मार्च तक रुई के भाव में 10 प्रतिशत वृद्धि की संभावना

मार्च तक रुई के भाव में 10 प्रतिशत वृद्धि की संभावना
चीन, बांग्लादेश, वियतनाम से आयात मांग के कारण एक ही महीने में भाव पांच प्रतिशत बढ़ा
इब्राहिम पटेल
सट्टारूपी खरीदारी के चलते रुई में तेजी की शुरुआत हुई है, आईसीई न्यूयॉर्क वायदा में 8 अप्रैल को 79.31 सेंट प्रति पाउंड की टोच बनाने के पश्चात 3 सितंबर को 56.59 सेंट का तल बनाया था। विश्लेषक अब देरी से कहते हø कि बाजार में अल्पावधि की तेजी का अंडरटोन सर्जित हुआ है। बेशक, बाजार में अब बिकवाली भी रुक गई है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव का समर्थन मिलेगा तो मार्च तक भारत में 10 प्रतिशत की वृद्धि संभावित है। चीन, बांग्लादेश, वियतनाम से आयात मांग के आसरे पिछले एक ही महीने में भाव पांच प्रतिशत बढ़ा है। 
अप्रैल से अक्टूबर के दौरान वैश्विक भाव की तुलना में भारत में भाव अपेक्षाकृत ऊंचे रहने से विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान में निर्यात में भारी गिरावट दर्ज हुई थी। क्रिसिल के एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी घटनाओं के कारण देश में भारी मालबोझ सर्जित हुआ था। एक ओर निर्यात में गिरावट और वर्तमान वर्ष में भारतीय उपभोक्ता मांग (कुल रुई उत्पादन का 70 प्रतिशत) केवल 3 से 4 प्रतिशत बढ़ने की संभावना को देखते हुए आपूर्ति अधिक रहने का दबाव जारी रहेगा। चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की वजह से चीन में कॉटन यार्न की मांग में व्यापक कमी हुई, दूसरी ओर भारत सरकार ने पाकिस्तान के लिए निर्यात के द्वार बंद कर दिए। इस साल अब तक में चीन और पाकिस्तान की आयात में 50 से 60 प्रतिशत की गिरावट आई है। 
अमेरिका चीन के बीच पहले चरण के व्यापार कांट्रैक्ट पर 15 जनवरी को हस्ताक्षर होने से पहले, पिछले एक महीने से चीन और बांग्लादेश में से रुई आयात के लिए इंक्वायरियां बढ़ने लगी है। जनवरी, फरवरी डिलिवरी के कुछ रुई निर्यात कांट्रैक्ट पर हस्ताक्षर भी हो चुके हø। अब तक में भारत ने 15 लाख गांठ (प्रत्येक 170 किलो) निर्यात हो चुकी है, दो से तीन लाख गांठ के कांट्रैक्ट्स हाथ में है। उद्योग का मानना है कि सितंबर 2020 में खत्म होती वर्तमान रुई मौसम में भारत 50 से 60 लाख गांठ रुई की निर्यात करने के लक्ष्य को पूरा करेगा, जो पिछले साल 47 लाख गांठ का था। हाल में आईसीएस-106, 32 एमएम क्वालिटी रुई का भाव प्रति कंडी (355.62 किलो) का भाव रु. 43,000 बोला जा रहा है। आईसीई न्यूयॉर्क मार्च वायदा प्रति पाउंड (454 ग्राम) 69.73 सेंट हुआ है। 
पिछले साल 4.4 प्रतिशत की भाव गिरावट के साथ, लगातार दूसरे साल रुई के भाव में सालाना गिरावट दर्ज हुई थी। फ्रंट मंथ नायमेक्स वायदा दिसंबर में 7.2 प्रतिशत बढ़ा था। चीन ने ट्रेड वॉर की शुरूआत से पहले ही ब्राजील से रुई खरीदारी के इरादे व्यक्त किए थे, नतीजतन, ब्राजील की सालाना रुई निर्यात रिकॉर्ड 42 प्रतिशत बढ़ी थी। ट्रेड वॉर के अलावा भी ब्राजील करेंसी रिल, डॉलर के मुकाबले 9 प्रतिशत कमजोर हुई होने से ब्राजील प्रतिस्पर्धी भाव ऑफर करने में सफल हुआ था। 
अमेरिकी कृषि मंत्रालय ने इंटरनेशनल कॉटन आउटलूक रिपोर्ट में 2019-20 का वैश्विक रुई उत्पादन का अनुमान, पिछले साल से 58 लाख गांठ या पांच प्रतिशत अधिक 1248 लाख गांठ रहने का है। अक्टूबर में ब्राजील, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में उत्पादन कमी के अनुमान जारी किए गए थे, वह अब भारत और अमेरिका में रुई की ऊपज (यिल्ड) अधिक आने से ऑफसेट हो चुकी है। यूएसडीए ने भारत के 2019-20 का रुई फसल के नवीनतम अनुमान, पिछले साल के 312 लाख भारतीय गांठ से 15 प्रतिशत बढ़कर दूसरे नंबर के रिकॉर्ड 390 लाख गांठ (170 किलो) रखा है। भारत सरकार का दूसरा एडवांस रुई उतारा अनुमान 322.7 लाख गांठ रखा गया है।

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