ग्वार की कीमत दबाव में रहने के आसार

ग्वार की कीमत दबाव में रहने के आसार
हमारे संवाददाता
जयपुर। सबसे बड़े ग्वार उत्पादक राज्य राजस्थान में चालू खरीफ सीजन के तहत ग्वार की बोआई लगभग पूरी होने आई है। अगस्त महीने में हुई बारिश से बोआई बढ़ने के साथ फसल भी सामान्य स्थिति में है। राजस्थान सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 27.56 लाख हैक्टेयर में ग्वार की बोआई हो चुकी है जो बोआई लक्ष्य का 89% है। राज्य सरकार ने बोआई का लक्ष्य 31 लाख हैक्टेयर रखा है। उम्मीद की जानी चाहिए अगस्त अंत तक यह बोआई पूरी हो जाएगी। 
ग्वार उत्पादक इलाकों में जमीन में नमी है एवं मौसम अनुकूल है। ग्वार की फसल के विकास के लिए यह होना जरूरी है। यदि ऐसा ही माहौल सितंबर में रहता है तो ग्वार की फसल बेहतर रहेगी। लंबे समय तक बादलवाही होने से फसल में कोई कीट और रोग नहीं लगते एवं अभी तक कहीं से भी फसल में कीट या रोग लगने के समाचार नहीं है। अगले 15 दिनों में यदि बारिश फिर से आती है तो ग्वांर के लिए बेहतर होगा। 
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिका एवं चीन के बीच चल रहे ट्रेड वार की वजह से क्रूड के दाम नीचे आए हैं। चीन ने अमेरिकी क्रूड ऑयल आयात पर पांच फीसदी टैरिफ डयूटी लगाने का फैसला किया है। ईंधन को छोड़कर अनेक कैमिकल्स, पॉलिमर्स एवं फाइबर्स क्रूड ऑयल से बनाए जाते हैं। वैश्विक अर्थव्यस्था में क्रूड की भूमिका अहम है। लेकिन इसके गिरते भाव से वैश्विक मंदी की आहट सुनाई देती है एवं बाजार में इसकी सप्लाई बढ़ती है तो यह ठीक नहीं होगा।  भारतीय ग्वारगम पावडर की मुख्य रूप से खपत ऑयल एवं नैचुरल गैस उद्योग में होती है।
अमेरिका में लाइट क्रूड का उत्पादन बढ़ रहा है। ग्वारगम पावडर लाइट क्रूड ऑयल के उत्पादन में काम में लिया जाता है। अमेरिका में हर रोज 110 लाख बैरल का उत्पादन हो रहा लेकिन अमेरिका अभी भी अपनी रिफाइनरियों के लिए हैवी क्रूड ऑयल का आयात कर रहा है। क्रूड ऑयल के अलावा पशु आहार भारतीय ग्वार मील/ग्वार प्रोटीन का दूसरा सबसे बड़ा खपत बाजार है। अमेरिका में रिग्स काउंट की संख्या घटी है। बेकर हग्सव के मुताबिक अमेरिका में ऑयल रिग्सप की संख्या वर्तमान में 916 है जो पिछले साल के समान समय की तुलना में 128 कम है। 
चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में अप्रैल-जून में ग्वार उत्पादनों का निर्यात 127700 टन रहा जो वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में 135210 टन था। इस तरह सभी कारणों को देखें तो वर्तमान में बाजार ग्वार को सपोर्ट नहीं कर रहा है एवं इसके दाम अभी ऊपर नहीं उठ पाएंगे। ग्वार की सामान्य फसल और कमजोर निर्यात मांग ग्वार गम पावडर की मांग नहीं बढने देगी एवं ग्वार के दाम ऊपर नहीं उठने देगी। ग्वार के दामों में नरमी का माहौल ही दिख रहा है एवं आने वाले दिनों में यह दबाव और बढ़ सकता है।  
कमजोर निर्यात मांग से ग्वार के दाम नीचे आए हैं एवं कारोबारी गतिविधियां सुस्त पड़ी है। हाजिर में ग्वार की मांग सुस्त है। ग्वार के खरीददारों की नजर नवंबर एवं दिसंबर में ताजा ग्वार के कारोबार पर है। नई फसल बाजार में डेढ़-दो महीने बाद आ जाएगी। ताजा ग्वार में नमी अच्छी होने से इसकी प्रोसेस सरल रहती है एवं ग्वार गम की रिकवरी भी अच्छी होती है।

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