ई-कॉमर्स ट्रेड में भारत 2034 तक अमेरिका को छोड़ देगा पीछे

ई-कॉमर्स ट्रेड में भारत 2034 तक अमेरिका को छोड़ देगा पीछे
दुनिया का सबसे बड़ा ई-कॉमर्स बाजार बन जाएगा भारत
हमारे संवाददाता
भारत में ई-कॉमर्स मार्केट तेजी से बढ रहा है।ऐसे में एक कंपनी की मानें तो भारत 2034 तक ई-कॉमर्स सेक्टर में अमेरिका को पीछे छोड़ देगा और दुनिया का सबसे बड़ा ई-कॉमर्स बाजार बन जाएगा।
विश्व की सबसे बड़ी पैकेज डिलीवरी एवं सप्लाई चेन मैनेजमेंट कंपनी यूनाइटेड पार्सल सर्विस (यूपीएस) के प्रबंधक निदेशक (भारतीय उपमहाद्वीप) राशिद फागार्टी ने कहा कि भारत का ई-कॉमर्स बाजार बड़ी छलांग लगाने को लेकर तैयार है।वहीं वर्ल्डपे की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2034 तक अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया में ई-कॉमर्स का सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा।जिसको लेकर यूपीएस ने पल्स ऑफ द ऑनलाइन शॉपर्स के नाम से एक सर्वेक्षण कराई है।जिसमें यह सामने आई है कि भारत आने वाले समय में दुनिया का सबसे बड़ा इ-कॉमर्स बाजार होगा।ऐसे में इस अध्ययन द्वारा प्रमाणित है कि भारत में ग्राहक सर्विस की क्वालिटी को लेकर बेहद जागरुक है।ऐसे में ऑनलाइन रिटेलर्स को कंज्यूमर ट्रेंड के तहत अपनी सप्लाई चेन को दुरुस्त करने की आवश्यकता है।यह सर्विस फूल रिटर्न पॉलिसी के साथ ग्राहकों को संतुष्टि से ही संभव है।उन्होंने कहा कि भारत में होने वाली दो तिहाई अंतरराष्ट्रीय खरीद सिर्फ क्वालिटी के कारण होती है।उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शॉपर्स में पारदर्शिता,डिलीवरी प्रक्रिया पर नियंत्रण,आसान रिटर्न और लॉयल्टी प्वाइúट्स चाहते है।सबसे विशेष बात यह है कि भारत में 96 प्रतिशत ऑनलाइन शॉपर्स मार्केटप्लेस का उपयोग कर चुके है और 56 प्रतिशत खरीदारी करने के बाद डिलीवरी की स्थिति ट्रेक करते है ।यही नहीं पिछले तीन माह में 36 प्रतिशत ने सामान वापस किया है और भारतीय शॉपर्स की रिटर्न की दर 68 प्रतिशत है जो कि विश्व बाजार में सबसे अधिक है।उन्होंने कहा कि अपने वैश्विक साथियों की तुलना में 53 प्रतिशत भारतीय शॉपर्स ने रिटेल के बारे में शिकायत दर्ज कराने में अध्ययन का नेतृत्व किया और 30 प्रतिशत ने सोशल मीडिया पर नकारात्मक रिव्यू दिए।वहीं एशिया पैसिफिक में यह संख्या 25 प्रतिशत और अमेंरिका में 22 प्रतिशत रही।उन्होंने कहा कि एक रोचक तथ्य यह भी है कि 90 प्रतिशत भारतीय ग्राहक सामान ऑनलाइन खरीदने से पहले उसके बारे में शोध करते हø।वहीं युवा पीढी अन्य ग्राहकों के रिव्यू से प्रभावित होती है ।जबकि 90 प्रतिशत खरीदार खरीद करने से पहले समस्त शिपिंग शुल्क एवं टैक्स की गणना देखना चाहते है।

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