आरबीआई द्वारा रेपो रेट में 0.35% की कटौती

आरबीआई द्वारा रेपो रेट में 0.35% की कटौती
होम लोन,वाहन व निजी लोन सस्ते होने के आसार
हमारे संवाददाता
देश के सेन्ट्रल बक यानि रिजर्व बक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की तरफ से आम आदमी और कंपनियों को बड़ा तोहफा देते हुए रेपो रेट में 0.35 प्रतिशत घटाकर 5.40 प्रतिशत रह गई है।यह लगातार चौथा मौका है जब ब्याज दर घटाई गई है।हालांकि पिछले तीन दशकों में भी एमपीसी रेटा रेट में चौथाई-चौथाई की कटौती कर चुकी है।आरबीआई ने वित्त वर्ष 2018-19 को लेकर जीडीपी ग्रोथ लक्ष्य भी घटाया है।
दरअसल ब्याज दरें यानि रेपो रेट घटाने का मतलब है कि अब बøक जब भी आरबीआई से फंड (पैसे) लेंगे उन्हें नहीं दर पर फंड मिलेगा।ऐसे में सस्ती दर पर बैंकों को मिलने वाले फंड का फायदा बøक अपने उपभोक्ता को भी देंगे।यह राहत आपके साथ सस्ते कर्ज और कम हुई ईएमआई के तौर पर बांटी जाती है।जिसके तहत जब भी रेपो रेंट घटता है तो उपभोक्ता को लेकर कर्ज लेना सस्ता हो जाता है।इसके साथ ही जो कर्ज फ्लोटिंग है जिनकी ईएमआई भी घट जाती है।यद्यपि आरबीआई ने महंगाई में नरमी को देखते हुए पॉलिसी रेट्स में 0.35 प्रतिशत की कटौती की है।जिसके बाद रेपो रेट 5.40 प्रतिशत रह गई है।ऐसे में आम लोगों को लेकर बक से कर्ज लेना सस्ता होने और ईएमआई घटने की उम्मीद बढ गई है।वहीं एमपीसी के छह सदस्यों में से चार एमपीसी सदस्य 0.35 प्रतिशत कटौती के पक्षधर थे।वहीं दो सदस्य 0.25 प्रतिशत की कटौती चाहते थे।ऐz में एमपीसी की पॉलिसी पर उदार रुख बरकरार रखा है।एमपीसी ने ब्याज दरों पर नरम रुख कायम रखा है।वहीं आरबीआई ने 2019-20 की पहली तिमाही में ग्रोथ का अनुमान 7.4 प्रतिशत दिया है।आरबीआई ने 2019-20 को लेकर जीडीपी ग्रोथ का लक्ष्य 7 प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत किया है।जिसको लेकर आरबीआई की तरफ से कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 की प्रथम छमाही में 5.8-6.6 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान है।वहीं दूसरी तिमाही में 7.3-7.5 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान है।हालांकि रिटेल महंगाई अनुमान 3.6 प्रतिशत रखा है।अक्टूबर से मार्च तिमाही में रिटेल महंगाई 3.5-3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।वहीं इसी अवधि में खुदरा महंगाई 3.6 प्रतिशत रह सकती है।जबकि अक्टूबर-मार्च में खुदरा महंगाई 3.5-3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।यद्यपि रेपो रेट कम होने से जिन ग्राहकों के लोन एमसीएलआर से संबंधित है जिनकी ईएमआई का बोझ कम होगा।जिसको लेकर जरुरी है कि बक एसीएलआर में कटौती करे।हालांकि फायदा तभी से शुरु होगा जब लोन की रीसेट डेट आएगी।वैसे तो अमूमन बैंक छह महीने या एक वर्ष के रीसेट के साथ होम लोन की पेशकश करते हø।ऐसे में रीसेट डेट आने पर भविष्य की ईएमआई उस समय की ब्याज दरों पर निर्भर करेगी।वहीं जिन ग्राहकों के लोन अब भी बेस रेट या बेंचमार्क प्राइम लेडिंग रेट (बीपीएलआर) आधारित व्यवस्था में स्विच करने पर विचार करना चाहिए।जिसके तहत नई व्यवस्था में पारदर्शिता अिघिक है।जिनमें पॉलिसी रेट में कटौती का असर तुरन्त दिखता है।हालांकि नए ग्राहक नए होम लोन ग्राहक एमसीएलआर व्यवस्था में लोन ले सकते है।जिनके पास एक्सटर्नल बेंचमार्क व्यवस्था का मूल्यांकन करने का भी विकल्प है। जिसको लेकर उनकों थोड़ा इंतजार करना होगा।ऐसे में इस तरह की व्यवस्था पर दिशानिर्देश आने बाकी हø।

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