सोयाबीन में तेजी की संभावना नहीं

सोयाबीन में तेजी की संभावना नहीं
इब्राहिम पटेल
सोयाबीन कांप्लैक्स में मजबूत खरीदारी निकलेगी ऐसे संयोग नहीं है, इसलिए भाव में ऊछाल भी संभावित नहीं है। लंबे समय से जिसका इंतजार किया जाता था वह अमेरिका के साथ पहले चरण के व्यापार कांट्रैक्ट होने के बाद, वास्तव में सोयाबीन के भाव गिरे थे। चीन अपनी आवश्यकता होगी और भाव मुनासीब लगेंगे, तब ही सोयाबीन खरीदेंगे, इसे देखते हुए आंतरप्रवाह में कोई बदलाव नहीं आया। शिकागो सोयाबीन मार्च वायदा 8 जनवरी को एक साल की ऊंचाई 9.54 डॉलर प्रति बुशेल (27.218 किलो) पर बोला गया था, उसके बाद `सच्चाई बेचो' रिएक्शन के साथ इस सप्ताहांत में भाव घटकर 9.29 डॉलर पर बंद हुआ था। 
अमेरिकी सोयाबीन और मक्का, जो चीन अपने पशुचारा और मानव आहार के लिए खरीदने की संभावना है, पिछले बुधवार को हुए 86 पन्ने के पहले चरण के ट्रेड वॉर समाधान कांट्रैक्ट को ध्यान में रखते हुए ट्रेडर्स को वास्तविक सौदे किस तरह बैठाने चाहिए यह समझना मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं सौदे करते समय बहुत सावधानी रखने की आवश्यकता हो गई है, क्योंकि पिछले 18 महीनों से अमेरिका ने चीन के कोई सामान पर आयात शुल्क लागु नहीं किया, अब कांट्रैक्ट हो गया है, तब यह आयात शुल्क रद्द होगा कि नहीं इसकी कोई बातचीत नहीं हुई। ऐसी आयात शुल्क का आंकड़ा 360 अरब डॉलर का है। 
9 जनवरी तक अमेरिकी सोयाबीन की साप्ताहिक निर्यात बुकिंग 7,11,462 टन हुई थी, जिसमें से चीन के लिए 2,16,609 टन रवाना होगी। एक साल पहले अमेरिकी सोयाबीन का 2019-20 के लिए निर्यात बुकिंग 304.83 लाख टन हुआ था। इनमें से 63 प्रतिशत निर्यात पूरे साल में होने का पूर्वानुमान अमेरिका ने लगाया था, लेकिन यह अब तक में 78 प्रतिशत दर्ज हुआ है। 
वर्ल्ड एग्रीकल्चर सप्लाय एंड डिमांड इस्टिमेट (वास्डे) अभी चीन में कितनी निर्यात होगी, इसका अनुमान नहीं कर पाए है, वह मानते है कि 2020 में जो कुछ अधिशेष सोयाबीन होगी यह एक्सपोर्ट शिपिंग प्रोग्राम के तहत हो जाएगा। चीन इनमें से खाद्य तेल एवम पशुचारा के लिए अमेरिकी कृषि उत्पादों का ऐतिहासिक रूप से भी सबसे बड़ा आयातक देश है। 
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने बुधवार को कांट्रैक्ट्स पर हस्ताक्षर होने के बाद कहा था कि चीन अगले दो साल तक वार्षिक औसत 40 लाख डॉलर के हिसाब से अमेरिकी कृषि वस्तुएं खरीदेगा। नए कांट्रैक्ट, चीन को अपने व्यापारी हेतूओं को पूरा करने के लिए जो भी समय पर बाजार की स्थिति को जांचकर, अनुकूल भाव से खरीदारी करने की मंजूरी देता है। वर्तमान और 2021 के बीच चीन कांट्रैक्ट की धारा के मुताबिक चलेंगे या नहीं इसके लिए शंकाएं उठाई गई है। 
नेशनल ऑस्ट्रेलियन बक का कहना है कि अमेरिकी निर्यात पर चाइनीज़ शुल्क कितना लगेगा, इसके बारे में सब कुछ अद्धरताल होने से, किसानों और ट्रेडिंग कम्यूनिटी भी असमंजस में पड़ गई है। अफ्रिकी स्वाइन फ्लू के बाद पशुचारा के लिए चीन की सोयाबीन बाजार सकारात्मक होगी या नहीं यह भी तय नहीं है। एतिहासिक रूप से चीन अमेरिकी सोयाबीन की व्यापक खरीददारी अक्टूबर से दिसंबर के दौरान करता है, तब तक दक्षिण अमेरिकी देशों का आपूर्ति प्रवाह एकदम घट गया होता है। 
यह अवधि आए तब तक चीन के खरीददार सोयाबीन के लिए बड़े पैमाने पर पैसे बचाकर रखते हैं। यदि ऐसा ही रूख इस बार भी अपनाएंगे तो अल्पावधि में सोयाबीन कांप्लैक्स में कोई तेजी नहीं बनेगी। चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर हल्का होगा तो भी वैश्विक बाजार में कंई रिएक्शन देखने मिलेंगे। बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच का व्यापार टेंशन का सबसे बड़ा लाभ यदि कोई कृषि क्षेत्र को मिला होगा तो इनमें से एक देश ब्राजील है। लेकिन अब चीन अमेरिका से अधिक सोयाबीन खरीदेगा, ऐसे पूर्वानुमान पर ब्राजील की कृषि समस्या में वृद्धि होने का डर है।

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