डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स हटाकर

कंपनियों को बजट में राहत देने की कवायद
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । केद्र सरकार की तरफ से आम बजट में डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स हटाकर कंपनियों को भारी राहत दे सकती है।जिसके तहत डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स के बजाय डिविडेंड विदहोल्डिंग टैक्स लाए जाने की संभावना है।जिसके तहत कंपनियों के डिविडेंड हिस्से में से 20 प्रतिशत रकम टीडीएस की तरह ही काटकर शेयरहोल्डर को रकम आगे ट्रांसफर करेगी।
दरअसल इस समय डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन पर 20 प्रतिशत की रकम कंपनियों को अदा करती है।ऐसे में यदि डिविडेंड की रकम 10 लाख रुपए से अधिक हो तो उस पर 10 प्रतिशत की दर से शेयरहोल्डर के हाथ में भी टैक्स लगता है।बहरहाल आम बजट को लेकर प्रस्ताव किया गया है जिसके तहत सिर्फ शेयर होल्डर को ही डिविडेंड पर टैक्स भरना होगा और वह भी शेयरहोल्डर अपनी आमदनी के स्लैब के हिसाब से ही टैक्स भरेंगे और यदि आमदनी के आधार पर रिफंड बनता है तो रिफंड भी ले सकेंगे।जिसको लेकर कंपनियां पिछले लंबे समय से मांग करती आ रही है कि डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स कंपनियों पर दोहरी मार की तरह है क्योंकि कंपनी पहले अपने मुनापे पर टैक्स भरती है।फिर जब डेविडेंट देती है तो कंपनी को फिर से डेविडेंड की रकम पर टैक्स भरना पड़ता है।जिसे बाद में 10 लाख से अधिक डेविडेंड होने पर शेयरहोल्डर पर भी 10 प्रतिशत टैक्स भरने की जिम्मेदारी होती है।जिसको लेकर कंपनियों की तरफ से केद्रीय वित्त मंत्रालय से कई मांगे रखी है।जिसके तहत केद्रीय वित्त मंत्रालय से इसे हटाने को लेकर टॉप लेवल पर सहमति रही है क्योंकि इसे पिछड़ेपन वाला टैक्स सिस्टम माना जाता है।यद्यपि ददक्षिण अफ्रीका और जर्मनी जैसे देशों में पहले से ही डिविडेंड विदहोल्डिंग टैक्स काि नियम हø।वहीं भारत में डिविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स का नियम 1997 में लाया गया था।ऐसे में डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स हटने से कंपनियों का मुनाफाउ बढेगा क्योंकि डिविडेंड पर टैक्स का बोझ शेयरहोल्डर के खाते में जाएगा।जिसे कंपनियों इसे टीडीएस की तरह इक्कटा कर केद्र सरकार को जमा करने का काम करेगी।जिससे केद्र सरकार की आमदनी में कमी आने के आसार नहीं है।केद्र सरकार अपनी आमदनी प्रभावित किए बिना कोई कदम उठाए जिससे कंपनियां खुश हों तो ये मौजूदा माहौल में बढिया कदम माना जाएगा।जिससे डिविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स हटना काफी सकारात्मक होगा।जिससें छोटे निवेश्कों के लिए बेहतर होगा और कंपनियों के लिए भी फायदेमंद होगा।जिसके तहत निवेशकों पर यह आयकर के हिसाब से टैक्स लगाया जाए जो कि विदेशी कंपनियां टैक्स ट्रीटी के तहत होगी वह अपने देश में यदा किए गए टैक्स पर छूट भी ले सकेगी।वहीं डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स हटाना शेयर बाजार का मूड बेहतर करने वाला होगा।वहीं कंपनियों का मुनाफा बढेगा।ऐसे में कारोबारी माहौल बेहतर होने पर देश की अर्थव्यवस्था में निवेश को बढावा मिलेगा।

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