आर्गेनिक रूई उत्पादन में 56 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी

47 प्रतिशत के साथ भारत अव्वल
हमारे प्रातिनिधि
मुंबई। वैश्विक अर्थव्यवस्था की धीमी गति, भारत में यार्न और टेक्सटाइल उद्योग की रुई बाजार में कम हुई रूचि के चलते कपास किसानों के लिए नई चुनौती खड़ी हुई है। भारतीय किसानों अभी वेईट एंड वॉच की नीति अपनाकर, वैश्विक बाजार में कैसे बदलाव आते हैं, यह नजारा देख रहे हैं। वैश्विक बाजार का आंतरप्रवाह अभी सकारात्मक नहीं है और रुई निर्यात घटने की संभावना बढ़ गई है। वैश्विक बाजार की तुलना में स्थानीय बाजार में भाव अपेक्षाकृत काफी ऊंचे होने से किसानों निकास प्रतिस्पर्धा में खड़े रह सके ऐसा नहीं है। अमेरिकी रुई बाजार थेंक्सगिवींग छुट्टियों में जाने से पहले अमेरिका और चीन के बीच व्यापार बातचीत कैसा स्वरूप लेता है, इसके लिए इंतेजार करना व्यापारियों पसंद करते हैं। 
रुई व्यापार अभी अफवाह खरीदो और सच्चाई बेचो की स्थिति में पहुंच गया है, रूई व्यापारियों मानते हैं कि समयांतर पर भाव नीचे जाने की संभावना अधिक है। दिसंबर की छुट्टियों से पहले ऐसे ट्रेडरों अपने खड़े ओलिए स्केवर-अप करने लगे हैं। आईसीई न्यूयॉर्क वायदा शुक्रवार को घटकर 65.85 सेंट प्रति पाउंड (454 ग्राम) हुआ था। अमेरिका चीन व्यापार बातचीत का जो नतीजा आएगा, वह भी समग्र रूप से देखेंगे तो वैश्विक बाजार में मांग में मामूली हलचल देखी जा रही है। चीन के वाणिज्य मंत्री ने कहा कि चीन के उप-राष्ट्रपति लियू हेई, अमेरिकी मध्यस्थीकार रॉबर्ट लिगेथर्स और अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीवन मुचिन के बीच पहले चरण के कांट्रेक्टों की वार्ता अच्छी तरह से चल रही है। 
भारत में कॉटन और यार्न मिलों ऊंचे भाव के रुई के माल बोझ में फंसी पड़ी हैं, पिछले तीन तिमाहियों से इसकी लाभप्रदता स्वस्थ नहीं रही। सितंबर से अब तक में रूई के भाव 8 प्रतिशत गिरे है, अगर संकर-6 रुई की अप्रैल ऊंचाई प्रति क्विंटल रु. 12,900 को ध्यान में लेते हैं तो यह 16 प्रतिशत गिरा है। रुई के भाव की अफरातफरी और कम हुई यार्न, कपड़े की मांग को देखते हुए 2019-20 की दूसरी तिमाही में उद्योग की कमर टूट गई है। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने साल-दर-साल उत्पादन वृद्धि का अनुमान 13.6 प्रतिशत रखा है। अक्टूबर 2019 से शुरू हुई वर्तमान रूई मौसम में भाव नीचे रहने से उद्योग के कच्चे माल में सख्ती रहने की संभावना देखी जा रही है, इसे देखते हुए आने वाली तिमाही में लाभप्रदता बढ़ने की संभावना भी बढ़ी है। अमेरिका चीन के बीच के ट्रेड वॉर की वजह से वहां की यार्न मांग कमजोर हुई है, दूसरी तरफ पाकिस्तान और वियतनाम की रूई आयात, चीन ने नि:शुल्क कर डाली है। इस दौरान, भारतीय कपड़ा मिलों ने विएतनाम, थाइलैंड और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में से सस्ते यार्न आयात शुरू करने से, स्थानीय बाजार में मांग विपरीत स्थिति में पहुंच गई है। इस तरह स्थानीय बाजार में यार्न का मालबोझ बढ़ा है, जो भाव को दबाकर रखता है। यह भी संभव है कि रुई के भाव घटेंगे तो आने वाली तिमाही में स्पिनर्स के मुनाफा में वृद्धि होगी। सीसीआई ने अब तक मं् 4 लाख क्विंटल रुई की खरीददारी की है। 

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