रुई बाजार पर मंदड़ियों की मजबूत पकड़

रुई बाजार पर मंदड़ियों की मजबूत पकड़
रुई उत्पादन 3.75 लाख गांठ पांच वर्ष के उच्च स्तर पर
इब्राहिम पटेल 
चीन ने कंई सारी चीजों अमेरिका से खरीदना शुरू कर दिया है, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और वित्त मंत्री स्टीवन मुचीन ने इस घटना का स्वागत किया था। उनके सकारात्मक बयान से कमोडिटी बाजार में ऐसी उम्मीदें पैदा हुई हैकि अक्टूबर में मिलने वाली ट्रेड वॉर सुलह बैठक में कुछ तो सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है। वैश्विक फलक पर इस सप्ताह के रुई बाजार के रिपोर्ट में कहा गया हैकि अमेरिकी किसानों ने कपास बोआई क्षेत्र की 11 प्रतिशत भूमि में रूई की कटाई कर डाली है, जो पिछले सप्ताह की तुलना में दो प्रतिशत अधिक थी।
वैश्विक भाव घटने का अन्य कारण भारत में औसत से अधिक प्रोत्साहक मानसून, अधिक बोआई, किसानों की अच्छी देखभाल और यिल्ड (ऊतारा) में रिकॉर्ड वृद्धि के चलते 1 अक्टूबर से शुरू होती 2019-20 की रुई मौसम में फसल, पिछले साल के 312 लाख गांठ (प्रत्येक 170 किलो) से 20 प्रतिशत बढ़कर 375 लाख गांठ, पांच सालों की नई चोटी पर पहुंचेगी। नई मौसम में यदि कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) बाजार में गैर आवश्यक मध्यस्थी नहीं करेंगे तो व्यापक फसल और नीचे भाव, निर्यात को प्रोत्साहित करेंगे। लेकिन सीसीआई के सूत्रों से खबर ऐसी आ रही हैकि भाव अधिकतम गिरते रोकने के लिए 100 लाख गांठ रुई खरीदने की तैयारी कर ली गई है। यह खरीदारी 2018-19 की तुलना में 10 गूना अधिक होगी। 
सितंबर के पहले तीन सप्ताहों में रुई की आवक, पिछले महीने की समान अवधि की तुलना में 21 प्रतिशत बढ़कर 41,800 टन दर्ज हुई थी। नवंबर मध्य से आवक चरमसीमा पर पहुंचेगी, तब भाव प्रति क्विंटल समर्थन भाव रु. 5,550 से भी नीचे चले जाने का ड़र है। ब्राजील और अमेरिका जब एशियाई देशों बांग्लादेश, वियेतनाम को नवंबर-दिसंबर शिपमेंट 70 सेंट प्रति पाउंड सीएंडएफ शर्त पर ऑफर कर रहा है, तब भारत इन देशों को 77 सेंट के भाव पर निर्यात के सौदे ऑफर कर रहा है। 
मुंबई स्थित एक ग्लोबल ट्रेडिंग हाउस के डीलर ने कहा था कि सामान्य रूप से भारतीय निर्यातकों 1 अक्टूबर से पहले औसत 8 लाख गांठ जितने सौदे कर डालते थे, लेकिन इस साल अभी केवल 3 लाख गांठ शिपमेंट के सौदे ही बिठाया है। ऊंचे भाव के कारण भारत की निर्यात महंगी होती है। विश्व के सबसे बड़े रुई उत्पादक देशों में से एक भारत से यदि 2019-20 में निर्यात घटेगी तो अमेरिका और ब्राजील जैसे भारत के प्रमुख प्रतिस्पर्धक, एशियाई देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियेतनाम में अपने कार्गो में बड़ी वृद्धि करने का अवसर छोड़ेगे नहीं। 
समर्थन भाव से यदि सीसीआई अधिकतम खरीदारी करने के लिए ऊतरेगा तो घरेलू बाजार में भाव उच्च स्तर पर टिके रहेंगे, जो निर्यात को सीमित बनाकर वैश्विक बाजार में भाव को ऊपर ले जाने का मार्ग प्रसस्त करेगा। 2019 में विश्व बाजार में अब तक में भाव 18.5 प्रतिशत जितने गिरे है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया पर अक्टूबर 2018 से अगस्त 2019 तक में वायदा के सौदे के सामने डिलीवरी 119 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 398,600 गांठ की हुई थी। पिछले साल समान अवधि में 182,300 लाख गांठ रुई की डिलीवरी हुई थी। मौजूदा मौसम में एमसीएक्स क्लियरिंग कॉर्पोरेशन में ऑल टाइम हाई 2.18 लाख गांठ रुई डिपोजिट किया गया था, पिछले साल 1.81 लाख गांठ डिपोजिट हुई थी।

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