चांदी 21 डॉलर की उच्च तेजी की ओर

चांदी 21 डॉलर की उच्च तेजी की ओर
1980 में चांदी 35.30 डॉलर की ऊंचाई हासिल करके 25 साल की गहरी मंदी में फिसल पड़ी थी 
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई। बुलियन बाजार शायद ही सीधी और समानांतर रेखा में आगे बढ़ती है। जुलाई 2016 में नई ऊंचाई पर पहुँचने के बाद सोना-चांदी में बहुत ही कम समय तक बड़े पैमाने पर कीमत में गिरावट देखने को मिली है, अब यह अवधि भी समाप्त हो गई है। बेशक, आने वाले सप्ताहों और महीनों में टेढ़ीमेढ़ी भाव गिरावट (करेक्शन) का दौर आता रहेगा, लेकिन सभी मुनाफा वसूली गिरावट के बाद सुधार जारी रहेगा। चांदी ने 17 डॉलर प्रति औंस (31.1035 ग्राम) से तेजी की सवारी शुरू की है। अल्पावधि में बाजार को किस दिशा में जाना है, यह निर्धारित करने के लिए संघर्ष भी शुरू हो गया है। 23 जुलाई को 16.48 डॉलर की 2019 की नई ऊंचाई स्थापित की गई थी। 
भले ही 2016 की 20.31 डॉलर की टॉप पकड़ में नहीं आई होगी, लेकिन चांदी ने निश्चित रूप से लोअर लॉज और लोअर हाई की मंदी की पैटर्न को तोड़ दिया है और 21 डॉलर से ऊपर की तेजी की सवारी का प्रारंभ कर दिया है। हालांकि यह संभव है कि पूलबैक (भाव गिरावट के झटके) आया करेगा, लेकिन बाजार का ट्रैंड आपका दोस्त बना रहना चाहिए। फरवरी 1980 में चांदी के भाव ने 35.30 डॉलर की ऊंचाई हांसिल की थी, लेकिन इसके बाद, सितंबर 2005 (25 साल) तक, गहरी मंदी की सुषुप्तावस्था में फिसल पड़ी थी। यह अवधि कागजी (फियाट करेंसी इंस्ट्रूमैंट) पैसे का सुवर्ण अवसर था। 
1980 से 2005 तक डॉलर, यूरो, येन, युआन, रुपया और अन्य सभी विदेशी करेंसी इंस्ट्रूमेंट के मूल्य में लोगो का पूर्ण विश्वास हासिल करने के साथ ही सरकारें कानूनी रूप से पैसे और सिक्के छापती थीं, उसकी क्रेडिट भी बरकरार रहती थी। पिछली शताब्दी के अंत में, करेंसी मूल्य में वृद्धि का युग समाप्त हो गया था और सोना-चांदी की मंदी अपनी चरण सीमा पर पहुँच गई थी। जनवरी 1993 में चांदी ने 3.50 डॉलर का तल स्थापित कर दिया। इस तल के भाव के नजदीक चांदी के भाव अगस्त 2003 तक बरकरार रहे थे। 2011 में रु. 65,000 से 70,000 प्रति किलो के भाव पर कितने रंगरूट पीट गए थे। उसके बाद तो लोभी और डरपोक निवेशकों ने चांदी में ऊंचे भाव पर खरीद कर नीचे भाव पर चांदी में नुकसानी बांध ली थी। 
यह एक ऐसा युग था, जिसमें निवेशक नकदी पैसे की बोरियां भरकर झवेरी बाजार में नाचते हुए दिखाई देते थे। हमें यह समझना चाहिए कि हम जब चांदी में निवेश करते हैं, तब जोखिम भरा रुख अपना रहे हैं। चांदी जिस तरह सराफा धातु (बुलियन मेटल) है, वैसे औद्योगिक धातु (इंडस्ट्रियल मेटल) भी है। वर्तमान में, अर्थव्यवस्थाएं धीमी हो रही हैं तब औद्योगिक धातुओं की मांग कम हो रही है। इसके बावजूद हमें यह समझना होगा कि ऐसे मुद्दें भी है, जो चांदी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए समर्थन दे रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा पूरी दुनिया में ब्याज दरें घट रही हैं, जो सोना की तुलना में सस्ती दिखती और गति से बढ़ने की संभावना रखने वाली चांदी में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है। 
दुनिया भर में कुल सरकारी बॉन्ड में से 17 ट्रिलियन डॉलर के बॉन्ड वर्तमान में नकारात्मक यील्ड (ऊपज) ऑफर करता है। एक पल के लिए सोचें कि क्या आप ऐसे नकारात्मक यील्ड वाले बॉन्ड खरीदना चाहेंगे? अब तो चांदी को भी संग्रह मूल्य मिलने लगा है। और इसलिए ही हमें बचत या अकस्मात की सुरक्षा के लिए जहां अवसर मिलता है उस ओर ध्यान केंद्रीत करना चाहिए। ब्याज दरें गिर रही है और सरकारी वित्त नीतियों में पानी डाला जा रहा है, तब पैसे का प्रवाह कीमती धातु (प्रेसियस मेटल) की ओर प्रवाहित होने लगा है। यह बात न केवल चांदी के लिए ही नहीं सोने के साथ-साथ प्लैटिनम और पैलेडियम पर भी लागू होता है।

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