मांग कमजोर पड़ते ही टूटे मोठ के दाम

मांग कमजोर पड़ते ही टूटे मोठ के दाम
हमारे संवाददाता
नोखा। दिवाली पर्व की मांग पूरी होने एवं मौसम खुलने से मोठ की बढ़ी आवक से इसके दाम दस दिन में एक हजार रुपए प्रति क्विंटल तक लुढ़क गए हैं। मोठ में अब अगली मांग 15 जनवरी मकर संक्रांति के बाद आएगी, तब इसके दाम में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि, इस मांग से पहले मोठ के भाव आने वाले दिनों में कुछ और नरम पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 
कारोबारियों का कहना है कि अब सर्दी का मौसम शुरू होने से हरी सब्जियों की आवक जोरों पर हैं एवं सब्जियों के दाम नीचे आ रहे हैं जिससे मोठ हो या अन्य दलहन उनकी खपत कम हो जाती है। दलहन की बड़ी खपत सब्जियों के महंगी होने या आवक कमजोर होने पर ही बढ़ती है। दूसरी ओर, मोठ के दाम मूंग के भावों की चाल पर निर्भर करते हैं एवं मूंग के दाम टूट रहे होते है तो मोठ के भाव तेजी से कमजोर पड़ते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मूंग के भाव और नीचे आते हैं तो मोठ में भी गिरावट तय है। 
कारोबारियों के मुताबिक देश की सबसे बड़ी मोठ मंडी नोखा (राजस्थान) में नए मोठ की दैनिक आवक छह हजार बोरी है जबकि, समूचे राजस्थान की विभिन्न मंडियों में इसकी दैनिक आवक 15 हजार बोरी के करीब है। पिछले साल समान समय में भी यह आवक समान थी। लेकिन इस साल लगातार बारिश होने एवं खराब मौसम से इसकी आवक में देरी हुई है। अब आवक सुधरने एवं मांग कमजोर पड़ने से अच्छी क्वालिटी का मोठ जो दस दिन पहले 6000 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा था, अब 5200 रुपए प्रति क्विंटल आ गया है। जबकि, औसत क्वालिटी का मोठ 5000 रुपए एवं दागी मोठ 4700 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। नोखा में मोठ मोगर खडा 8000 रुपए और गोल 7000 रुपए प्रति क्विंटल बोला जा रहा है। 
कारोबारी अनुमान के मुताबिक इस साल राजस्थान में मोठ का उत्पादन 25-30 लाख बोरी होने का अनुमान है। देश में राजस्थान और गुजरात दो राज्य ही मोठ उत्पादक राज्य हैं। कारोबारी अनुमान के मुताबिक इन राज्यों में खरीफ फसल वर्ष 2018-19 में मोठ का उत्पादन 14-15 लाख बोरी हुआ था। मोठ की सालाना खपत 25-28 लाख बोरी के करीब रहती है। 
उत्पादन की बात की जाए तो राजस्थान सरकार के मुताबिक फसल वर्ष 2019-20 में मोठ की बोआई 1773568 हैक्टेयर में हुई और उत्पादन 1201230 टन रहने का अनुमान है। प्रति हैक्टेयर यील्ड 464 किलोग्राम रहने की संभावना है। जबकि, फसल वर्ष 2018-19 में मोठ की बोआई 978176 हैक्टेयर में हुई और उत्पादन 222584 टन रहा। प्रति हैक्टेयर यील्ड 228 किलोग्राम रही। जबकि, वर्ष 2017-18 में मोठ की बोआई 1043484 हैक्टेयर में हुई एवं उत्पादन 323338 टन था एवं प्रति हैक्टेयर यील्ड 310 किलोग्राम रही। राजस्थान में वर्ष 2016-17 में मोठ का उत्पादन 434749 टन रहा एवं बोआई 1387690 हैक्टेयर में हुई। वर्ष 2016-17 में मोठ की यील्ड प्रति हैक्टेयर 313 किलोग्राम थी। 
गुजरात में मोठ उत्पादन की बात की जाए तो फसल वर्ष 2019-20 में मोठ की बोआई 11290 हैक्टेयर में हुई और उत्पादन 6370 टन रहने का अनुमान है। प्रति हैक्टेयर यील्ड 564.36 किलोग्राम रहने के आसार हैं। जबकि, फसल वर्ष 2018-19 में मोठ की बोआई 12130 हैक्टेयर में हुई और उत्पादन केवल 990 टन रहा। प्रति हैक्टेयर यील्ड 82 किलोग्राम रही। जबकि, वर्ष 2017-18 में मोठ की बोआई 27 हजार हैक्टेयर में हुई एवं उत्पादन 18 हजार टन था एवं प्रति हैक्टेयर यील्ड 652 किलोग्राम रही। गुजरात में वर्ष 2016-17 में मोठ का उत्पादन 9510 टन रहा एवं बोआई 20455 हैक्टेयर में हुई। वर्ष 2016-17 में मोठ की यील्ड प्रति हैक्टेयर 464.92 किलोग्राम थी।

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