केद्र के साथ राज्यों के खाद्यमंत्रियों की बैठक

राज्यों को दाल व प्याज आपूर्ति बढ़ाने हेतु इन्हें बफर स्टॉक से उठाने की सलाह  
हमारे संवाददाता
देश के संसद से पारित उपभोक्ता संरक्षण कानून के प्रावधानों पर कारगर अमल,खाद्य वस्तुओं में आपूर्ति सुनिश्चित कर महंगाई पर काबू पाने और राशन प्रणाली को सुदृढ बनाने को लेकर केद्र ने राज्यों के खाद्य मंत्रियों की बैठक 3 सितम्बर 2019 को नई दिल्ली में बुलाई गई । जिसमें केद्र की तरफ से राज्यों में मूल्य स्थिरीकरण फंड बनने का प्रस्ताव किया गया।वहीं दाल और प्याज के मूल्य में आई तेजी को देखते हुए केद्रीय खाद्य मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को तत्काल प्रभाव से केद्र के बफर स्टॉक से इन जिंसों को उठाने की सलाह दी है।वहीं इस बैठक में पोषण सुरक्षा योजना को रफ्तार देने पर जोर दिया गया।
दरअसल केद्र की तरफ से खाद्य मंत्रियों की बुलाई गई पांचवीं राष्ट्रीय परामर्श बैठक में उपभोक्ताओं से संबंधित सभी प्रमुख मुद्दों पर राज्यों के साथ चर्चा की गई।जिसके तहत संसद से पारित उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 में किए गए कई नए प्रावधानों पर क्रियान्वयन को लेकर सभी राज्यों को कहा गया है।जिसको लेकर केद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून को लागू करने का बड़ा दायित्व राज्यों को ही उठाना है।जिसके तहत जिला और राज्य स्तरीय उपभोक्ता आयोगों के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।जिसको लेकर आयोग को डिजिटल करने, शिकायतों की ई-फाइलिंग, मध्यस्ता, अनुचित व्यापार प्रणाली से निपटने को लेकर उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।ऐसे में संसद से कानून पारित होने के बाद दिसम्बर के आखिर तक रुल्स-रेगुलेशन बनाने की तारीख तय की गई है।जिसको लेकर राज्यों से राय मांगी गई है।जिसको लेकर राज्यों को अपना पक्ष रखने का अधिकार है जिसे इसमें शामिल किया जाएगा।
जिसके तहत उपभोक्ता आयोग के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति की सेवा शर्त़ों में एकरुपता लाने पर बल दिया गया।जिसमें राज्यों के सहयोग की जरुरत होगी।इस बैठक में राज्यों के खाद्य व उपभोक्ता मंत्रियों के साथ केद्रीय कृषि,स्वास्थ्य व परिवार कलषिण,उद्योग और वाणिज्य के साथ केमिकल व फर्टिलाइजर मंत्रालयों के मंत्री और अधिकारी शिरकत की थी।वहीं राष्ट्रीय स्तर पर गरीबों को लेकर पोषण सुरक्षा की योजना शुरु की गई है।जिनकी शुरुआत हो चुकी है।जिसके तहत तीन वर्षीय इस योजना को लेकर 147.61 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
जिसमें राशन प्रणाली के मार्फत संचालित होने वाली इस योजना में पोषण तत्वों से भरपूर चावल का वितरण किया जाएगा।जिसके तहत पूर्वोत्तर,पहाड़ी ओर द्विपीय राज्यों को लेकर योजना में केद्र की 90 प्रतिशत की मदद मुहैया कराई जाएगी।वहीं अन्य राज्यों को लेकर केद्रीय मदद 75 प्रतिशत होगी।वहीं आवश्यक जरुरतों वाली जिंसों में दाल और प्याज की महंगाई पर काबू पाने को लेकर सभी राज्यों से केद्रीय बफर स्टॉक के उपयोग की सलाह दी गई।बफर स्टॉक में इन जिंसों का पर्याप्त स्टॉक है।राशन प्रणाली में सुधार को लेकर राशन कार्ड की आधार सीडिंग में सुधार पर जोर दिया गया।एक राष्ट्र राशन कार्ड योजना पर अमल में तेजी लाने पर जोर दिया जाएगा।इसके अतिरिक्त राज्यों की तरफ से उठाए जाने वाले कुछ अन्य विषयों पर चर्चा की गई।वहीं राज्यों के उपभोक्ता मामले व खाद्य मंत्रियों की बैठक में सभी राज्यों की तरफ से आवश्यक वस्तु अधिनियम के कई गैर जरुरी सख्त दंडात्मक प्रावधानों को समापत करने की बात उठाई गई।जिसको लेकर केद्रीय उपभोक्ता मामले के सचिव अविनाश के श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे प्रावधानों को हटाने अथवा सरल करने से इस क्षेत्र में निवेश को बढाने में मदद मिलेगी।वहीं महंगाई को रोकने में यह कानून कभी बहुत मददगार साबित होता था बहरहाल अब कई ऐसे जिंस है जिनकी पर्याप्त उपलब्धता लंबे समय तक बनी रहती है।इस बैठक में सभी राज्यों से महंगाई पर काबू पाने को लेकर केद्र की तर्ज पर मूल्य स्थिरीकरण फंड के गठन का प्रस्ताव रखा गया जिस पर सहमति बनाने की कोशिश की गई।इ समय समय चार राज्यों आन्ध्र प्रदेश,तेलंगाना,उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में यह फंड पहले ही बन चुका है।

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