ग्रे की मंदी से कपड़ा बाजार चौपट?

रामलाल पारख
जीएसटी और नोटबंदी के बाद राजस्थान के पाली,जोधपुर और बालोतरा के टेक्सटाइल्स उद्योब बर्बादी के कगार पर पहुंच गए है।वहीं रही सही कसर एनजीटी के पर्यावरण के नियम और कानून को इतना कठोर कर दिया हैकि इन शहरों 25 प्रतिशत इकाइयां बंद हो गई हैऔर बाकी बंद होने के कगार पर है।कई इकाइयें का उत्पादन घटकर आधा रह गया है।कई मजदूर बेरोजगार हो गए है।भारी आर्थिक संकट के चलते उद्योगों में अफरा तफरी का माहौल है।कहीं से भी भुगतान की आवक नहीं है।
खबर यह भी हैकि अहमदाबाद के कई व्यापारी शेयर बाजार में भारी पैसा डूबा चुके है।अािधिकांश व्यापारी कपड़ा बाजार से जुड़े हैं।अहमदाबाद के अतिरिक्त मुंबई,सूरत और इंदौर के व्यापारी भी शेयर बाजार में काफी पैसा डूबा चुके है।जिससे बाजारों में भुगतान संकट पैदा हो गया है।
दिसावरो में ग्राहकी की भारी कमी और गे बाजार में ताबड़तोड़ मंदी के चलते अधिकांश व्यापारीवर्ग का कपड़ा बाजार से मोह भंग हो गया है।पर्यावरण के नाम से उद्योगों से अंधाधुन पैसे वसूले जा रहे है।प्रशासन की उद्योगों पर कठोर निगरानी,छोटी छोटी गललियों पर पैनल्टी लगाई जा रही है।जिससे उद्योग धंधे तबाही की  कगार पर है।
प्रदूषण के कड़े नियमों और भारी आर्थिक जुर्माने अब इस उद्योग धंधे के लिए असहनीय है।व्यापारीवर्ग पहले से ही व्यापार की मंदी में उलझा हुआ है।
ग्रे बाजार में पिछले सप्ताह ही 2 से 3 रुपए प्रति मीटर की मंदी से व्यापारीवर्ग में भारी घबराहट है।कई माल वापस आने लगे है।नया माल कोई भी व्यापारी लेने के मूड में नहीं है।ग्रे बाजार की गणित ने घरेलू बाजार की पूरी कहानी बदल दी है।ऐसे में अब दीपावली नजदीक हैबहरहाल ग्राहकी प्रतिदिन घटती जा रही है।कई बड़े व्यापारी ने काफी गारमेंट तैयार कर रखें है।सारे गोदाम स्टॉक से भरे पड़े है बहरहाल ग्राहकी का नामोनिशान नहीं है।
अहमदाबाद और सूरत का तो हाल अधिक खराब है।हर सप्ताह एक नए व्यापारी डिफॉल्ट की खबरें आ रही है।लाखों में डुबने वाले व्यापारी की कोई चर्चा नहीं कर रहा है।करोड़ों में डुबने वाले व्यापार की चर्चा होती है।व्यापारीवर्ग में अब शर्म और इज्जत की बात नहीं है।हालात इतने गंभीर हैकि सूरत और अहमदाबाद में व्यापारी उधार माल बेचने में कतरा रहे है।अब दुर्गा पूजा की समाप्त हो गई है।कोलकाता में ग्राहकी एकदम शून्य के बराबर है।ग्रे के भाव घटने के चलते रिटर्न माल का आना चालू हो गया है।कोलकाता का काम करने वाले व्यापारीवर्ग को करोड़ों का होने की चर्चा है।
ग्रे के भाव में मंदी ने इतिहास ही बदल डाला है।30 रुपए प्रति मीटर बिकने वाला 120 ग्राम रेयान 23 रुपए प्रति मीटर बिका।जिसमें 140 ग्राम रेयान 28-29 रुपए प्रति मीटर बिका।रेयान स्लब और कॉटन स्लब में भी भारी मंदी आने से व्यापारीवर्ग बौखला गए है।ग्रे में मंदी के चलते तिरपुर, ईरोड, भिवंडी, ईछलकरंजी, बुरहानपुर और मालेगांव के ग्रे का व्यापार चौपट हो गया है।सारे विवर नुकसानी में आ गए है।कई लूम बंद हो गए है।कई बंद होने के कगार पर है।व्यापार में भारी मंदी को देखते हुए कई मजदूरों को दीपावली से एक माह पहले ही छुट्टी कर दी है।
व्यापार ने अहमदाबाद, दिल्ली, मुंबई, सूरत, कोलकाता के कई व्यापारी संगठनों से मंदी के बारे में चर्चा कि सभी की राय से ज्ञात हुआ कि उपभोक्ता वर्ग की क्रयशक्ति घट गई हैऔर लोगों के पास पैसा नहीं है।लोग अपने जीवन यापन की सामग्री तक ही सीमित रह गए है।आने वाला समय और भयावह नजर आ रहा है।व्यापारिक संगठनों व्यापारी वर्ग ने सरकार से आग्रह किया हैकि कपड़ा बाजार को संकट से उबारने को लेकर कोई आवश्यक कदम उठाए।

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