सोना व उससे निर्मित आभूषण पर जीएसटी क्रेडिट की समस्या का होगा समाधान

सोना व उससे निर्मित आभूषण पर जीएसटी क्रेडिट की समस्या का होगा समाधान
इन्पुट टैक्स क्रेडिट से पूर्व डिलीवरी की शर्त हटाने पर विचार
रमाकांत चौधरी
नई दिल्ली । सोना व सोने के आभूषण की बिक्री और टैक्स इनवॉइस जेनरेट करने के बावजूद कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पा रही है।जिससे इन कारोबारियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।ऐसे में इस मसले को लेकर सोना व सोने के आभूषण के कारोबारियों की तरफ से अर्से से केद्र सरकार के समक्ष अपनी आवाज बुलंद की जा रही है।जिसको लेकर पिछले दिनों सोना व सोने के आभूषण के कारोबारियों को केद्र सरकार की तरफ से आश्वासन दिया गया हैकि जीएसटी केडिट की समस्या का समाधान किया जाएगा।
दरअसल सोना और सोने के आभूषण के कारोबारियों की दिक्कत यह हैकि आयातक से लेकर होलसेलर,रिटेलर या सोने के आभूषण बनाने वाले के बीच आपसी कारोबारी आदान प्रदान यानि खरीद-बिक्री को लेकर बिल जेनरेट करने के बावजूद इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पा रहा हैऔर इन कारोबारयों से उलटे सोना व सोने के आभूषण की डिलीवरी का संपूर्ण ब्योरा प्रस्तुत करने को कहा जा रहा है।जिससे सोना व सोने के आभूषण के कारोबारियों के समक्ष विकट स्थिति उत्पन्न रखी हैऔर वह अपने कारोबार को खुलकर चलायमान नहीं कर पा रहे है।जिससे सोना व सोने के आभूषण के कारोबारियों के समक्ष भारी कठिनाई उत्पन्न हो रखी है।जिसके लेकर सोना व सोने के आभूषण के कारोबारियों की तरफ से अर्से से केद्र सरकार से गुजारिश की जा रही हैकि इस मसले को लेकर अविलम्ब नीति को स्पष्ट की जाए।जिसको लेकर कहा जा रहा हैकि सोने के आभूषण के कारोबारियों के बीच बिल जेनरेट हो जाए और टैक्स भी सरकार के खाते में चला जाए।बहरहाल डिलीवरी के इंतजार में सोना व सोने के आभूषण के कारोबारियों को इनपुट टेक्स क्रेडिट का भुगतान नहीं किया जाए तो क्या यह व्यवहारिक है।जिसको लेकर जीएसटी नीति के मुख्य आयुक्त योगेद्र गर्ग ने पहली अक्टूबर 2019 को सोना व सोने के आभूषण के व्यवसाईयों को आश्वासन दिया गया हे कि केद्र सरकार की तरफ से इस मसले को लेकर एक लीगत कमेटी के समक्ष रखेगी और आवश्यता पड़ने पर इन नियमों में और स्पष्टता लाई जाएगी।
दिल्ली बुलियन मर्चेन्ट्स एण्ड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री विमल गोयल ने बताया कि सोना व सोने के आभूषण की ऊंची कीमत के चलते कारोबार में कीमतों को लेकर मंदी तेजी,क्षेत्रीय असंतुलन और सुरक्षा को लेकर चिंताओं के चलते कई बार माल विलंब से डिलीवरी किया जाता है।ऐसा कारोबारियों के बीच आपसी सहमति से होता हैऔर यह कारोबार को लेकर एक व्यवहारिक हिस्सा मात्र है।उन्होंने आगे बताया कि सोना व सोने के आभूषण के आयातकों से होलसेलर, सेमीहोलसेलर और रिटेलर तक प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर बिल जेनरेट हो रहा हैऔर बतौर टैक्स भी केद्र सरकार के खाते में जा रहा है।ऐसे में सोना व सोने के आभुषण के कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पा रहा हैजो कि बेहद अचरज पैदा करता है।उन्होंने आगे बताया कि 10 करोड़ रुपए टर्नओवर वाले सोने के आभूषण के व्यापारियों को भी कंपोजिशन स्कीम के दायरे में लाकर इन्हें फायदा मुहैया कराया जाएगा और बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट के आंशिक रुप से एक आधा प्रतिशत टैक्स लिया जाए।ऐसी व्यवस्था होने से उन छोटे कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलने और वर्किंग कैपिटल फंसने से कुछ हद तक निजात मिल सकेगी।यद्यपि सोने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ भी सिर्फ 3 प्रतिशत ही जीएसटी लगता हे।ऐसे में केद्र सरकार की तरफ से कंपोजिशन स्कीम देने को लेकर कतई उत्सािहत नजर नहीं आ रही है।उन्हुने आगे बताया कि इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर सबसे अधिक जॉबवर्क के मामले में दिक्कत होती है।       

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