ऑटो-रियल एस्टेट, निर्यात जैसे क्षेत्रों में कर कटौती, सब्सिडी व अन्य प्रोत्साहन शीघ्र

ऑटो-रियल एस्टेट, निर्यात जैसे क्षेत्रों में कर कटौती, सब्सिडी व अन्य प्रोत्साहन शीघ्र
आर्थिक मंदी से उबारने हेतु सरकार सक्रिय
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । देश की अर्थव्यवस्था के समक्ष मंदी जैसे हालात उत्पन्न हो रखे है जिसको लेकर केद्र सरकार बेहद चिंतित है।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से आर्थिक मंदी जैसे हालात से उबारने को लेकर उद्योगों को शीघ्र राहत देने की योजना पर काम कर रही है।जिसको लेकर केद्र सरकार किसी भी समय उद्योगों को राहत देने की घोषणा कर सकती है।जिसके तहत उद्योगें को राहत के मद में कर कटौती के अतिरिक्त सब्सिडी सहित कई तरह के अन्य कदम शीघ्र उठाए जाने की संभावना है।
दरअसल देश में उद्योगों को राहत देने को लेकर केद्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की तरफ से इस प्रस्ताव को तैयार करने के कार्य में जोरशोर से जुटे हुए है।जिसको लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को केद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ अर्थव्यवस्था की हाल सुधारने को लेकर उठाने वाले कदमों की समीक्षा की गई।ऐसे में इस राहत प्रस्ताव के तहत ऑटो,रियल एस्टेट और सर्विस सेक्टर को लेकर अलग अलग कदम उठाए जा सकते है ताकि इन क्षेत्रों में सुस्त पड़ा कारोबारियों का उत्साह एक बार फिर जागे और उद्योगपतियों में आर्थिक स्थिति को लेकर भरोसा कायम हो सके।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से आर्थिक गति को सुधरने को लेकर आधारभूत ढांचे में निवेश बढाने का फैसला करने के अतिरिक्त ऑटो सेक्टर में जीएसटी की दरों में कटौती कर सकती है।ऐसे में केद्र सरकार के इस कदम से मांग में तेजी आने का भरोसा है।इन कदमों के अतिरिक्त आयात-निर्यात को लेकर भी ऐलान किए जा सकते है और ईज ऑफ डुइúग बिजनेस को प्रोत्साहित करने को लेकर अफसरशाही पर लगाई जा सकती है।चूंकि पिछले दिनों आरबीआई की तरफ से देश की जीडीपी के विकास को लेकर अपने अनुमान में कमी कर दी है।जिसको लेकर पिछले कुछ अर्से से वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण लगातार उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करने के अतिरिक्त ऑटो, बकिंग, मोबाइल,एफपीआई,एमएसएमई और रिएय एस्टेट से संबंधित उद्योगपतियों से मुकाकात कर रही हø।इन मुलाकातों में वित्त मंत्री ने सभी पक्षों की बातों से ध्यान पूर्वक सुना और उनकी समस्याओं को जानने की कोशिश की है और उन्हें शीघ्र ही समस्या का समाधान करने का वादा किया है।हालांकि पिछले कई महीने से मंदी की मार झेल रहे ऑटो,रियल एस्टेट सहित अन्य उद्योगों की अर्थव्यवस्था में गिरावट को संभालने का प्रयास कर रही मोदी सरकार के पास आर्थिक स्थिति को गति देने को लेकर सीमित ही विकल्प है।ऐसा पिछले कुछ महीनों से केद्र सरकार के राजस्व में आ रही कमी के चलते है।जिसके तहत अर्थव्यवस्था में मंदी के चलते बिक्री में भारी गिरावट देखी जा रही है।जिसके चलते सरकार को जीएसटी से होने वाले राजस्व कम आ रहा है।जिससे सरकार के पास अर्थव्यवस्था को गति देने को लेकर धनराशि बहुत अधिक नहीं होंगी।हालांकि बाजार में मांग को सुधारने और रुपए की तरलता बढाने को लेकर पिछले दिनों आरबीआई ने ब्याज दरों में 35 बेसिस प्वांइúट की कमी है बहरहाल यह नाकाफी लग रहा है।जिसको लेकर उद्योग से संबंधित विािन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मुलाकात करके आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताने के साथ साथ अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने को लेकर राहत पैकेज की गुजारिश की है।हालांकि निर्धारित लक्ष्य से कम कर वसूली और वित्तीय घाटे को काबू रखने के लक्ष्य के चलते बजट में केद्र सरकार उद्योगों को लेकर किसी बड़े राहत पैकेज का ऐलान नहीं कर सकी बहरहाल अब फिस्किल रिस्पांसिबिलिटी एण्ड बजट मैनेजमेंट (एफआरबीएम) एक्ट में से ही अर्थव्यवस्था को सुधारने को लेकर रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है।जिसके तहत केद्र सरकार अपनी घोषणा को लेकर बजट में निर्धारित किए गए वित्तीय घाटे के लक्ष्य को 50 बेसिस प्वाइúट तक बढाने का जोखिम ले सकती है क्योंकि इस समय अर्थव्यवस्था में काफी गिरावट है और निजी निवेशक निवेश करने में रुचि नहीं दिखा रहे ह।जिससे केद्र सरकार को कोई फैसला जल्द लेना पड़ेगा बहरहाल यह फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय के स्तर पर ही तय किया जाएगा।ऐसे में एफआरबीएम एक्ट को लेकर अध्ययन कर रहे एन के सिंह वाली अध्यक्षता के पैनल की तरफ से कहा गया है कि केद्र सरकार कुछ स्थितियों में एफआरबीएम एक्ट के तहत अधिक खर्चा कर सकती है।यह जीडीपी का 0.5 प्रतिशत हो सकता है और यदि केद्र सरकार यह फैसला लेती है तो 1.15 ट्रिलियन रुपए खर्च करने का रास्ता साफ हो जाएगा।   

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