सोना टेरर फंडिंग के शिकंजे में

सोना टेरर फंडिंग के शिकंजे में
गोल्ड ईटीएफ में $ 5 अरब का निवेश
इब्राहिम पटेल 
मुंबई। निवेशकों में सोना के प्रति अचानक प्रेम का ऊबाल क्यों आया? सोना के भाव छह साल की ऊंचाई पर चले जाने के बावजूद, पूरी दुनिया में से निवेशकों ने बुलियन बाजार में ऊछलकूद करने आ गए हैं। लेकिन भाव अभी इतने ऊंचे क्यों है? और अब सोना में निवेश करना उचित है? ये सभी प्रश्न सोना में निवेश करने वाले आम निवेशकों द्वारा पूछे जाते हैं। तथ्य यह है कि ये सभी प्रश्न शेयर बाजार और बांड में निवेश करने वाले चतुर-सुजान नहीं करते हैं। लेकिन भारत जैसे देश में जहां सोने को एक धार्मिक भावना से देखने वाले निवेशकों की ओर से ऐसे प्रश्न आ रहे हैं। यदि आपके देश की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ने लगी है और करेंसी बाजार में आपकी मुद्रा गति से कमजोर होने लगी है, इस स्थिति में आपके पैसे सोने में निवेश करेंगे तो यह उचित माना जाएगा। 
जब अर्थव्यवस्था की तस्वीर स्पष्ट नहीं हो, वित्तीय क्षेत्र में अनिश्चितताएं व्यापक बन जाए तब लोग सोना में आशरा लेना शुरू करते है और भारत में तो कठिनाइयां अभी शुरू हुई है, इसलिए ही सोना में निवेश करना अच्छी बात है। आप देखिए, सोना आधारित वैश्विक गोल्ड ईटीएफ में यूनिट की खरीदारी, अगस्त एंड तक में छह साल की नए उच्च स्तर पर पहुंच गई है। दुनिया भर में राजनीतिक अनिश्चितता का जोखिमी माहौल पैदा होने से, तथाकथित फियर ट्रेड के बीच निवेशकों ने अकेले गोल्ड ईटीएफ में पांच अरब डॉलर ड़ाल दिए। 8 प्रतिशत की बढ़त के साथ कमोडिटी बाजार में सोना बेस्ट पर्फार्मिंग एसेट्स बन गई, भाव अप्रैल 2013 के बाद नई ऊंचाई पर पहुंच गए। इस साल अब तक में सोना 20 प्रतिशत की बढ़त के साथ गुरुवार को प्रति औंस (31.1035 ग्राम) 1561 डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच गया। 
निवेशकों ने अगस्त में ईटीएफ के जरिए 101.90 टन सोना खरीदा था, परिणामस्वरूप कुल वैश्विक ईटीएफ होल्डिंग 2453 टन की, फरवरी 2013 के बाद की नई ऊंचाई पर पहुंच गई। ईटीएफ में यह लगातार तीसरे महीने होल्डिंग वृद्धि हुई थी। इस घटना ने तो ``टेरर-ट्राईक्टा ट्रेड'' (टेररिस्ट फाइनेंसिंग लिंक) जो अब तक शेयर बाजार, बिटकॉइन में निवेश करते थे, उसमें गिरावट आने से, वे सोना और अमेरिकी बांडों की ओर आकर्षित हुए है। चीन अमेरिका ट्रेड वॉर से लेकर ब्रेक्सिट जैसी दुनिया की सभी समस्याओं के समाधान के रूप में सभी तरह के टेरर ट्राईफेक्टा ट्रेड में बड़ा आकर्षण पैदा किया है। 
विश्लेषकों का कहना है कि अगस्त में बिटकॉइन के भाव 5 प्रतिशत गिर गए थे, वैश्विक बांड यिल्ड टूट गई थी, तब केवल सोना ही निवेशकों का सहारा बना था। 
अगस्त में अमेरिकी औद्योगिक आंकड़े कमजोर आए, पीएमआई (पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) जुलाई के 51.2 से घटकर 49.1 हुआ। इसके अलावा अमेरिकी निर्माण क्षेत्र के जुलाई आंकड़े, जून से 0.1 प्रतिशत की गिरावट दिखलाता था। इस तरह की कमजोर रिपोर्ट से मोनिटरी पॉलीसी अधिकारियों के तंबू में खलबली मच गई है, जो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर को कम करना चाहते हैं। 
पिछले सप्ताह के अंत में चीन ने डबल्यूटीओ में अमेरिका के खिलाफ शिकायत दर्ज की उसके साथ ही अमेरिका ने चीन के अधिक सामानों पर आयात शुल्क भी बढ़ा दिया। इतना कम है, वैसे मान कर बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हल्ला मचा देने वाली एक ट्वीट करके चीन के तंबू में दहशत फैलाई थी। इसका मतलब यह हुआ कि ट्रेड वॉर के ओजा के अधिक डमरू अब बजेंगे। रणनीतिक रूप से, चीन ने अपनी मुद्रा युआन को अमेरिकी डॉलर के सामने कमजोर करके 11 साल के तल प्रति डॉलर 7.2 यूआन तक पहुंचा दिया है। ब्रेक्सिट के मामलों में यूके में कोई समाधान नहीं होने से ब्रिटिश पाउंड 34 वर्ष के खड्डे में गिर गया।  

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