जूट की बोरियों में अनाज व चीनी की पैकेजिंग की अनिवार्यता

हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । मोदी सरकार की तरफ से 27 नवम्बर 2019 को जूट उद्योग को लेकर बड़ा कदम उठाया है।जिसको लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर (सीसीईए) की बैठक में मोदी सरकार की तरफ से अनाज और चीनी की पैकेजिंग को लेकर जूट सामग्री को अनिवार्य कर दिया है।
दरअसल मोदी सरकार की तरफ से जूट पैकेजिंग मैटेरियल (जेपीएम) एक्ट 1987 के तहत जूट पैकेजिंग को बरकरार रखा है।जिसको लेकर मोदी सरकार की तरफ से सभी अनाजों की पैकेजिंग में 100 प्रतिशत जूट की बोरियों का इस्तेमाल अनिवार्य किया है।इसके अतिरिक्त चीनी की पैकेजिंग में 20 प्रतिशत जूट बैग्स अनिवार्य होगा।ऐसे में मोदी सरकार के इस फैसले से जूट क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 3.7 लाख कामगारों और लाखों किसानों को फायदा होगा।इस फैसले से विशेष रुप से पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम, आन्ध्र प्रदेश, मेद्याालय और त्रिपुरा में रहने वाले किसानों को मदद मिलेगी।उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार की तरफ से जूट उद्योग को बढावा देने को लेकर काफी प्रयास किए हø।कच्चे जूट की गुणवत्ता  और उत्पादकता बढाने और जूट उत्पादें की मांग बने रहने को लेकर मोदी सरकार की तरफ से कदम उठाए गए है।उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार की तरफ से हाल ही में प्लास्टिक को चरणबद्व तरीके से बंद करने का फैसला किया है।जिससे जूट की मांग बढने में मदद मिलेगी।चूंकि जूट उद्योग विशेष रुप से सरकारी क्षेत्र पर निर्भर है।अनाजों की पैकेजिंग को लेकर प्रत्येक वर्ष 7500 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के जूट बोरी की खरीदारी होती है।जिससे जूट उद्योग पर निर्भर कामगारों और किसानों को अपनी आजीविका चलने में मदद मिलती है।

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