समृद्धि सर्जकों का विश्वास जीता जाएगा?

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की निर्णायक शक्ति के बारे में दो मत नहीं है। नोटबंदी से तीन तलाक बंदी और बालाकोट से संविधान की 370 और 35ए धारा तक देश और दुनिया को नरेद्र मोदी के निर्णय और अमित शाह के अमल का अनुभव हुआ है। राजनीतिक और रक्षा क्षेत्र में लिए गए निर्णय बेजोड़ है। नोटबंदी की तरह 370 धारा के निर्णय को भी अंतिम घड़ी तक `गुप्त' रखा गया, वह भी एक उपलब्धि है। अब अर्थव्यवस्था में इस समय मंदी की `हवा' है और बेकारी बढ़ने की शिकायत है, उस वास्तविकता को स्वीकार कर उन्होंने वित्त मंत्रालय के उच्चाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया है जिसका परिणाम शीघ्र आने की धारणा है। प्रधानमंत्री ने देशभर के लोगों का विश्वास जीत लिया है। अब विकास के लिए व्यापार-उद्योग और निवेशकों का विश्वास जीतना है। व्यापार-उद्योग ने तो प्रधानमंत्री में पूरा विश्वास व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री को भी व्यापार-उद्योग की देश भक्ति पर थोड़ी भी शंका नहीं है, लेकिन विकास के लिए जरूरी निवेश हो उसके लिए प्रोत्साहन-वचनों और अमल से- देने की जरूरत है- स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने वचन- से नई शुरुआत की है- अब उनके वचन के अमल में नौकरशाही कैसा और कितना सहयोग देती है उसे देखना है। हालांकि मोदी है तो मुमकिन है- अपेक्षित कराकर रहेगा। अरुण जेटली की बीमारी के कारण निर्मला सीतारामन को वित्त मंत्रालय दिया गया है उनकी काबिलियत और प्रमाणिकता के बारे में शंका नहीं है, लेकिन व्यापार-उद्योग को प्रोत्साहित करने की काबिलियत और मनोदशा में कुछ खामी प्रतीत होती है। अग्रणियों के साथ की पहली मुलाकात में यदि ऐसा कहा हो कि आप रोते क्यों हो? तो ऐसे प्रतिभाव का स्वागत नहीं होगा...
तीन दशक पहले नरसिंह राव ने वित्त मंत्री पद के लिए- गैर-राजनीतिज्ञ डा. मनमोहन सिंह को खोज लिया। इस समय नरेद्र मोदी ने विदेश मंत्री पद के लिए सेवामुक्त सचिव और विशेषज्ञ जयशंकर को पसंद कर लिया, लेकिन इसी प्रकार से वित्तमंत्री नहीं मिला। वित्तमंत्री में निजी क्षेत्र को खुश रखने की निपुणता होना जरूरी है। विश्व में चाहे जितनी मंदी हो- हमारे पास पूर्ण शक्ति है- मुश्किल समय में `भामा शा' जाग सकता है जिससे व्यापार-उद्योग का अपमान करने के स्थान पर हाथ मिलाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने उनको `समृद्धि सर्जक' कहा है- उचित `विशेषण' का उपयोग किया है। निवेश करने से व्यापार-उद्योग में रोजगार बढ़ता है, उत्पादन से `मांग' बढ़ने से सभी बाजारों की रौनक बढ़ती है और विकास के नए मार्ग खुलते हø।
पांच ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था के बारे में प्रधानमंत्री को आत्मविश्वास है और `समृद्धि सर्जकों' का विश्वास प्राप्त करने का भरोसा भी है इससे ही उन्होंने `वचन' के अमल के मार्ग के अवरोध दूर करने की प्रक्रिया शुरू की है।
पहले `सूट-बूट की सरकार' और क्रोनी कैपिटलिस्टों-भगोड़े उद्योगपतियों के मित्र होने का आरोप  प्रधानमंत्री पर लगा था। हकीकत में बजट में और कर भी `सुपर रिच' क्लास पर लगाया गया है और गरीब मध्यम वर्ग को राहत दी गई है अब मोदी सरकार के दूसरे शासन में सूट-बूट का आरोप लगाने वालों को जवाब दिया गया है : सम्पत्ति- समृद्धि सर्जक हमारे देश की सम्पत्ति है और हमें उनका सम्मान करना चाहिए...
नरेद्र मोदी ने दूसरी महत्वपूर्ण बात विकास की जिम्मेदारी में जनता की भागीदारी की है। विकास के फल-लाभ अंतिम सिरे के व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए- सर्व समावेश को अब अलग ढंग से देखने की जरूरत है।
समृद्धि और विकास की जवाबदारी जनता की भी है। स्वच्छता अभियान के बाद, जलशक्ति अभियान, प्लास्टिक विदाई और खेतों में रसायनिक खाद का उपयोग घटाने की सलाह का स्वागत है, लेकिन अमल किस तरह होगा? किसानों के नाम पर नेताओं ने वोट लिया है। आत्महत्याओं में भी राजनीतिक ग्रहण देखा है। खाद सब्सिडी घटने-महंगे होने पर ही कुदरती खाद उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
हर जिले को `एक्सपोर्ट हब' बनाने का विचार अच्छा है, लेकिन जिला और राज्य स्तर पर प्रमाणिक रूप से अमल हो तो...
पांच वर्ष पहले स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री ने टायलेट अभियान की बात कर सभी को चाøका दिया था। अब परिवार नियोजन-जो विषय 1975 की इमरजेंसी में बदनाम हो चुका है- उसकी बात की- इतना ही नहीं छोटा परिवार भी देश भक्ति है- ऐसा कहकर सरकारी शक्ति का उपयोग अत्याचार न होने का गर्भित भरोसा भी दिया है।
जनता ने उनमें जो विश्वास व्यक्त कया है उसका पूरा लाभ देशहित में लेने के लिए नरेद्र मोदी दृढ़ है- उनकी निर्णायक शक्ति को जनता के विश्वास से बल मिलता है।

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