अमेरिका के समक्ष चीन करेंसी वार की नई चुनौती से बिटकॉइन में तेजी

अमेरिका के समक्ष चीन करेंसी वार की नई चुनौती से बिटकॉइन में तेजी
इब्राहिम पटेल 
सोने पर किसी का दायित्व नहीं है या नहीं उसे प्रिंट किया जाता, क्रिप्टो करेंसी का भी ऐसा ही है। बिटकॉइन का कोई केंद्रीय बक नहीं है, इसकी आपूर्ति अल्गोरिदम (गुणांक यंत्र) द्वारा नियंत्रित है। लेकिन अब बिटकॉइन और सोना के बीच सहोदर  का रिश्ता स्थापित हुआ है। अब तो बिटकॉइन को डिजिटल गोल्ड के रूप में स्वीकृति मिलने लगी है। इन सभी के अलावा, बिटकॉइन और सोने को व्यापार युद्ध (ट्रेड वॉर) और ब्याज दर में कटौती के सामने सुरक्षित हेज के रूप में भी अपनाया गया है। लेकिन यदि सुक्ष्म रूप से इन सभी आंकड़े को जांचते है तब ऐसा सवाल पैदा करता है कि, कागजी पैसे जब वित्तीय संकट के हवन में डाला जा रहा है, तब निवेशक कहां जाए? 
इस महीने अब तक में सोने की कीमत 1392 डालर से 7.5 प्रतिशत बढ़कर 1529 डालर जबकि बिटकॉइन 10011 डालर से 14 प्रतिशत बढ़कर 11426 डालर हुआ है। कमजोर आर्थिक माहौल में ढोल नगाड़ा बजने लगा है, तब इन दोनों कमोडिटी आपको संकट के चक्रवात में तारणहार जैसी लगने लगी होगी। दुनिया भर की केंद्रीय बकों बेफाम करेंसी नोट प्रिन्टिंग करने लगी है। तब इन दोनों कमोडिटी अब मुद्रास्फीति और क्रय शक्ति घाटे के सामने मुक्तिदाता और अच्छे रिटर्न के स्थिर स्रोत के रूप में देखा जाता है। बेशक, यह मत भूलों कि पिछले कुछ सालों में बिटकॉइन ने बड़ी अफरातफरी के दौरान निवेशकों की जेब में छेद कर दिए है। 
लेकिन सोना ने एक दम से घातक स्थिति पैदा नहीं किया है, दूसरी ओर आपके पोर्टफोलियो की स्थिरता की गारंटी भी नहीं दी है। पिछले एक दशक में, आर्थिक राहत पैकेजों और नीचे एवं नकारात्मक ब्याज दर की शरारत से सर्जित हुई मुद्रास्फीति से तंग आ चूके निवेशकों के आत्मविश्वास को हिला कर रख दिया है। 2018 में बिटकॉइन ने 66 प्रतिशत का कैपिटल लॉस सहन किया था, उसके एक साल पहले 1500 प्रतिशत का ऊछाल आया था। 2019 में भाव 3963 के तल से अब तक 300 प्रतिशत जितने बढ़े है, यह टिके रहेंगे, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। डिजिटल करेंसी की मांग, निवेशक की लालच और डरपोक वृत्ति पर निर्भर, आसमानी सुलतानी उछल-कूद वाली होती है। 
1 अगस्त 2011 को सोने की कीमत 1921 डालर के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। उसके बाद, मॉनिटरी इजिंग का पहला चरण बस शुरू ही हुआ था, तब तो सोने की तेजी के गुब्बारे में से अल्पावधि में हवा निकल गई। आज भी सर्वोच्च स्तर से भाव 20 प्रतिशत नीचे है। सोने की तरह ही बिटकॉइन के भाव पिछले दो सप्ताह में 30 प्रतिशत बढ़े है, यह भी वैकल्पिक संग्रह मूल्य (स्टोर ऑफ वैल्यू) की तरह (सोने जैसा) ही बर्ताव करने लगा है। यह घटना ऐसा संकेत देती है कि अब के बाद वैश्विक आर्थिक समस्या बढ़ेगी, जो बाजार में अनिश्चितता पैदा करके बिटकॉइन और सोने के नजदीक सेंटीमेंट मोमेंटम स्थापित करेगी। सोना अभी तक वैश्विक नीचे ब्याज दर का संपूर्ण और वास्तविक प्रतिबिंब नहीं दिखलाता। बेशक, मजबूत निवेशकों ऐसे अनियमित माहौल का पूरा कस जल्दी से निकालने में लगे है। 
पूरी दुनिया एक ही जहाज में सवार हो उससे पहले या बाजार में नए जोखिम सर्जित हो उससे पहले निवेशक के रूप में आपके पोर्टफोलियो में सोना या बिटकॉइन को जोड़ना उचित माना जाएगा। लेकिन आप ऐसा समझने की भी भूल नहीं करना कि मौजूदा बाजार प्रवाह आपके निवेश की, सोना और क्रिप्टो करेंसी को मजबूत सुरक्षा देता है। यह सब एक विश्वास के आधार पर हो रहा है, यह एक सच्चाई है, ऐसा भी नहीं मानना चाहिए। पिछले सप्ताह चीन ने अपनी करेंसी को 7 युआन प्रति डालर से ऊपर तक कमजोर होने देकर, अमेरिका के सामने करेंसी वॉर की नई चुनौती खड़ी की है, उसके साथ ही तेजी का डमरू बजने लगा है। नतीजतन, एस एंड पी 500 शेयर सूचकांक दो महीने के तल पर पहुँचा। सोना ने 2019 की नई ऊंचाई हांसिल की और बिटकॉइन ने पिछले सप्ताह 12,325 डालर की एक महीने की नई ऊंचाई बनाई।

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