ब्रांडेड परिधान निर्माताओं का मुनाफा बढ़ा

ब्रांडेड परिधान निर्माताओं का मुनाफा बढ़ा
कच्चे माल के भाव घटने, बेहतर कास्ट मैनेजमेन्ट से मार्जिन बढ़ी
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर होने के बावजूद ब्रांडेड परिधान निर्माताओं ने सितम्बर तिमाही में ज्यादा मुनाफा अर्जित किया। कच्चे माल का भाव घटने और अलाभकर पाइंट आफ सेल (पीओएस) बंद करने सहित बेहतर कास्ट मैनेजमेंट के कारण मुनाफे में वृद्धि हुई।
केवल किरण क्लोदिंग (केकेसीएल) की आय में 10% की वृद्धि हुई, जो ब्रांडेड परिधान की मांग में सुधार होने का सकारात्मक संकेत है। गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में उसके प्रमुख `किलर' जीन्स ब्रांड की बिक्री में 24.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उसके अन्य ब्रांड की बिक्री में 11.4% की वृद्धि हुई। तिमाही के दौरान इन दोनों ब्रांड का कुल योगदान लगभग 70% रहा।
कई ब्रांडेड परिधान खिलाड़ियों ने दशहरा एवं दिवाली से पहले ही डिस्काउंट और अन्य प्रमोशनल ऑफर देना शुरू कर दिया।
इससे ग्राहकों को उनकी खरीदी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला। सीजनल डिस्काउंट आफरों को भी सामान्य एक महीने की अवधि से आगे बढ़ाया गया।
इस अवधि में एस.पी. एपरल की बिक्री 133% बढ़कर 34.8 करोड़ रु. हुई। वेल्स्पन इंडिया की बिक्री 73% बढ़कर 198.5 करोड़ रु. हुई। किटेक्स गार्म़ेंट्स का मुनाफा 64.4% बढ़कर 36.8 करोड़ रु. जबकि रेमंड्स का 33.5% बढ़कर 84 करोड़ रु. हुआ। सियाराम सिल्क के मुनाफे में भी वृद्धि हुई।
एक विश्लेषक ने कहा कि मुख्यत: कच्चे माल का भाव घटने से ब्रांडेड परिधान निर्माताओं की बिक्री एवं शुद्ध लाभ में वृद्धि हुई। रुई, यार्न, आदि से भी कच्चे माल के भाव में गिरावट आयी।
निर्यात में गिरावट के साथ सितम्बर तिमाही में काटन यार्न और मैनमेड फाइबर के भाव में गिरावट आयी। कम मांग एवं स्पर्धा बढ़ने से काटन यार्न के निर्यात में निरंतर गिरावट दिखायी दे रही है। जुलाई के दौरान महीना दर महीना आधार पर निर्यात में 40% की गिरावट आयी। मुख्यत: चीन की मांग में वर्ष दर वर्ष आधार पर 80% की गिरावट आने से यह गिरावट आयी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर बनी हुई है। परिधान निर्माताओं ने लाभप्रद उपक्रमों पर फोकस के साथ उनके कारोबारों को कंसोलिडेट किया है।

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