प्योर बनारसी साड़ी में सूरत उत्पादित सिंथेटिक फैंसी धागों का तड़का

प्योर बनारसी साड़ी में सूरत उत्पादित सिंथेटिक फैंसी धागों का तड़का
एग्रीकल्चर, ऑटोमोबाइल, मेडिकल, अंतरिक्ष आदि  क्षेत्रों में उपयोगी सूरत उत्पादित फैंसी यार्न
गणपत भंसाली
सूरत। वह जमाना गया तब यहां की स्पिनिंग मिलों में सिर्फ महिलाओं व पुरुषों के पहनने के परिधानों के उपयोगी यार्न उत्पादित होता था व उस यार्न के ही कपड़े बुने जाते थे। अब तो यहां उत्पादित पोलियस्टर यार्न अंतिरिक्ष शटल, एग्रीकल्चर, ऑटोमोबाइल, मेडिकल, स्पोर्टवेयर, शूज उत्पादन तथा रिसाइक्लेड यार्न पर्यावरण सुरक्षा के उपयोग में लिया जाता है।
यार्न व फैब्रिक्स विषय के विशेषज्ञ तथा साउथ गुजरात यार्न डीलर्स एसोसिएशन के ब्रांड एम्बेसडर ललित चांडक का कहना है कि सूरत में मिक्स धागों के मिश्रण से ऐसे ऐसे फैंसी यार्न तैयार किए जाते हैं कि ये यार्न किस्में तरह तरह के फैब्रिक्स बुनने के साथ-साथ अनेक महत्वपूर्ण विधाओं में उपयोगी साबित हो रहे हैं।
शहर में फैब्रिक्स व यार्न उत्पादन में नए-नए प्रयोग करने व अनूठी किस्में ईजाद करने में अग्रणी इकाई मधुसूदन ग्रुप के संचालक व चेम्बर ऑफ कॉमर्स में टेक्सटाइल्स कमेटी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में अग्रणी गिरधर गोपाल मूंदड़ा के अनुसार सूरत उत्पादित फैंसी यार्न अब तो  बनारसी साड़ियों की बुनावट के लिए उपयोगी साबित हो रहा हैं। मूंदड़ा बताते है कि बनारसी साड़ियां प्योर सिल्क धागों से ही बुनी जाती थी जो कि विभिन्न प्राकृतिक स्त्रोतों से ही उपलब्ध हो पाता था, प्योर होने के कारण वो यार्न महंगा भी बहुत होता था। समय ने करवट बदली और कारोबार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
बनारस के बुनकरों को मात भी सूरत उत्पादित सिंथेटिक साड़ियों के सस्तेपन से ही मिल रही है, वहां के बुनकर केंद्र सरकार तक अपनी तकलीफें पहुंचा चुके हैं यहां तक प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी जब बनारस दौरे पर थे तो उन्होंने सूरत से मिल रही प्रतिस्पर्धा का दर्द बयान किया। वैसे भी आवश्यकता अविष्कार की जननी है और वस्तु का विकल्प मौजूद है। आखिर बनारस के बुनकरों ने अपना कारोबार चलाए रखने व अपनी रोजी-रोटी अर्जित करने हेतु बदलाव की राह अपनाई और सूरत के मुकाबले में टिके रहने के उपाय खोजे और बनारस के बुनकरों ने उन साड़ियों की बुनावट में सूरत उत्पादित यार्न का इस्तेमाल करना शुरू किया। इसके पीछे मुख्य कारण सूरत उत्पादित यार्न प्योर यार्न की तुलना में मात्र आधी दरों में ही उपलब्ध हो जाता हैं।
मूंदड़ा के अनुसार बनारस की कुल खपत में 75 प्रतिशत यार्न अब सूरत से चालान होता हैं।  बताया जाता है कि ये यार्न पतले फ़ाईन डोनियर से लेकर मोटे डोनियर तक में उपलब्ध है। ये उल्लेखनीय है कि ये यार्न किस्में सल्ब यार्न, मल्टीकलर यार्न, नेप्स यार्न, मिलांज्ज लुक यार्न, मोटे-पतले मिक्स यार्न के रूप में जानी जाती हैं। विशेष यह भी है कि पोलिएस्टर यार्न का जो लुक है वो ऑरिजनल को भी मात करता है। बताया जाता है कि इन धागों से निर्मित फैब्रिक्स का प्रोसेस भी काफी सरल हैं। मूंदड़ा के अनुसार इस टेक्नोलॉजी के युग मे फैशन बड़ी ही तीव्रता से करवट बदल रहा हैं।
अत: अब महिलाएं न बल्कि रंगों व डिजाइनों में हर बार नया व हट कर चाहती है अपितु बुनावट तक में नयापन चाहती हैं। यही वजह है कि अब वीविंग इकाइयों के वीवर भी हर बार कुछ नया देना चाहते है और इन सभी को देख यार्न उत्पादक नए-नए प्रयोग में जुटे रहते हैं। अब तो ये फैंसी यार्न व इससे उत्पादित कपड़ा शूज कम्पनियों के उपयोग में आने लग गया हैं। कपड़े पर आधारित जो शूज बनाए जाते है उसके लिए उपयोगी कपड़ा सूरत से बड़े पैमाने पर चालान होता हैं। जब-जब भी सूरत में टेक्सटाइल्स फेब्रिक्स आदि के फेयर आयोजित होते है तो मधुसूदन समूह सहित अनेक उत्पादक अपने स्टॉल पर सूरत के फेब्रिक्स से उत्पादित शूज अवश्य प्रदर्शित करते हैं। जहां तक यहां उत्पादित यार्न से बुने कपड़ों के एग्रीकल्चर सेक्टर में उपयोग का प्रश्न है तो इन यार्न किस्मों से नेट आदि वे कपड़े बनाए जाते है जो फसलों को ओलों व पक्षियों आदि से बचाने के लिए तिरपाल की तरह उपयोग में लिए जाते हैं, श्री ललित चांडक के अनुसार ये कपड़े किसान धरती में गड्ढे कर उसे चादर की तरह बिछाते है जिससे पानी को सोखा जा सके। ये कपड़े तरह-तरह के मिक्स धागों से  तैयार किये जाते है। ऐसे स्पन यार्न के उत्पादन में निम्बार्क फैशन अग्रणी है।
ये समूह यार्न के साथ-साथ फैब्रिक्स भी बनाता है। मिक्स धागों के मिश्रण से फैंसी यार्न उत्पादित करने वाली इकाइयों की सूची में मुनिवर स्पिनिंग का भी समावेश है। ये इकाई वीविंग क्षेत्र में भी कार्यरत हैं। इन धागों से निर्मित ये कपड़े बड़े-बड़े थानों में उपलब्ध रहते हैं। व बड़े पन्ने (चौड़ाई) मेभी मिलते हैं। ये मिक्स धागे 150 रु. से 300 रु. किलो की दर से बिकते हैं।  

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