कृषि विकास दर में सुधार की उम्मीद

कृषि विकास दर में सुधार की उम्मीद
बारिश से खड़ी रबी फसलों को लाभ
रमाकांत चौधरी 
नई दिल्ली । चालू शीतकालीन मौसम की बारिश से रबी फसलों के लिए रामवाण सिद्व हुआ है।ऐसे में शीतकालीन बारिश से खेतों में खड़ी रबी फसलों पर एक तरह से सोना बरस रही है।जिससे खेतों में नमी बढ गई है और किसानों को रबी फसलों की लागत घटेगी।जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हø।ऐसे में रबी फसलों की पैदावार में व्यापक बढोतरी होगी।जिससे कृषि क्षेत्र की विकास दर अगले वित्त वर्ष में सुधरने की उम्मीद बढ गई है।
दरअसल चालू शीतकालीन मौसम के तहत अब तक दो चरणों में अच्छी बारिश हो गइढ है।जिससे  खेतों की मिट्टी में पर्याप्त बन रखी है।जिससे किसानों ने इस बार रबी फसलों की बोआई अधिकाधिक क्षेत्रों में की है।जिससे चालू रबी फसल मौसम के तहत इस बार रबी फसलों की बोआई रकबा में रिकॉर्ड वृद्वि दर्ज की गई है।जिससे खाद्यान्न जिंसों की पैदावार में व्यापक रुप से बढोतरी होगी।जिससे स्वभाविक है कि कृषि क्षेत्र की विकास दर अगले वित्त वर्ष में सुधार की ओर अग्रसर रहेगी।इसी बीच चालू रबी फसल मौसम के तहत रबी फसलों की बोआई का रकबा छह करोड़ हेकृटेयर को पार कर चुका है जो कि पिछले वर्ष अब तक 5.6 करोड़ हेक्टेयर था।इसमें अभी और वृद्वि होगी।जिसके तहत गेहूं का बोआई रकबा 3.16 करोड़ हेक्टेयर हो चुका है जोकि पिछले वर्ष सिर्फ 2.86 करोड़ हेक्टेयर था।वहीं अगैती गनyिंा और आलू से खाली होने वाले खेतों में पिछैती गेहूं की बोआई अभी भी कायम है।वहीं दलहन फसलों का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 60 हजार हेक्टेयर अधिक हो चुका है।जिसमें चना का बोआई रकबा 98 लाख हेक्टेयर हो गया है वहीं पिछले वर्ष चला का रकबा 93 लाख हेक्टेयर था।यद्यपि सरसों जैसे प्रमुख तिलहन की खेती में आंशिक नरमी दर्ज की गई है।इस बार असिंचित क्षेत्रों की मिट्टी में नमी बढी है जिसका फायदा रबी की खेती के लिए रामवाण साबित हुआ है।वहीं गेहूं और जौ अनुसंधान निदेशालय के निदेशक डॉक्टर जी पी सिंह ने कहा कि शीतकालीन बरसात से खेतों में खड़ी रबी की  फसलों के लिए रामवाण साबित हुआ है।इससे गेहूं सहित अन्य दलहनों व तिलहनों की दो सिंचाई को लेकर किसानों को फायदा होगा जिससे किसानों को लागत घटेगी।वहीं उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश,हरियाणा और राजस्थान के असिंचित क्षेत्रों में रबी फसलों की उत्पादकता में वृद्वि होगी।इस बार गेहूं की उत्पादकता में व्यापक बढोतरी होगी।जिससे गेहूं की कुल पैदावार 11 करोड़ टन की रिकॉर्ड स्तर को छू जाने की संभावना है।यह पिछले वर्ष के गेहूं उत्पादन 10 लाख करोड़ टन से लगभग एक करोड़ टन अधिक होगा।

© 2020 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer