जीएसटी में ई-इनवॉयसिंग से खुलेंगे एमएसएमई सेक्टर के लिए कर्ज के दरवाजे

जीएसटी में ई-इनवॉयसिंग से खुलेंगे एमएसएमई सेक्टर के लिए कर्ज के दरवाजे
कारोबारियों की बढ़ेगी सहूलियत, रिटर्न भरने में होगी आसानी
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । अगले वर्ष की शुरुआत से जीएसटी में लागू हो रहे ई-इनवॉयसिंग सिस्टम से एमएसएमई क्षेत्र के लिए बैंकों से कर्ज लेना और आसान हो जाएगा।यह सिस्टम कर्ज देने के लिए बैंकों की आवश्यक कागजी प्रक्रिया को सीमित करेगा।बैंक ई-इनवॉयसिंग के जरिए लघु और मझौली इकइयों की रेटाग कर सकेंगे।ऐसे में सभी तरह की इकाइयों के लिए अप्रैल 2020 से ई-इनवॉयसिंग की व्यवस् लागू हो जाएगी।
दरअसल छह महीने के तैयारी के बाद आखिरकार केद्र सरकार की तरफ से बिजनेस टू बिजनेस इनवॉयसिंग के लिए इस सिस्टम को लागू कर रही है।जिसक zतहत 500 करोड़ रुपए और इससे अधिक का वार्षिक कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए पहली जनवरी 2020 से ई-इनवॉयसिंग की व्यवस्था लागू करने जा रही है।यद्यपि अभी यह स्वेच्छा से और प्रायोगिक आधार पर होगा।जिसके तहत सौ करोड़ रुपए या इससे अधिक कारोबार वाली इकाइयां पहली जनवरी 2020 से ई-इनवॉयसिंग कर पाएंगी।वहीं अप्रैल 2020 से सभी कंपनियों के लिए लागू होने के बावजूद सौ करोड़ रुपए से कम टर्नओवर वाली इकाइयों के लिए ऐसा करना स्वैच्छिक चेगा।जिसको लेकर जीएसटी काउंसिल के अधिकारियों की तरफ से कहा गया है कि ई-इनवॉयसिंग सिस्टम लागू करने के पीछे केद्र सरकार की मंशा जीएसटी करदाताओं की सहूलियतों में इजाफा करना और जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की व्यवस्था को और आसान बनाना है।इससे करदाताओं को रिटर्न भरने में सुविधा रहेगी क्योंकि उन्हें रिटर्न तैयार अव्यवस्था में मिलेगा।इससे समाधान संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी।ई-इनवॉयस के जरिए केद्र सरकार की तरफ से टेक्नोलॉजी की मदद से ईज ऑफ लिविंग यानि जीवन की सुगमता और बिजनेस की भावना को मजबूती देना चाहती है।ऐसे में कारोबारियों के लिहाज से इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा क इस सिस्टम में इनवॉयल एक स्टøडर्ड फॉर्मेट में उपलब्ध होगा।जिसे किसी भी सिस्टम पर पढा जा सकेगा और सेन्ट्रल सिस्टम पर इसकी रिपोर्टिंग भी संभव हो सकेगी।हालांकि अभी तक जीएसटी में इनवॉयसिंग को लेकर यही सबसे बड़ी दिक्कत थी कि अलग अलग फॉन्ट और सिस्टम में तैयार होने वाले इनवॉयस सिर्फ उसी प्रकार के सिस्टम पर खोले जा सकते थे।

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