धूम बिकवाली से कपास मंदी की चपेट में

धूम बिकवाली से कपास मंदी की चपेट में
कपास की कीमत नियंत्रित करने की जरूरत
रमाकांत चौधरी  
नई दिल्ली । पिछले लगभग दो माह से मंदेड़ियों की खुले बाजार में सक्रियता रहने के चलते कपास की कीमत भारी मंदी की चपेट में है।जिसके तहत कपास की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की तुलना में खुले बाजार में कपास की कीमत काफी नीचे रह गई है।जिससे स्वभाविक है कि जीनिंग व स्पिनिंग मिलों को ऊंची कीमत पर खरीदी गई कपास में भारी नुकसान हुआ है।जिसको लेकर देश की जीनिंग व स्पिनिंग मिलों के उद्यमियों की तरफ से मोदी सरकार से गुजारिश की जा रही है कि कपास की कीमत को अविलम्ब नियंत्रित की जाए और कपास के निर्यातकों को अविलम्ब प्रोत्साहन दिया जाए और सभी किस्मों के धागा पर जीएसटी की दर एक समान किया जाए ताकि आगे समय रहते कारोबारी हालात में सुधार हो सकेगा।  
दरअसल केद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से चालू खरीफ फसल मौसम 2019-20 के तहत कपास की बोआई को लेकर ताजा आंकड़े प्रस्तुत किए गए है।जिसके तहत चालू खरीफ फसल मौसम में अब तक 118.73 लाख हेक्टेयर रकबा में कपास की बोआई हो चुकी है।वहीं पिछले खरीफ फसल मौसम की इसी अवधि में कपास की बोआई 112.60 लाख हेक्टेयर में हुई थी।ऐसे में पिछले खरीफ फसल मौसम की तुलना में चालू खरीफ फसल मौसम में अब तक कपास की बोआई रकबा 6.13 लाख हेक्टेयर रकबा बढ गया है।वहीं कपास मौसम 2018-19 में कपास उपज 3.60 लाख गांठ होने का अनुमान लगाया गया था बहरहाल प्रतिकूल मौसम और कपास फसल पर रोग लगने से कपास का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ था।हालुंकि कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) की तरफ से कहा गया है कि इस मौसम में कपास उपज 3.12 करोड़ गांठ ही रहेगी वहीं पिछले मौसम में कपास उपज 3.65 करोड़ गांठ हुई थी।जिसको लेकर विशेषज्ञों की तरफ से कहा जा रहा है कि इस वर्ष देश में कपास की बोआई को देखते हुए और अनुकूल मौसम से कपास का उत्पादन विश्वस्तरीय रहेगा।ऐसे में आगे दो-ढाई माह मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष देश में कपास उत्पादन 4 करोड़ गांठ होने की संभावना परिलक्षित हो रही है। बहरहाल कपास उत्पादन का यह आंकड़ा तेजेड़ियों को लेकर फांस बना हुआ है।वहीं कपास मौसम 2018-19 (अक्टूबर-सितम्बर)के तहत भी कपास तेजेड़ियों ने देश में कपास की उपज 40-50 लाख गांठ कम रहने को देखते हुए अरबों रुपए दांव पर लाखों गांठ कपास स्टॉक कर लिया।जिसको लेकर कपास स्टाकिस्टों यानि तेजेड़ियों का बड़ा सपना था कि देश में 40-50 लाख गांठ उत्पादन कम होने से उनकी धन की कीमत का द्वार चौतरफा खुल जाएंगे।बहरहाल कई तेजड़ियों ने कई माह पहले ही कपास गांठ का स्टाक कर लिया था क्योंकि उन्हें बड़ी उम्मीद थी कि कपास सातवें आसमान पर चढकर 7000 रुपए मन का झंडा लहराएगी।बहरहाल तेजेड़ियों के सपने उस समय चकनाचूर हो गई जब कपास बाजार ने 4975 रुपए मन के पास पहुंचकर ऐसा बैक गियर लगा दिया कि कपास स्टाकिस्ट यानि तेजेड़ियों में बड़ी घबराहट बनी हुई है क्येंकि आजकल कपास की कीमत आधे मूंह को गिर गई है और कपास की हालत काफी नाजुक हो गई है।चालू कपास वर्ष में कपास 4975 रुपए मन दिखा कर तेजेड़ियों के चेहरों पर खुशी ला दी थी।वहीं आजकल कपास जे-34 रोलर पंजाब 4375/4425 रुपए मन,हरियाणा 4350/4386 रुपए मन, राजस्थान 4370/4380 रुपए मन बोली जा रही है।वहीं लोअर राजस्थान 41400/42400 रुपए प्रति गांठ बोली जा रही है।वहीं दो माह पूर्व कपास पंजाब में 4840/4870 रुपए मन, हरियाणा में 4820/4870 रुपए मन व राजस्थान में 4840/4850 रुपए मन बोली जा रही थी।जबकि लोअर राजस्थान में कपास 7200/48200 रुपए प्रति गांठ बोली जा रही थी।यानि दो माह में कपास 445/475 रुपए मन व 5800 रुपए प्रति गांठ लुढक गई।
ऐसे में ताजा हालात में एमएसपी की तुलना में कपास की कीमत काफी नीचे रह गई है।जिससे देश की जिनिंग व स्पिनिंग मिलों के उद्यमियों को सीधे तौर पर भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।जिसको लेकर जिनिंग व स्पिनिंग मिलों के उद्यमियों की तरफ से मोदी सरकार से गुजारिश की जा रही है कि कपास की कीमत पर नियंत्रित किया जाए और कपास के निर्यातकों को प्रोत्साहन दिया जाए और सभी तरह के धागा पर जीएसटी की दर एक समान किया जाए ताकि कारोबारी हालात में सुधार हो सकेगा।

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