जेपी की अधूरी परियोजनाओं हेतु नई योजना बनाएगी एनबीसीसी

जेपी की अधूरी परियोजनाओं हेतु नई योजना बनाएगी एनबीसीसी
सुप्रीम कोर्ट ने नए प्रस्ताव के लिए कंपनी को दिया तीन सप्ताह का समय 
घर खरीदारों व अन्य पक्षों की चिंताएं दूर करने की कोशिश
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । घर खरीदारों की शिकायतों के निवारण को लेकर नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) कर्ज में डूबे जेपी समूह की रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर संशोधित योजना पर विचार कर रही है।जिसको लेकर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी ने 5 सितम्बर 2019 को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी।इस प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों सहित सभी पक्षों को सप्ताह भर के भीतर एनबीसीसी के समक्ष अपनी बात रखने को कहा है ताकि संशोधित योजना में उनकी चिंताओं पर गौर किया जा सकेगा।
न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने एनबीसीसी को सीलबंद लिफाफे में योजना साøपने को लेकर तीन सप्ताह का समय दिया।जिसको लेकर पीठ ने कहा क एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड8 संशोधित योजना को अंतिम रुप देने क zबाद इसे जरुरी विमर्श को लेकर उचित अथॉरिटी के समक्ष रख सकती है।जिसको लेकर कम से कम तीन सप्ताह का समय चाहिए। हम इस अनुरोध को स्वीकार करते है। ऐसे में प्रस्तावित संशोधित योजना की मुख्य विशेषताओं को अगली सुनवाई पर गौर करने को लेकर सीलबंद लिफाफे में योजना पेश की जाए।पीठ ने अगली सुनवाई को लेकर 17 अक्टूबर 2019 की तारीख तय की।कोर्ट ने कहा कि एनबीसीसी द्वारा संशोधित योजना तैयार कने में किसी पक्ष के अधिकारों और दलीलों से पक्षपात नहीं हो।अदालत ने इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया जारी रखने पर यथास्थिति का आदेश दिया।जिसको लेकर केद्र की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान ने कहा कि इस योजना का मसौदा तैयार करने में वित्त मंत्रालय भी एनबीसीसी की मदद करेगा।सुप्रीम कोर्ट ने 3 सितम्बर 2019 को एनबीसीसी से इस बारे में पूछा था कि वह जेपी समूह की रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर नई योजना बनाने की इच्छुक है या नहीं।

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