कपास का भाव घटने की संभावना

कपास का भाव घटने की संभावना
नई आवक बढ़ने पर
रमाकांत चौधरी 
नई दिल्ली । देश भर के किसानों ने इस वर्ष कपास की खेती में विशेष दिलचस्पी दिखाई है।बहरहाल विश्व बाजार में कपास की कीमत नरम है।ऐसे में किसानों को कपास की उचित कीमत को लेकर अब न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी को लेकर विशेष रुप से प्रतीक्षा हो रही है।चूंकि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव के चलते विश्व बाजार में कपास की कीमत पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत की गिरावट आ रखी है।हालाकि भारतीय बाजार में कपास कीमत  पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 8 प्रतिशत की मंदी आई है।वहीं इंटरकांटीनेंटल एक्सचेंज पर 30 सितम्बर को कपास 60.82 सेंट प्रति पाøड था।वहीं पिछले वर्ष सितम्बर के अंत में कपास 76.38 सेंट प्रति पाड था।वहीं घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कपास की कीमत 19,930 रुपए प्रति गांठ थी।वहीं पिछले वर्ष एमसीएक्स पर सितम्बर के अंत में कपास की कीमत 21,840 रुनण् प्रति गांठ रही थी।ऐसे कपास विशेषज्ञों की तरफ से कहा जा रहा हैकि विश्व बाजार की तुलना में भारतीय बाजार में कपास की कीमत अपेक्षाकृत ऊंची हैजिससे कपास की निर्यात मांग कम रहेगी।जिससे जिनर्स और कारोबारियों की स्पिनिंग मिलों की मांग को ध्यान में रखकर ही खरीदी करेंगे।ऐसे में किसानों को अपनी कपास उपज की उचित कीमत पाने को लेकर एसएसपी पर खरीदी को लेकर बेसब्री से प्रतीक्षारत रहेंगे।
दरअसल कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) की तरफ से कहा गया हैकि इस बार सीसीआई 12 प्रतिशत से अधिक नमी वाले कपास की खरीदी नहीं करेगी।जिसको लेकर देश के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में सीसीआई की तरफ से नए कपास मौसम में कपास को किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने को लेकर पूरी तरह से सुसज्य है।बहरहाल इस समय नई कपास की आवक जो हो रही हैजिसमें नमी काफी अधिक है।ऐसे में नए कपास की खरीदी फिलहाल नहीं हो पाई है।वैसे तो भारत में कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ऊंचा होने से विदेशी कपास की तुलना में भारतीय कपास की कीमत अधिक है।इसके अतिरिक्त भारत में घरेलू कपड़ा मिलों में कपास की वार्षिक खपत लगभग 325 लाख गांठ हैजिसके चलते कपास की कीमत अपेक्षाकृत ऊंचा है।ऐसे में ताजा हालात को देखते हुए फिलहाल कपास के निर्यात बढने की संभावना कम है।वहीं 2018-19 में पिछले वर्ष की तुलना में कपास निर्यात में कमी आई थी।जिसका मुख्य कारण विश्व बाजार की तुलना में भारतीय बाजार में कपास की कीमत अधिक रही थी।जिसके तहत पिछले वर्ष कपास निर्यात 65 लाख गांठ रहा था।वहीं इस वर्ष कपास का निर्यात घटकर 45 लाख गांठ रहने का अनुमान है।पिछले वर्ष सितम्बर के अंत में बेंचमार्क कपास गुजरात शंकर-6 (29एमएम) की कीमत 46,500 रुपए प्रति गांठ रही थी।

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