आयातित खाद्यतेलों के दाम मध्य नवंबर तक घटेंगे

आयातित खाद्यतेलों के दाम मध्य नवंबर तक घटेंगे
हमारे संवाददाता
अदानी विलमार के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंगशु मलिक का कहना हैकि आयातित खाद्यतेलों के दाम एक महीने या डेढ़ महीने में नीचे आने की संभावना है। इन तेलों का वैश्विक उत्पादन बढ़ने की वजह से इनके भाव घटेंगे। उन्होंने कहा कि सोयाबीन तेल 724 डॉलर प्रति टन पर आयात हो रहा है, इसमें 50 डॉलर तक की गिरावट आने की उम्मीद है। जबकि, सनफ्लावर ऑयल का दाम 20 डॉलर प्रति टन तक घट सकता हैजो इस समय 765 डॉलर प्रति टन चल रहा है। बता दें कि भारत मलेशिया एवं इंडोनेशिया से पाम ऑयल जबकि अर्ज़ेंटीना एवं ब्राजील से सोयाबीन ऑयल का आयात करता है। सनफ्लावर ऑयल का आयात यूक्रेन से किया जाता है। 
दूसरी ओर, जर्मन पत्रिका ऑयल वर्ल्डा के संपादक थॉमस मिल्के का कहना हैकि वर्ष 2019-20 में ब्राजील में सोयाबीन का उत्पादन 1240 लाख टन रहने की संभावना हैजो पिछले साल 1180 लाख टन था। जबकि, अर्ज़ेंटीना में यह फसल पिछले साल के उत्पादन 560 लाख टन से 20 लाख टन कम होने का अनुमान है। लेकिन कुल मिलाकर वर्ष 2019-20 में दक्षिण अमेरिकी देशों में सोयाबीन का उत्पादन बढ़ेगा। मलिक का कहना हैकि आयातित खाद्यतेलों के दाम में आने वाली गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस साल इंडोनेशिया एवं मलेशिया में पाम ऑयल के दाम बढ़ने से पाम ऑयल के भावों में भी कुछ गिरावट देखने को मिलेगी। पाम ऑयल के दाम मध्यम नवंबर तक 10-20 डॉलर प्रति टन तक गिर सकते है। उन्होंने कहा कि पाम ऑयल का आयात पिछले पांच साल में पांच फीसदी की दर से बढ़ते हुए 120 लाख टन तक पहुंच गया हैजबकि अन्य आयातित तेलों का आयात तीन फीसदी बढ़ते हुए 60 लाख टन पहुंचा है।

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