खाद्यतेलों में तेजी पामतेल में आग झरती तेजी

खाद्यतेलों में तेजी पामतेल में आग झरती तेजी
तेल-तिलहनों में भारी मजबूती रहने की धारणा
हमारे संवाददाता
इंदौर । मलेशिया वायदा बाजार में गत् हप्ते मंगलवार और बुधवार को केएलसीआई में हुई भारी तेजी से देशीय पामतेल भाव भी भारी ऊंचे हो गये। इससे सोयातेल भी ऊंचे भाव होकर स्थिर रहा। हाजिर तेलों में कामकाज सीमित मगर विदेशी चालों से तेजी बनी। ऊंचे भाव पर खाद्यतेलों में उपभोक्ता मांग गिरती जा रही है।  मलेशियन पामतेल केएलसीआई बुधवार को तेजी में 6 पाइंट उपर खुली थी और शिकागो सोयातेल वायदा बाजार भी तेजी में  था इससे पामतेल मुंबई 745 और इंदौर पाम तेल 790 रु. होना बताया जा रहा था। जबकि सोयातेल तेजी में 805 रु. उपर होकर स्थिर रहा। विगत् हप्ते से विदेशी वायदा बाजारों में हुई भारी तेजी के असर से खाद्यतेल भावों में आग सी लग गई है। पिछले पखवाड़े से कोई 30-35 प्रतिशत तक भावों में उछाल आया है। हालांकि देश के अन्य खाद्यतेल मूंगफली 1030 रु. और सरसों तेल 860 रु. तथा कपास्या तेल 760 रु. मामूली हल्की घटत-बढ़त में थे। इससे सोयाबीन मजबूत होकर 3950- 4000 रु. तक थोक मंडियों में भाव हो जाना बताया जा रहा था। म.प्र. में  लगभग एक लॉख और इंदौर में लगभग ढाई हजार बोरी की औसत दैनिक आवक  के बीच  इंदौर सोयातेल तेजी की राह पर चल पड़ा है। पिछले दो-तीन वर्ष़ों में मूंगफली का उत्पादन कमजोर नहीं था मगर तेल भाव 960 से 1030-1050 रु. तक तेज हो चुके है। सट्टेबाजी  का अधिक भाव  चलता रहा है।  सरकार की नरमी  इस विषय में क्यों है? तेल-तिलहनों की हो या अन्य खाद्यान्नों की भारत में अनुकूल स्थितियों के बावजूद सटोरियों के लिये तेजी का  कोई  बहाना मिलना-समर्थन मिलना भारतीय खाद्यान्नों में आग का तूफान आना अब आम बात हो गई लगता है। सोयाबीन इस वर्ष  4000 रु. तक भारी अच्छे भाव पर आ गया है मगर अभी 50 प्रतिशत माल ही उत्पादन का मंडी में आया है। अर्थात किसानों की भी लालची प्रवृत्ति हो गई है। अत: तेल व्यापारियों की नजरों में खाद्यतेलों में मजबूती ही रहने की धारणा है। बहरहाल गत् हप्ते बुधवार को इंदौर मूंगफली तेल 1020-1030 रु., मुंबई मूंगफली तेल 1020 रु., गुजरात लूज  970-975 रु. और राजकोट तेलिया 1560-1565   रु. के भाव रहे। इंदौर सोया रिफाइंड 800-805 रु., इंदौर साल्वेंट 760  से 765 रु., मुबंई सोया रिफाइंड 783-785 रु., मुंबई पाम 745 रु. और इंदौर पामतेल  के भाव 790 रु. रहे।  इंदौर कपास्या तेल 760 रु. के भाव रहे।      
जनता की आर्थिक स्थिति के साथ ही देश के महंगाई हालात बिगड़ते जा रहे है। कीचन मसाले, डाय फूट्स, प्रोसेस्ड खाद्यतेल और खलियां, निर्यात से देश में ही आपूर्ति को कठिन बनाया गया और वस्तुओं के भाव कई भारी प्रतिशत बढ़े। इनमें सबसे अधिक निर्यात प्रतिशत कीचन सामग्रियों का हुआ है जिस पर अधिक हो हल्ला देश में होता जा रहा है। पूर्व में इंदिरा और अटल सरकार तक ने देश में जनता का ख्याल, मांग और आपूर्ति तथा महंगाई को कंट्रोल करते हुए एक स्तर तक वस्तुओं का निर्यात किया गया है। त्वरित विश्लेषकों के अनुसार मनमोहन सरकार ने देश में आपूर्ति की  स्थिति को कठिन बनाते हुए महंगाई का निमार्ण किया है जो बदस्तूर जारी है।

© 2019 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer