जीरा में मजबूती, कालीमिर्च नरम

जीरा में मजबूती, कालीमिर्च नरम
हमारे संवाददाता 
व्यापारिक क्षेत्रों से  मिली  खबरों  और  बाजार के जायजे के अनुसार गत् हप्ते सभी तरह की खाद्यवस्तुओं में कमजोर ग्राहकी समर्थन के बावजूद तेजी का माहौल रहा।  देश की 80 प्रतिशत जनता गरीब और मध्यमवर्गी है जिनके पास  इस  महंगाई से घरों का बजट बिगड़ चुका है और सभी खाद्यवस्तुओं की खरीदी चुजी  बनकर  करते है। महंगाई के कारण उनके द्वारा अभी इतनी खपत नहीं है कि  बाजार में तेल-तिलहन, किराना वस्तु, दाल-दलहन, सब्जियां सभी में उपलब्धता कम हो जाए। बाजार में तेल-तिलहन, किराना वस्तु, दाल-दलहन, सब्जियां महंगाई की आग लगी हुई है। चहुं ओर महंगाई के इस आलम में सब्जियों के दलालों ने भी बाजी मारकर  सब्जियों को महंगा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।  धनियां पत्ती 80 रु. किलो एक आश्चर्य है। आलु-प्याज 65-70 रु. किलो। अन्य सब्जियों के भाव थोक मंडी में तो 30-40 रु. किलो पर बताये जा रहे है मगर खेरची भाव 40-60 रु. किलो है। व्यापार का यह प्रभाव सभी क्षेत्रों में बढ़ रही महंगाई का प्रभाव खेरची वाले बताते है। उनके बच्चों की फीस निकालना और मोटर-सायकल का खर्चा निकालना बताते है।
महंगाई का काला बाजार। मसाला में जीरा, कालीमिर्च, हल्दी और अन्य का उत्पादन आंकड़ा आया नहीं और बाजार में चर्चा से महोल गर्म हो रहा है कि इनके कम पैदावार के अनुमान है। इससे इनमें तेजी की राह बनाई  जा रही है बताया जा रहा है। 
कालीमिर्च और गोला  उच्च भाव पर ग्राहकी नहीं होने से नरम रहा।  काला सोना बनी कालीमिर्च का भाव 340 से 380 रु. तक होना बताया गया है। उत्पादक प्रदेश कर्नाटक में कालीमिर्च की अच्छी आवकें रहने और   निर्यात मांग नहीं रहने से स्टाकिस्टों की दिलचस्पी कम होना बताई जा रही होने से हाजिर भाव में तेजी नही हुई है। गोला का भाव 140 से 160 रु. रहा। हालांकि कालीमिर्च और गोला थोक में भाव कम हुए है मगर खेरची भाव विगत् हफ्ते यथावत् रहे है। इस वर्ष नारियल के भाव 1800 रु. तक अप्रत्याशित हुए थे। भारी स्टॉक बढ़ जाने और अधिक उत्पादन तथा आवक बढ़ने से गत् हप्ते तक उरते हुऐ भाव 250 भरती का नारियल भाव 1250 रु. तक होना बताया गया। उत्पादक प्रदेशों में जीरे पर कम बोआई से कम उत्पादन की हवा चर्चा में होने से जीरे पर भी स्टाकिस्टों की भारी दिलचस्पी बताई जा रही है। हालांकि पिछले उत्पादन और निर्यात में प्रभावित हुए जीरे के स्टॉक और भारी ऊंचे भाव को देखते हुए जीरे के भाव में कमी आना चाहिये थी सो नहीं हुई है। अर्थात आगे जीरे का भविष्य अच्छा है, इससे जीरे के भाव मजबूत रहने की धारणा  है। हालांकि दूसरी ओर कृषि जगत की धारणा है कि  अच्छी वर्षा से  जीरा उत्पादक प्रदेशों में इस वर्ष जीरा की बोआई और उत्पादन में बेहतरता का अंदाज लगाया जा रहा है। हालांकि छोटे व्यापारी यह भी संभावना बता रहे है कि जैसा कि देश में उत्पादन से उलट व्यवहार चल रहा है तो जीरे पर अभी प्रतिक्रिया नहीं दी जा सकती है। भाव राजस्थान जीरा 18500 से 19000 रु. तक और ऊंझा जीरा मध्यम से बेस्ट का भाव 20000 से 21000 रु. तक बताया गया।  खोपरा बुरा में फिलहाल मांग सुस्त रहने से स्थिरता रही।  व्हील बुरा 3450 रु. तक बताया गया।  साबुदाना की बेस्ट क्वालिटी में मांग अच्छी है जबकि कमजोर दाने वाले माल का उठाव कमजोर है। साबुदाने पर  स्टॉक बढ़ जाने से साबुदाना उत्पादक केंद्रों पर मंदी में बताया जा रहा होने से स्थानीय में भाव तेजी की स्थिति में  नहीं रहे। लूज साबुदाना का भाव 5300 से 6550 रु. तक था। वरलक्ष्मी का भाव लूज में 6600 रु. और पैकिंग में 7200 रु. बताया गया है। साबुदाना पर फरियाल खीचड़ी वालों ने कभी भाव कम नहीं किये। 5 रु. से 205 रु. की प्लेट हो गई है। इसी प्रकार अन्य खाद्यवस्तुओं पर भी दाम कम होते है तो खेरची बाजार में कभी भी भाव में कमी नहीं आती है। व्यापारी परिस्थिति का ही रोना रोते आए है।

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