मेन्युफैक्चरिंग, निर्यात को प्रोत्साहन एवं एफटीए पर होगा विचार

मेन्युफैक्चरिंग, निर्यात को प्रोत्साहन एवं एफटीए पर होगा विचार
वाणिज्य मंत्रालय के साथ बोर्ड ऑफ ट्रेड की 12 सितम्बर को मीटिंग
रमाकांत चौधरी 
नई दिल्ली । देश की अर्थव्यवस्था के समक्ष मंदी जैसे हालात है।जिसको दुरुस्त करने को लेकर केद्र सरकार के सभी मंत्रालयों ने कवायद शुरु कर दी है।जिसको लेकर मेन्युफैक्चरिंग की स्थिति में सुधार और निर्यात क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी बनाने के उपाय तलाशने को लेकर केन्दीय वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से 12 सितम्बर 2019 को बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक बुलाई गई है।
केद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में होने वाली बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक में मेन्युफैक्चरिंग के अतिरिक्त बढते आयात को कम करने के उपायों पर चर्चा होने की संभावना है।चूंकि पिछले कुछ महीनों से देश के निर्यात में वृद्वि की रफ्तार कम हो रही है बहरहाल आयात अधिक हो रहा है।जिसके तहत आयात बिल बढने के साथ साथ व्यापार घाटा बढ रहा है।जिसके तहत देश का व्यापार घाटा जुलाई में 13.43 अरब डॉलर रहा है।जिसको लेकर केद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की सबसे बड़ी चिंता निर्यात की रफ्तार बढाने को लेकर है।जिसको लेकर केद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल लगातार विभिन्न सेक्टर और एसोसिएशनों के साथ निर्यात की दिक्कतों को लेकर बैठक कर रहे है।जिसके तहत उद्योगों में इस बात को लेकर सहमति हे कि निर्यात और मेन्युफैक्चरिंग की गति एक दूसरे से संबंधित है।ऐसे में घरेलू मेन्युफैक्चरिंग और निर्यात उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाए जाने की जरुरत है।ऐसे में बोर्ड ऑफ ट्रेड की इस बैठक के एजेंडा में इसलिए मेन्युफैक्चरिंग और निर्यात के मुद्दों को काफी महत्व दिया गया है। जिसकोलेकर बोर्ड ऑफ ट्रेड की 12 सितम्बर 2019 को होने वाली बैठक में विभिन्न देशों और देशों के संगठनूं के साथ हुए विदेश व्यापार समझौतों की समीक्षा को एजेंडा में रखा गया है।जिसको लेकर उद्योग संगठनों की तरफ से केद्र सरकार से लगातार इन समझौतों की समीक्षा की मांग की जा रही है।जिसको लेकर कैद्र सराकर भी इस बात को स्वीकार कर चुकी है कि बदली हुई परिस्थतियों में इन समझौतों पर पुनर्विचार करने की आवश्कता है।
इस बैठक में केद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और उद्योग प्रतिनिधियों में विशेष कर स्टील और अन्य मेटल सेक्टर के बीच पिछले दो महीने में हुई बैठकों में भी इस पर चर्चा हुई है।जिसको लेकर बोर्ड ऑफ ट्रेड की इस बैठक में भी इस विषय पर विचार विमर्श करने को लेकर केद्र सरकार का प्रस्ताव है ताकि इस मामले में नीतिगत निर्णय की बढा जा सकेगा।

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