ग्रे के भाव में कमी ग्राहकी चलने के आसार

हमारे संवाददाता
निश्चित रूप से पूर्व की वर्षा से खुशनुमा माहौल बना, तथापि पर्याप्त रिमझिम की दरकार अभी भी विद्यमान है। हर वर्ग का व्यक्ति आकाश में बादलों को देखकर चैन की सांस लेता है, परंतु इद्र देव की कृपा के अभाव में निराशा ही हाथ लगती है। निकटवर्ती लुणी नदी में जल क्रीडा की कल्पना अधर में ही लटक जाती है। गर्मी का अहसास नया न होने से लोग अभ्यस्त है।
देश के कमी भागों में बाढ़, वर्षा व अन्य कारणों से व्यावसायिक स्थिति शिथिल बनी हुई है। मंदी का स्वर प्रखर रूप में स्थानीय वत्र रंगाई-छपाई उद्योग में पसर रहा है। वैसे देश व्यापी स्थिति का अध्ययन करें तो ग्राहकी सोचनीय ही बनी हुई है। रकम की आवक का फ्लो कम होने से औद्योगिक उत्पादन पर भी भारी असर पड़ रहा है।
ग्रे क्लाथ के भावों में कमी ही नजर आ रही है। इतना होने पर भी उद्योग ग्रे क्लाथ के सौदे करने से कतरा रहे है। ग्राहकी इस माह से चलने की पूरी आशा होने के बावजूद भी संशय कायम है। उत्पादन केवल माल अपने श्रमिकों को बरकरार रखने के उद्देश्य से कम से कम लिया जा रहा है। माल की चालानी साठ प्रतिशत से घटकर चालीस प्रतिशत पर आ गई है। इसमें भी सामान्य उद्यमी का हिस्सा बहुत कम है, क्योंकि इन दिनों मुख्य रूप से ऑफर नामचीन ब्रान्डों के ही आ रहे है। ब्रान्ड धारक उद्यमी तो इस समय भी संतोष व्यक्त करते दिखाई दे रहे है।
उद्यमियों को प्रदूषण विभाग द्वारा बनाई चैकिंग टीमों से असहजता महसूस हो रही है। ये टीमे कारखानों के निस्तारित जल व प्रदूषण के संदर्भ में जानकारियां लेकर उन पर एक्शन ले रही है। एक्शन का तौर तरीका एक निर्धारित मानदंड के आधार पर केद्रित है। वास्तव में छोटे उद्यमियों के लिये सभी संसाधनों को लगाना व्यय साध्य काम हो गया है, इसलिये उनमें उत्साह की कमी परिलक्षित हो रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के निर्देशों के अनुसार वातावरण की शुद्धता, स्वच्छता को तरजीह देना आवश्यक है और इन्हीं नियमों के अनुसार प्रदूषण मंडी सख्ती से कार्य करने को उतारु है। उनके अनुसार विकास को प्राथमिकता से पहले प्रदूषण के कारणों पर अंकुश प्रथम है।
भारत सरकार द्वारा कश्मीर से धारा 370 व 35 ए को हटाने के समाचारों से यहां आम नागरिकों व उद्यमियों ने उत्साह व उल्लास के साथ स्वागत किया। ऐसा लग रहा है। मानो उनके मन की बरसों पुरानी मुराद पूरी हो गई हो। जय-घोष, मिष्ठान वितरण के अलावा अन्य प्रकार से लोगों ने अपनी खुशियों का इजहार किया। टीवी व अन्य माध्यमों से इस प्रकरण की क्रमिक चाल को दो दिनों तक पूरी तरह से लोग निहारते रहे।
इतना लिखने के बाद इद्रदेव ने शब्दों की भावना सुनकर अच्छी वर्षा को अंजाम दिया। क्षेत्र के संपूर्ण वातावरण में एक नई साधी सुगंध का आगमन हो गया। औद्योगिक क्षेत्र के कई कारखानों में नुकसान भी हुआ, किन्तु नुकसान से ज्यादा सुखानिभूति ने मन को शांति का एहसास कराया। नगर की निचली बस्तियों में पानी की बहुतायत ने कहर भी बरपाया। पुराना बस स्टेण्ड भी जल से परिपूर्णभरा रहा।
नगर की ट्राफिक व्यवस्था में सुधार हेतु ओवर ब्रिज निर्माण का कार्य प्रगति पर है। पर इससे फिलहाल निर्माण कार्य चलने से स्थान-स्थान पर अवरोधों से नागरिकों-उद्यमियों व अन्यों को नियत स्थान पर पहुंचने के लिये विकल्प रूप से लम्बे चक्कर काटने पड़ रहे है।
कारखानों के आगे वर्षारोपण करने का यह अच्छा समय समझ कर कई उद्यमियों ने इस कार्य को गति दी है। नागरिकों की निर्धारित सहमति से औद्योगिक क्षेत्र में सौन्दर्यकरण को स्थाई बल मिलेगा। उद्यमियों ने बताया कि तृतीय चरण खेड़ रोड़ की सड़क का 25 प्रतिशत हिस्सा सफाई के अभाव में रेत से सटा रहने उपयोग व सादर्यकरण में बाधक है, जिस पर संबंधित एजेन्सी को ध्यान देना चाहिए।
अप्रत्यक्ष रूप से इस वर्षा से उद्यमियों में यह विश्वास जगा है कि चंद दिनों के विलम्ब के बाद व्यापार निश्चित रूप से अच्छा चलेगा।

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