लालमिर्च में तेजी, भाव घटना अगले महीने संभव

लालमिर्च में तेजी, भाव घटना अगले महीने संभव
कमल शर्मा 
गुंतूर। आंध्रप्रदेश की मंडी गुंतूर में नई लालमिर्च के दाम नीचे आने का नाम नहीं ले रहे हø। तेजा लालमिर्च 190-210 रुपए प्रति किलोग्राम जबकि सीड वेरायटी लालमिर्च 180 रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर बिक रही है। जबकि, पिछले साल समान समय में यह भाव ढाई गुना कम था। देश की सभी हाजिर लालमिर्च मंडियों में इन दिनों जो आवक हो रही है वह मांग की तुलना में काफी कम है जिसकी वजह से इसके दाम नीचे आने का नाम नहीं ले रहे हø। 
कारोबारियों का कहना है कि भारतीय लालमिर्च में चीन की बीते सीजन वर्ष 2019 में जबरदस्त खरीद रही जबकि अब बांग्लादेश एवं श्रीलंका की खरीद आक्रामक है। आम तौर पर जनवरी महीने की शुरुआत में लालमिर्च के दाम नई आवक के साथ घटने लग जाते हø लेकिन यह पहला ऐसा साल है जब आवक को नजरअंदाज कर भाव बढ़ रहे हø। आंध्रप्रदेश एवं तेलंगाना में पिछले सप्ताह हुई बारिश से आवक भी प्रभावित हुई है एवं लालमिर्च की आवक का दबाव अब फरवरी में होगा। ऐसे में फरवरी महीने में लालमिर्च के दाम जरूर नीचे आ सकते हø लेकिन ये भाव बुरी तरह टूटेंगे नहीं। 
लालमिर्च कारोबारी अशोक दत्तानी का कहना है कि पिछले सीजन में लालमिर्च का कैरी फारवर्ड स्टॉक 40-45 लाख बोरी (प्रति बोरी 40 किलोग्राम) था लेकिन इस साल कोल्ड स्टोरेज खाली पड़े हैं। हालांकि, देश भर में लाल मिर्च की पैदावार पिछले साल के समान ही होगी लेकिन पिछले साल पुराना स्टॉक था जो इस साल नहीं है। ऐसे में 40-45 लाख बोरी की कम उपलब्धता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यही वजह है लालमिर्च के दाम सुर्ख हो रहे हø। मकर संक्रांति के बाद गुंतूर बाजार में लालमिर्च की दैनिक आवक 30-40 हजार बोरी होगी एवं अच्छी क्वालिटी की मिर्च आने की उम्मीद है। अभी जो मिर्च आ रही है उसमें हल्की क्वालिटी यानी फटकी अधिक है। वे कहते हø कि फरवरी-मार्च में लालमिर्च सीड वेरायटी के दाम भी गिरकर 100-120 रुपए प्रति किलोग्राम तक आ सकते हैं क्योंकि तब बाजार में सप्लाई का दबाव रहेगा। 
दत्तानी कहते हैं कि आंध्रप्रदेश एवं तेलंगाना में इस साल लालमिर्च की पैदावार 2-2.25 करोड़ बोरी रहने की संभावना है जबकि कर्नाटक में 60-65 लाख बोरी, मध्यप्रदेश में 8-10 लाख बोरी की उपज रहेगी। इस तरह कुल उत्पादन देश भर का 3.25-3.50 करोड़ बोरी (प्रति बोरी 40 किलोग्राम) के आसपास रह सकता है जो पिछले साल के समान ही होगा। लेकिन कैरी ओवर स्टॉक नगण्य होने से बाजार में जो आवक होगी, वह स्टॉक में नहीं जा पाएगी क्योंकि घरेलू पाइप लाइन खाली है। 
कुछ कारोबारी मानते हø कि चालू सीजन 2019-20 (जुलाई-जून) में लालमिर्च का उत्पादन 15% बढ़ने का अनुमान है। सरकार ने वर्ष 2018-19 में लालमिर्च का उत्पादन अनुमान 17 लाख टन आंका था जबकि कारोबारी अनुमान 13 लाख टन था। बता दें कि आंध्रप्रदेश देश में पैदा होने वाली कुल लालमिर्च में लगभग 45% योगदान देता है। इसके बाद बड़े उत्पादक राज्यों में तेलंगाना, कर्नाटक, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र का नाम आता है।

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