देशभर में कपड़े की प्रोसेसिंग इकाइयां जलप्रदूषण की समस्या से त्रस्त

उत्पादन में 50 प्र.श. की कमी
डोम्बिवली में टेक्सटाइल और केमिकल इकाइयों की पाइपलाइन की जा रही हैअलग 
देवचंद छेड़ा
मुंबई। कपड़े की प्रोसेसिंग इकाइयों से निकलते प्रदूषित पानी से नदी-नाला के जल प्रदूषित होने के खिलाफ वनशक्ति एनजीओ द्वारा किए गए आंदोलन के बाद प्रदूषण बोर्ड को सख्त बनना पड़ा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने डोम्बिवली की इकाइयों के खिलाफ 30 करोड़ रु. का पेनाल्टी लगया था, लेकिन उसके खिलाफ उद्योग ने विरोध किया। एनजीटी ने अब एक कमेटी बनाई हैजो सर्वे कर रिपोर्ट देगी और उस रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी पेनाल्टी कितनी रखनी हैउसे निश्चित किया जाएगा।
डोम्बिवली एमआईडीसी में कपड़े की 125 प्रोसेसिंग इकाइयां है और केमिकल इकाइयां 100 से 125 है। दोनों उद्योग के प्रदूषित पानी की निकासी की पाइपलाइन एक ही थी जिसे अब अलग-अलग किया जा रहा है। साथ ही कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और ईटीपी का 50 करोड़ रु. के खर्च से अपग्रेडेशन किया जा रहा है। इसके लिए 70 प्र.श. सब्सिडी सरकार देगी। जबकि 30 प्र.श. का खर्च औद्योगिक इकाइयों को उठाना होगा।
पहले डोम्बिवली एमआईडीसी ने यह परियोजना पूरी करने की सहमति दी थी, लेकिन तलोजा के अनुभव के बाद इनकार कर दिया है। तलोजा में प्रदूषित पानी के शुद्धिकरण का परिणाम बराबर न आने से तलोजा एमआईडीसी के सीईओ और अधिकारियों के खिलाफ केस फाइल किया गया।
डोम्बिवली वेटर एन्वार्यन्मेंट सिस्टम एसो. के अध्यक्ष देशबंधु कागजी ने कहा कि एक वर्ष में यह काम पूरा हो जाएगा।
पाली और जैतपुर की कपड़ा प्रोसेसिंग इकाइयां प्रदूषण बोर्ड को शक्ति के बाद आधी बंद हो गयी है। अहमदाबाद और सूरत में बड़े पैमाने पर प्रोसेस हाउस है। उन सभी को प्रदूषण की समस्या परेशान कर रही है।
सीपीसीबी के अधिकृत आकड़े के अनुसार देश के 351 नदी-नाले प्रदूषित हुए है। सभी राज्यों और केद्रशासित प्रदेशों ने प्रदूषित नदी-नाले के लिए रिवर रिजुवेंशन कमेटी बनाई है। जो विस्टोरेशन के लिए एक्शन प्लान तैयार करेगी। सीपीसीबी और ट्रिब्यूनल द्वारा उसकी और जांच की जाएगी। अब इसकी सुनवाई 29 नवंबर 2019 को होगी।

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