वैश्विक स्तर पर खादी कपड़ा-परिधान का क्रेज

वैश्विक स्तर पर खादी कपड़ा-परिधान का क्रेज
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) की तरफ से पेरिस कंवेंशन प्रोटेक्शन ऑफ इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी के तहत खादी को लेकर वैश्विक ट्रेडमार्क लेने पर गंभीरता पूर्वक विचार कर रही है।जिसको लेकर केवीआईसी की तरफ से घरेलू सहित वैश्विक बाजार में खादी के नाम से नकली खादी उत्पाद की बिक्री को रोकने के उदृदेश्य से यह कदम उठाएगी।यद्यपि केवीआईसी पहले से ही खादी मार्के के रेगुलेशन को लेकर जर्मनी सहित कई देशों में इस मामले से दोचार हो रही है।
दरअसल माइक्रो,स्माल एण्ड मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) की तरफ से 2013 में जारी रेगुलेशन के तहत केवीआईसी को खादी मार्क पंजीकरण देने का अधिकार प्रदान करता है।वहीं केवीआईसी ने 2015 में गारमेंट रिटेलिंग चेन फैबइंडिया पर मिल में तैयार फैब्रिक्स को खादी बताकर बेचने को लेकर लगभग 600 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। उल्लेखनीय है कि आमतौर पर खादी के कपड़े हथकरघे पर कताई के माध्यम से तैयार किए जाते हैं।वहें पेरिस कंवेंशन एक बहुपक्षीय संधि है जो कि व्यापक स्तर पर इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूआईपीओ) संयुक्त राष्ट्र की स्पेशलाइज्ड एजेंसियों में से एक है जो कि इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के प्रचार और सुरक्षा को लेकर काम कर रही है।जिसको लेकर केवीआईसी के अध्यक्ष विजय कुमार सेक्सेना ने कहा कि देश में आजादी से पहले के दौर से ही खादी को स्वदेशी का राष्ट्रीय चिन्ह माना गया है।यह शब्द खादी,कुटीर और सर्वोदय को दर्शाता है।ऐसे में आज खादी इंडिया का लोगो और चरखा इसी भावना के वाहक हैं।ऐसे में इसका संरक्षण किया जाना आवश्यक है।वहीं पेरिस कंवेंशन 1883 का अनुच्छेद 6 संधि के सदस्य देशों की तरफ से अपनाए गए अधिकारिक चिन्ह,नियंत्रण और वारंटी दर्शाने वाले हॉलमार्क सहित हथियारों पर अंकित चिन्ह,झंडे और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों की रक्षा करता है।जिसको लेकर केवीआईसी के चेयरमैन विजय कुमार सेक्सेना ने केद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुजारिश की है ताकि डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एण्ड इंटरनल ट्रेड (डीपीआइआईटी) इस मामले पर प्राथमिक आधार पर ध्यान केन्छ्रित करें।चूंकि खादी के प्रतीक यानि चरखा या घूमता हुआ पहिया को वैश्विक स्तर पर दुरुपयोग से बचाने को लेकर केवीआईसी पहले ही यह मामला केद्रीय विदेश मंत्रालय के समक्ष रख चुका है।  

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