सूती धागे और पीसी में भाव बढ़ने से वीवर्स उत्साहित

बरसात, बाढ़ और बरबादी में लगभग आधा हिन्दुस्तान है। इसमें महाराष्ट्र के कोल्हापुर, सांगली और कराड के हालात अब ठीक ठाक हो रहे है। इसके साथ ही नाशिक व त्र्यंबकेश्वर भी इसी श्रेणी में थे. महाराष्ट्र के मराठवाडा में अभी भी बरसात की कमी है। बकरी ईद की छुट्टियां मालेगांव में शनिवार से शुक्रवार एक सप्ताह तक रही। बन्द बाजार में सूती धागे और पीसी में बढ़े भावों की चर्चा में कपड़ा में विवर बढ़ाकर बेचना चाहता है। अब मार्केट खुलने के बाद ही सही स्थिति का पता चलेगा। मालेगांव के युवा व्यवसायी राजकुमार मुंधरा केशर टेक्सटाइल ने बताया कि कपड़ा बाजार में फिलहाल कोई तेजी की उम्मीद नहीं लगती। बाजार ज्यादा घटने तथा सूती धागे के बढ़ते भावों में साधारण कामकाज हो सकता, लम्बा व्यापार की उम्मीद नहीं है । जिसमें ज्यादा घटा उसमें हलका सुधार हो सकता है। मालेगांव में पावरलूम सेक्टर में ईद की ही दो छुट्टियां आती है।
पोपलीन और कैम्ब्रिक :- पोपलीन और कैम्ब्रिक का बाजार एक सप्ताह पहले जैसा ही है। ज्यादातर दलाल-व्यापारी-विवर छुट्टी के मूड में है। दलाल भी कहते है तेजी तो नही लगती। जिसमें ज्यादा घटा, उसमें सुधार हो सकता है। अभी मार्केट सुधरने को महीना भर लग सकता है। कितना नीचे आ सकता है, यह कोई नहीं जानता। बाकी बाजार काफी ज्यादा घट चुके है। कैम्ब्रिक की 56x52 सबसे ज्यादा घटी है, उसमें सुधार की गुंजाइश लगती है।
रोटो और पीसी :- रोटो के यार्न और कपड़े में फिलहाल कोई उठा पठक नहीं है। पीसी में यार्न की तेजी का असर कपड़े पर खुलते बाजारों में ही समझ आयेगा। अब कपड़ा बाजार देखो और इन्तजार करो से ज्यादा अब कम में क्या मिलता है, इस पर नजर है। दलाल विजय मर्दा ने बताया कि विवर व व्यापारी दुविधा में फंसे हुए है। पिछली कई बार बाजार सुधरा, फिर कम हो गया। व्यापार स्थिरता व निश्चितता का नितान्त अभाव है।
किशनगढ़ मंडी में भी मंदी की मार : किशनगढ़ (अजमेर) पावरलूम और मार्बल ग्रेनाईट की मंडी है। यहांपर कोर्स काउन्ट पर साहेब ओटो लूम पर ग्रे कपड़ा बनता है। लगभग 5000 सादे और 400 से 500 सूल्जर तथा चाइना के रेपियर है। सादा लूम पर कपड़ा बनाने वाले जुगल छापरवाल (सत्यनारायण टेक्स.) ने बताया कि 44x44-16x24 में 89 इंची कपड़ा ऊपर में 36 से 38 रुपया मीटर + जीएसटी का भाव है, उपर में यही कपड़ा 44-43 यानी 71 रुपया मीटर घटा है। सूत दलाल केलाराजी सारडा ने बतायाक़ि कोर्स काउन्ट में 12 से 14 रुपया किलो भाव कम हो गये है। व्यापार कम है और नाणा तंगाई ज्यादा है।
किशनगढ़ कभी मार्बल की बड़ी मंडी हुआ करता था। अब ग्रेनाइट की हो गई है। आदमी बदलाव चाहता है, मार्बल के बाद उसे कुछ नया चाहिए। इसमें टर्की, चाइना, इरान, इटली में इम्पोर्ट माल का चलन बढ़ा है। कम्पीटीशन होने में भाव कम हुए है तथा मार्बल की कास्ट बढ़ रही है। गोविन्दम स्टोन्स के सर्वेश्वरजी राठी ने बताया कि 28 से 18 प्र.श. जीएसटी होने के बाद काफी सुधार आया है। किशनगढ़ के बड़े नाम वालों का भी मार्बल व्यवसाय आधे से कम हो गया है। इसमें 200 से लेकर 2000 रुपया तक की रेंज में इम्पोर्टेड माल आता है। मार्बल, ग्रेनाइट के माल कटींग, पालिस, ट्रांन्सपोर्ट का बड़ा कामकाज होता है। साधारण मजदूर भी 500/- रुपया रोज कमा लेता है।

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