किराना जिंसें में भारी ऊंचा भाव, त्योहारी ग्राहकी से नारियल

किराना जिंसें में भारी ऊंचा भाव, त्योहारी ग्राहकी से नारियल
गोले में ग्राहकी के साथ भाव में तेजी
हमारे संवाददाता 
इंदौर। स्थानीय सियागंज थोक किराना मंडी में ग्राहकी  सामान्य चल रही है। नारियल जो कि 1400-1500 रु. भाव तक नीचे में गया था पिछले तीन माहों में धीरे-धीरे बढ़ता हुआ भाव 250 भरती का 1850 रु. तक होना बताया गया है। हालांकि खोपरा गोला का और बुरा का भाव ऊपरी भाव स्थिर होना बताया जा रहा था। अच्छा गोला 195 रु. और खोपरा बुरा 2700 से 3100 रु. लुज बोरे में विभिन्न कंपनियों का भाव था जबकि व्हील बांड एक लो पैकिंग का भाव 3400 रु. तक होना बताया जा रहा था। साबुदाना  गत् वर्ष से ऊंचे भाव थोक में 4400-5600 रु. किलो तक  था। साबुदाना में ताजा मांग नहीं निकलने यह स्थिर में बताया जा रहा था। सरकार द्वारा दी गई शक्कर मिलों को राहत से  शक्कर भाव जो गत् छह माह पूर्व थोक में 3400 रु. तक आ गये थे के भाव उछलकर 3300 से 3400 रु. तक  थोक में बढ़ गये थे । व्यापार जगत के विश्लेषकों के अनुसार  शक्कर बनने पर बाय प्रोडक्ट के रूप में निकलता है मालेसेस जो कि कामधेनू प्रोडक्ट है वह प्रोडक्ट शराब कंपनियों को भारी भाव उपज कराता है। स्थानीय मंडी में शक्कर की आवक लगभग 10-12 गाड़ियों की रही। आंध्र प्रदेश, इरोड  की मंडियों में हल्दी में हल्दी का पिछला स्टॉक रहा होने से भाव अभी स्थिर ही बताए जा रहे है। इस वर्ष हल्दी उत्पादक प्रश्नों में हालांकि वर्षा का अभी तक सामान्य होना भी तेजी नहीं होने का कारण बताया जा रहा है। आगे संभावना मंदी की बताई जा रही है। गत् हप्ते हल्दी हाजिर में निजामाबाद  कांडी हल्दी 10,200 से 10,500 रु. और लाल गाय का 133-135 रु. तक स्थिर भाव बताए गये है। खेरची में उपभोक्ताओं को पीसी हल्दी 170-200 और अच्छी वाला करा भाव 230 रु. किलो तक होना बताया जा रहा है  जबकि 501 ब्रांड का भाव 1775 रु. तक होना बताया जा रहा था। जीरे में गत् वर्ष अधिक उत्पादन के बावजूद भारी भाव बढ़ गये थे। निर्यात मांग फिलहाल नहीं बताई जा रही है। स्टाकिस्टो की मांग भी गत् हप्ते कमजोर रहने से गत् हप्ते जीरे में स्थिरता होना बताई गई है। खेरची में जीरे की मांग में भारी कमी आई है बताया जा रहा है । जीरा राजस्थान तरफ का 195 रु. और ऊंझा मध्यम का भाव 212 रु. किलो तक होना बताया गया। मांग नहीं होने और भारी स्टॉक के रहने के बावजूद से कालीमिर्च पर में पर अधिक सट्टे में रही होने से भाव तेज रहे। इसका कारण उत्पादक देशों में कालीमिर्च का अधिक उत्पादन और भारत में आ रही तस्करी से सस्ती कालीमिर्च पर भारी कमाई का बाजतार बना रखा बताया जता रहा है। हाजिर भाव कालीमिर्च गारवल 350 से 355 रु. और मटरदाना का भाव 405 रु. तक बताया जा रहा था  जो कि अभी भी भारी ऊंचे भाव पर थी। इस वर्ष साबुदाना पर उत्पादन कम की हवा और उत्पादक देशों में तेजी के असर से भारी तेज 6200 रु. से बढ़ते हुए 6700 रु. तक और मीडियम में लूज का भाव 7000 रु. तक था। हालांकि  साबुदाना में थोक और खेरची दोनो तरफ मांग रहने से भाव ऊंचे में ही स्थिर होना बताए गये है। बांड साबुदाना पैकिंग में वरलक्ष्मी बांड का भाव 8500 रु. और सच्चा मोती का भाव 8200 रु. तक होना बताया गया है। जनता के हवाले से  केंद्रीय सरकार जब तक देश की जनता के हित में खाद्य सामग्रियों पर कोई प्रभावशाली दीर्घकालीन निश्चित भाव  की नीति नहीं अपनाती है जब तक राज्य या प्रशासन भी सुस्त या व्यापार करते रहेंगे और स्थिति पुन: अधिक तेज की बन सकती है। पैकिंग के उत्पादों पर खुले उत्पादों के मुकाबले क्या भाव होना चाहिये इस पर सरकार की कोई कड़ाई नीति नहीं होने से पैकिंग का व्यापार जगत प्रत्येक वस्तु में भारी मुनाफा कमा रहे है। छोटे व्यापारियों के हवाले से इसमें नकली और असली माल के पैकिगं पर भारी मुनाफा है । देश में ब्रांड पैकिंग पर कई नकली कार्य भारी रूप से होते है जिन्हे पहचान पाना आम जनता के बस की बात नहीं है । ऊंची महंगाई और नकली उत्पादें पर देश में पौष्टिकता कहां रह गई है। नकली उत्पादन से देश पटा पड़ा है और असली माल पर व्यापारी ऊंचे भाव पर हाथ धो रहे है।

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