबी अवधि में राजस्थान, हरियाणा एवं गुजरात में ग्वार का कुल रकबा कम रहने से इसके भावों को सपोर्ट भी मिल सकता है।

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