रक्षाबंधन के अवसर पर रिटेल में भारी ग्राहकी

रक्षाबंधन के अवसर पर रिटेल में भारी ग्राहकी
हमारे सवांददाता 
म. प्र. में वर्षा का असर मालवा इलाके में अच्छा रहा है। ग्रामीण ग्राहकी बढ़ती जा रही है। म.प्र. कभी कपड़ा उत्पादन में अग्रणी रहा है। कपड़ा उत्पादन में इंदौर, उज्जैन, रतलाम, ग्वालियर और नागदा का बिरला मिल यार्न उत्पादन क्षेत्र के जाने माने नाम हुआ करते थे। इंदौर में कपड़ा उत्पादन की प्रक्रिया भले ही बंद हो गई हो मगर इंदौर का कपड़ा एवं गार्म़ेंट व्यापार आज भी देश में अग्रणी है। यहां देश के प्रत्येक त्योहार के साथ ही लग्नसरा अवसरों पर भारी ग्राहकी होती है। आसपास के शहर और ग्रामीण व्यापारियों का रौनक बाजार है इंदौर। राखी अवसर पर गत हप्ते में इंदौर का प्रत्येक बाजार गुलजार रहा। यहां के प्रसिद्ध स्थल राजबाड़ा और सराफा का खानेपीने का जायका लेने हेतु आसपास के सभी बाजारों में भारी भीड़ की गर्दी हुई। गार्म़ेंट की रिटेल ग्राहकी में तो भारी दबाव वाली देखी गई। छोटी रिटेल शाप से लेकर बड़े ब्रांड शो-रूम भी ग्राहकों से भरे थे। थोक मंडी हालांकि बनिस्बत सुस्त थी। पुरानी चालानी कटती देखी गई। गार्म़ेंट उत्पादकों के यहां फिर भी भारी पूछपरख आगे के अवसरों हेतु बुकिंग आर्डर ग्राहकी कर रहे है। इंदौर थोक मंडियों में मिल उद्योग के जमाने के पुराने थोक व्यापारियों का दर्द यहां कि मिलें बंद हो जाने से है। उन्हें अपना व्यापार ट्रेंड बदलना पड़ा। वे आज भी चाहते है कि इंदौर में कपड़ा उत्पादन की संभानाएं आज भी है और सरकार को चाहिये की कम से कम एक मिल का वर्चस्व यहां रहे। उनका यह भी कहना है कि देश में बढ़ रहा बाहरी आयात पर अंकुश होना चाहिये जिससे भारतीय कपड़ा उद्योग को राहत मिले। एफडीआई के प्रवेश को भी सीमित होना चाहिये। बांग्लादेश भूटान, श्रीलंका का एपरल मार्केट कैप अधिक बढ़ गया था जिसकी पूछपरख में कुछ अंतर आया है बताया जा रहा है। इंदौर थोक मंडी से लगभग सभी मिलों के अलावा पावरलूम सेक्टर के क्वालिटी व्यापारकर्ताओं के यहां अच्छी पूछपरख है। आज देश की हजारों गार्म़ेंट उत्पादक फैक्ट्रियों के कई ब्रांड गार्म़ेंट उत्पादक भी जिनके साथ इंदौर के गार्म़ेंट उत्पादककर्ताओं की कम्पिटिशिन बढ़ जाने से अधिक क्वालिटी का भी ध्यान इन्हें करना पड़ रहा है। इससे यहां की सप्लायरर्स संख्या में भी वृद्धि हो रही है। अभी मंडियों में सीजन अनुरूप गार्म़ेंट उत्पादन पर अधिक घ्यान है। सियाराम, मयूर, रेमंड, जयश्री टेक्सटाइल के कपड़ों की मांग ब्रांड गार्म़ेंट उत्पादकों की है तो पावरलूम के कपड़ों की भी मांग अच्छी बनी हुई बताया जा रहा है। अभी तक महिला परिधान में अधिक चालानी महिला उत्पादककर्ताओं के पास हुई बताया जा रहा है। ग्रामीण व्यापारिक ग्राहकी भी सामान्य हो रही है। कपड़े का लुक और फीनीश अच्छा होने तथा कलर लंबे समय तक डय़ूरेबल होने से यहां थोक और खेरची की मांग दोनों है । हालांकि यहा से जींस और शर्टिंग में भी अच्छी ग्राहकी उत्पादनकर्ताओं के पास हो रही है । इंदौर से फैंसी शर्टिंग, सामान्य ट्राउजर्स, लेडीज फैंसी कुर्ती और ब्लाउज की भी अच्छी मांग यहां की उत्पादककर्ताओं के पास हो रही है। लेडीज आयटम हेतु शिफान, फाइन पापलीन और कैम्ब्रिक कपड़ा अधिक चलनसार कपड़ों में उपयोग में आ रहा है। कुर्ती और ब्लाउज में डिजाइनर और पार्टीवियर बनाने हेतु कुछ सिल्की की मांग अधिक होने से साउथ का ही सिल्क कपड़ा अधिक उपयोग में आ रहा है। साड़ियों की खेरची बिक्री के अलावा थोक की सावन और राखी ग्राहकी अधिक बढ़ी है। ब्रांड गार्म़ेंट टी-शर्ट, सूटिंग-शर्टिंग, शर्टिंग में प्लेन, चेक्स, स्ट्राइप और हल्की बारीक कलर प्रिंट का भी अच्छी मांग रही, प्लेन और बारीक डाबी-डिजाइन लाइन ट्राउजर्स, जींस, सलवार- कुर्ते कॉटन और शिफान बेस आधारित कपड़ों की सेल को अच्छा व्यवसाय युवाओं द्वारा मिल रहा है लेडीज में अभी लहरिया साड़ी और लेडीज गार्म़ेंट, मटीरियल में शिफान बेस खरीदी अधिक है। लेनदेन व्यवहार हेतु थोक खरीदी भी इसी अवसर पर देखी जा रही है। रेडीमेड ब्लाउज साउथ सिल्क को भी अच्छे पंसद किये जा रहे है। उनमें भी खरीदी अच्छी बढ़ रही है बताया जा रहा है। हालांकि महंगे भी अधिक है । इनकी खरीदी उच्च वर्ग की महिलाओं की मांग रहने से है। वैसे इंदौर में महिला फैशन डिजाइनरों की भी तादाद बड़े स्तर पर बढ़ रही है। यहां से बन रहे कुछ डिजाइनरों की मांग सेलिब्रीटीज में भी होना बताई जा रही है। सफेद कपड़ों और गार्म़ेंट पर हाल फिलहाल खरीदी कमजोर है मगर सेंचुरी के कट माल फाइन और मोटे काउंट बेस्ड माल का व्यवसाय भी मंडी में अधिक देखने में आ रहा है ।

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